समरस समाज की स्थापना ही संघ का लक्ष्य: गंगा
तेजस टूडे ब्यूरो
गोविन्द वर्मा
बाराबंकी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित शाखा संगम में 24 बस्तियों की शाखाओं को एक साथ लगाने का अभिनव प्रयोग हुआ। सभी शाखाओं के मुख्य शिक्षक एवं शाखा कार्यवाह अपने ध्वज एवं स्वयंसेवकों को लेकर कार्यक्रम में शामिल हुए। स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए आरएसएस के प्रांत संपर्क प्रमुख गंगा सिंह ने कहा कि आरएसएस की शाखा व्यक्ति के बौद्धिक विकास व चरित्र निर्माण की अभिनव प्रयोगशाला है। यहां स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व निर्माण से राष्ट्र निर्माण की परिकल्पना साकार होती है। साथ ही स्वयंसेवक अनुशासन सीखते हैं। बाल, तरुण, प्रौढ़ सभी वर्ग के लोग इसमें शामिल होकर आपस में सामंजस्य स्थापित करते हैं। उन्होंने कहा कि शाखा में स्वयंसेवक सामाजिक समरसता, देश की सभ्यता व संस्कृति से परिचित होते हैं। शाखा में भाग लेने से व्यक्ति मानसिक व शारीरिक रूप से सबल बनता है। शाखा पर प्रतिदिन फहराए जाने वाले भगवा ध्वज को उन्होंने सनातन धर्म व संस्कृति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि शाखा में ध्वज फहराने के पश्चात सूर्य नमस्कार, योग, व्यायाम, खेल, देशभक्ति के गीत होते हैं जिससे लोगों में राष्ट्रप्रेम का भाव जागृत होता है। विश्व कल्याण के लिए भारत को विश्वगुरु बनाने में आरएसएस के स्वयंसेवकों की भूमिका अहम है। संघ संस्थापक डॉ हेडगेवार की 1925 में शुरू की गई शाखा का यह शताब्दी वर्ष है। वसुधैव कुटुंबकम् भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति का मूल मंत्र है जबकि सर्वे भवन्तु सुखिनः भारत का दर्शन है। भेदभाव मुक्त समरस समाज की स्थापना संघ का लक्ष्य है। उन्होंने पंच परिवर्तन के मायने समझाते हुए इसे समाज परिवर्तन के लिए अहम बताया। इस दौरान वंदे मातरम, भारत माता की जय, हर-हर बम-बम के नारों की गूंज दूर तक फैलती रही। स्वयंसेवकों ने बौद्धिक से पूर्व विभिन्न प्रकार के खेलकूद, योग, व्यायाम इत्यादि का प्रदर्शन किया।
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