जिलाधिकारी ने सम्बंधित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि जिले की सभी गौशालाओं में नर और मादा पशुओं को अलग अलग रखा जाए। साथ ही गोवंश आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश के सापेक्ष शेड व चरही की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि गौशालाओं में चारागाह की भूमि पर बोये गये हरे चारे नेपियर, बरसीम आदि के क्षेत्रफल को बढाया जाए जिससे हरे चारे की पर्याप्त व्यवस्था हो सके। गौशालाओं में पशुओं की एआई कराने के भी निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि गोबर का उपयोग वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने में किया जाए। इसके लिये स्वयं सहायता समूह का भी योगदान लिया जाए। गौशालाओं से दूध कलेक्शन के भी प्रयास किये जायें। जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशा है कि पंचायतें अपनी आय के श्रोतों पर ध्यान दे। जिनमें गौशाला भी आय का एक अच्छा श्रोत बन सकती है। जिलाधिकारी ने कहा कि अच्छा कार्य करने वाले ग्राम प्रधानों को सम्मानित भी किया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि जिले की सभी 123 गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किये जायें। गोवंश आश्रय स्थलों में वर्मी कम्पोस्ट इकाई के संचालन एवं वर्मी कम्पोस्ट खाद, गोबर की खाद व दूध आदि की बिकी से आय के प्रयास किये जायें।जिलाधिकारी ने कहा कि गौशालाओं में पर्याप्त शेड और चरही का निर्माण शीघ्रता के साथ करा लिया जाए। उन्होंने कहा कि जिले की सभी गौशालाओं में रात्रि में प्रकाश पर विशेष ध्यान दिया जाए। जहाँ भी प्रकाश की समस्या है वहाँ पर प्रकाश की समुचित व्यवस्था करा ली जाए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अन्ना सुदन, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी अतुल अवस्थी सहित सम्बंधित अधिकारी मौजूद रहे।





