सभी मिलकर एक रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे: सांसद मनीष जायसवाल
आह्वान: सब मिलकर करेंगे सामाजिक एवं राजनीतिक उत्थान के लिये कार्य
ग्लोबल अहलूवालिया कलाल, कलवार, कलार फाउण्डेशन ने किया कार्यक्रम
तेजस टूडे ब्यूरो
नई दिल्ली। ग्लोबल अहलूवालिया कलाल, कलवार, कलार फाउंडेशन एवं दिल्ली के सभी प्रमुख, अध्यक्ष, समाजसेवियों की भागीदारी कार्यक्रम संयोजक रामकुमार वालिया अध्यक्ष ट्रस्टी एवं पूर्व राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त द्वारा हौज़ खास दिल्ली में स्थित ओडीटोरीयम में आयोजित किया गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि वर्तमान में सांसद एवं पूर्व में मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड त्रिवेंद्र सिंह रावत एवं अति विशिष्ट अतिथि जायसवाल सिरमौर मनीष जायसवाल सांसद हजारी बाग झारखंड एवं दिल्ली के हौज खास से विधायक सतीश उपाध्याय, जय नारायण चौकसे भोपाल, एडवोकेट शैलेन्द्र जायसवाल राष्ट्रीय महासचिव अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा, अटल गुप्ता राष्ट्रीय संयोजक जायसवाल महासभा, पूर्व कुलपति गुलाब चंद जायसवाल वाराणसी, पूर्व महापौर संजीव वालिया, पूर्व डिप्टी मेयर एवं प्रदेश अध्यक्ष विजय भगत, सौरभ जायसवाल गाजियाबाद, एडवोकेट नरेश जायसवाल अहमदाबाद (गुजरात), श्रीमती अर्चना जी इन्दौर, किशोर भगत आइका, सूखचैन वालिया शामली, मूलचंद पवार गुरुग्राम, मुकेश चौकसे फिल्म एक्टर, प्रीति चौकसे, रवि जायसवाल अध्यक्ष जयभद्र फाउंडेशन, मनोज शाह अध्यक्ष जायसवाल जागृति दिल्ली, अनिल जायसवाल सेक्रेटरी दिल्ली, सच्चिदानंद जायसवाल, राजश्री कुमार दिल्ली, अनिता जायसवाल लखनऊ, वीना मालवीय पटना बिहार सहित तमाम महानुभाव की उपस्थिति रही।
संस्था ने पूरे भारत वर्ष से पधारे सभी प्रमुख अतिथियों का सम्मान किया और सामाजिक एवं राजनीतिक चर्चा करते हुये कहा कि सब मिलकर सामाजिक एवं राजनीतिक उत्थान के लिए कार्य करेंगे। इसी बात का संकल्प भी लिया गया। समारोह के केंद्र में मुख्य वक्ता के रूप में सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि जायसवाल समाज के सभी उपवर्गों को पारस्परिक मतभेद भुलाकर हिंदू के नाते अपने जाति उत्थान के साथ संपूर्ण हिंदू समाज की एकता और प्रगति की भी चिंता करनी पड़ेगी। हम एक रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे और हमें हिंदू के नाते भी राष्ट्र धर्म के बारे में भी सोचना होगा। राष्ट्रीय जनगणना में हमें अपनी जाति के रूप में कलवार, कलाल और कलार अंकित करना चाहिए। सभी को वर्गों में अपने वर्ग नाम के साथ कलवार अथवा कलाल अथवा कलार शब्द जोड़ना चाहिए। सभी को संगठित होकर अपनी राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी अंकित करने के लिए प्रयास करना चाहिए।
अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के राष्ट्रीय महासचिव एवं दिल्ली एनसीआर के अध्यक्ष शैलेन्द्र जायसवाल ने विचार रखते हुए कहा कि सभी स्वजातीय संस्थाओं में परस्पर सामाजिक समन्वय होना ही चाहिए। न्यूनतम कार्यक्रम तय करके सामूहिक प्रयास के आधार पर ही हमारा समाज राजनैतिक रूप से भागीदारी पाने में सफल होगा। समारोह के संयोजक रामकुमार वालिया ने सभी को एक साथ समाज मिलकर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही सहयोग के लिए सभी आभार और धन्यवाद किया। इस अवसर पर दिल्ली एनसीआर के सैकड़ों लोगों के अलावा आहलुवालिया, कलवार समाज के लोग के उपस्थित रहे।
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राजनीतिक दलों के प्रमुखों से मिला महासभा का प्रतिनिधिमण्डल मिलेगा: ध्रुवचन्द जायसवाल
तेजस टूडे ब्यूरो
नई दिल्ली। आज की परिस्थितियों में आवश्यक हो गया है कि बिना सरकार या विपक्ष में शामिल हुए किसी भी स्तर पर समस्याओं का समाधान होना बहुत मुशकिल है, इसलिए महासभा के संरक्षक पूरन चंद झरीवाल के नेतृत्व में राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों के अध्यक्षों से मिलकर उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए उचित समाधान का अनुरोध करेगा। स्मरण रहे कि आज तक भाजपा ने राज्यसभा एवं विधान परिषद में हमारे समाज के लोगों को प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं दिया जबकि अन्य समाज को मौका दिया जिनका दूर-दूर तक भाजपा से सम्बन्ध नहीं था तथा चुनाव तक रहेगा। उक्त बातें अखिल भारतीय कलवार कलाल कलार जायसवाल महासभा के राष्ट्रीय महासचिव ध्रुवचन्द जायसवाल ने प्रेस को जारी बयान में कही।
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा ने 2014 से 2024 तक लोकसभा चुनाव में एक-दो टिकट छोटे राज्यों को छोड़कर पूरे देश के बडे़ राज्यों उत्तर प्रदेश्, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल सहित किसी भी राज्यों मे टिकट नहीं दिया तथा राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी में जिम्मेदारी नहीं दी किन्तु अब अखिल भारतीय कलवार कलाल कलार जायसवाल महासभा एवं पिछड़े वैश्यों की उपेक्षा चुनावों में नहीं कर सकेगी। महासभा अपनी रणनीति बना ली है। सभी राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों के अध्यक्षों को महासभा के विचारों से अवगत करायेगा। स्मरण रहे कि महासभा दशकों से अपना हक लेने हेतु राज्यसभा व विधान परिषद में उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग निरंतर की थी किन्तु मांग अनसुनी कर दी गई।
श्री जायसवाल ने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव के पूर्व में महासभा का 31 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल पूर्व यूपी अध्यक्ष स्वत्रंतदेव सिंह से मिला था। कुछ सफलता जरुर मिली थी। उनके हटते ही 2024 के लोकसभा चुनाव में पुनः उपेक्षा हो गयी। महासभा द्वारा दशकों पुरानी मांगे विधान परिषद एवं राज्यसभा में उचित प्रतिनिधित्व देने एवं केन्द्र सरकार से डाॅ काशी प्रसाद जायसवाल को मरणोपरांत भारत रत्न देने की तर्क संगत मांग कई दशकों है। जो भी पार्टी महासभा के विचारों पर सहमति/स्वीकृति प्रदान करेगा, देश में होने वाले विधानसभाओं के चुनावों में तन-मन-धन के साथ महासभा मदद करने का ऐलान कर देगा। महासभा ने यह भी संकल्प लिया कि जो भी पार्टी महासभा के लोगों की उपेक्षा करेगा, उसको किसी भी कीमत पर आगामी विधानसभा चुनाव में समर्थन नहीं दिया जायेगा। महासभा को आशा ही नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास है कि अब तक के प्रयासों से किसी न किसी दल से महासभा को सकारात्मक परिणाम के संकेत मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव जायसवाल को राष्ट्रीय महासचिव मनोनीत किया है। अच्छी शुरुआत हुई है। परिणाम सकारात्मक होंगे। जो भी पिछड़े वैश्य एवं स्वजातीय बन्धु विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। अपने स्तर चुनाव लड़ने का संकल्प लेकर तैयारी शुरू कर दें। महासभा अपने स्तर से मदद करने की रणनीति बनायी है।
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अखिल भारतीय कलाल कलवार कलार जायसवाल महासभा की दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण बैठक
तेजस टूडे ब्यूरो
नई दिल्ली। अखिल भारतीय कलाल कलवार कलार जायसवाल महासभा के राष्ट्रीय संरक्षक पूरन चंद झरीवाल ने मंगलवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब के डिप्टी स्पीकर हाल में संस्था के 12 प्रदेशों के अध्यक्षों सहित अन्य पदाधिकारी के साथ हुई बैठक में इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया के साथ वार्ता करते हुए यह वक्तव्य दिया कि जिस प्रकार राजस्थान की पिछड़ा वर्ग आयोग की सूची में कलाल नाम अंकित है, ठीक उसी प्रकार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सूची में भी कलाल नाम अंकित होना चाहिए, ताकि कलाल समाज के उच्च शिक्षित युवक—युवतियां केंद्रीय सेवाओं की यूपीएससी अथवा एसएससी सहित अन्य सेवाओं में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव जायसवाल, राष्ट्रीय महासचिव ध्रुव चन्द्र जायसवाल, राजस्थान प्रभारी लोकेश जायसवाल, राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष नरेश धानावत के साथ महेश जायसवाल पत्रकार, राजकुमार जायसवाल अलवर सहित तमाम स्वजातीय बन्धु उपस्थित थे।
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जीएकेकेकेएफ के राष्ट्रीय ट्रस्टी बनाये गये अटल गुप्ता कलवार
तेजस टूडे ब्यूरो
नई दिल्ली। ग्लोबल अहलूवालिया कलाल कलवार कलार फाउंडेशन (जीएकेकेकेएफ) नई दिल्ली के अध्यक्ष रामकुमार वालिया ने अटल गुप्ता कलवार को संगठन का राष्ट्रीय ट्रस्टी व तेलंगाना राज्य व पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया है। श्री वालिया ने अटल गुप्ता कलवार को नियुक्त पत्र भेजते हुए अपने पत्र में कहा कि हमारे समाज का एक अंतरराष्ट्रीय स्तरीय संगठन ग्लोबल अहलूवालिया कलाल कलवार कलार फाउंडेशन का गठन किया जा चुका है। इस संगठन को भारत सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय ट्रस्ट की मान्यता भी प्राप्त कर दी गई है। इसी संगठन को पूरे देश तथा विश्व में गठित किए जाने हेतु गठन की प्रक्रिया जारी है। समाज को एकजुट करने के इस बड़े कार्य में आपसे सहयोग की आशा रखते हुए तथा आपके अनुभव तथा समाज के प्रति समर्पित भावना को देखते हुए आपको इस संगठन का राष्ट्रीय ट्रस्टी व तेलंगाना राज्य व पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी भी नियुक्त किया गया है।
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सरदार जस्सा सिंह अहलूवालिया का 308वां जन्मदिवस धूमधाम से मना
कलवार समाज के जस्सा जी ने तमाम ऐतिहासिक कार्य किेये: शैलेन्द्र जायसवाल
तेजस टूडे ब्यूरो
दिल्ली। सफदरजंग एनक्लेव के आर्य समाज मंदिर के सभागार में रामकुमार वालिया के संयोजन में जो उत्तराखंड सरकार में पूर्व राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त हैं, सर्वसमाज के साथ कलाल समाज सैकड़ों बंधुओं ने सरदार महराजा जस्सा सिंह अहलूवालिया की जन्म जयंती पर उनको श्रद्धांजलि और पुष्पांजलि अर्पित किया।
सभा में उत्तराखंड सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग के दर्जा प्राप्त मंत्री देशराज करनवाल, दिल्ली भाजपा के नेता विजय भगत, पूर्व डिप्टी मेयर उत्तरी दिल्ली नगर निगम, दिल्ली के वरिष्ठ समाजसेवी एडवोकेट शैलेंद्र जायसवाल राष्ट्रीय महासचिव अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय की महासभा, मीनाक्षी जायसवाल राष्ट्रीय संयोजिका अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महिला महासभा, अमृता जायसवाल, गोविन्द वालिया, संजय अहलूवालिया, विकास वालिया, अविनाश जयसवाल राष्ट्रीय संगठन मंत्री सिक्ख संगत/वरिष्ठ प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आदि मौजूद रहे।
इस मौके पर उपस्थित लोगों ने सरदार जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि और पुष्पांजलि अर्पित किया जहां शैलेन्द्र जायसवाल ने कहा कि किस प्रकार से सरदार जस्सा सिंह जो शेर हिंद के नाम से जाने जाते हैं, ने मुगल शासको को पराजित कर अनेकों उल्लेखनीय कार्य किये थे। सिक्ख धर्म के दसवें गुरु, खालसा पंथ के संस्थापक श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज भी हमारे ही कलाल समाज के जन्म लेने वाले गौरवशाली महाराज थे। इस श्रृंखला में कलाल परिवार में जन्म लेने वाले महाराजा सरदार जस्सा सिंह ने भी कई कीर्तिमान स्थापित किया। पूरे कलाल समाज को ही नहीं, बल्कि पूरे देश के हिन्दू समाज को भी उन पर गर्व है।
उन्होंने बताया कि सरदार जस्सा सिंह कलवार जाति से संबंध रखते थे। वह एक महान सिख योद्धा थे जिन्होंने 18वीं शताब्दी में सिख साम्राज्य की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनका जन्म 3 मई 1718 को लाहौर के पास अहलू गांव लाहौर में हुआ था। उनके पिता का नाम बदर सिंह और माता का नाम जीवन कौर था। जस्सा सिंह ने अपनी शिक्षा गुरुओं और विद्वानों से प्राप्त की और शस्त्र विद्या और घुड़सवारी में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। जस्सा सिंह ने सिख साम्राज्य की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अहमद शाह अब्दाली, खादिर शाह जैसे शक्तिशाली आक्रमणकारियों का सामना किया और सिख साम्राज्य की रक्षा की। उन्होंने लाहौर पर विजयी प्रवेश किया और सिख सेना का नेतृत्व किया। जस्सा सिंह ने अब्दाली की सेना पर हमला किया और बंदी बनाए गए हिंदू महिलाओं को मुक्त करवाया। उन्होंने नादिर शाह की सेना पर हमला किया और लूट और बंदी महिलाओं को बरामद किया। उन्होंने लाहौर पर विजयी प्रवेश किया और सिख सेना का नेतृत्व किया। सभा की संयोजक रामकुमार बलिया ने सभी को पुष्पगुच्छ भेंट करते हुये उपस्थित बच्चों को उपहार भेंट करके सम्मानित किया।
——इनसेट——
कलवार/जायसवाल जाति का नाता
जस्सा सिंह आहलूवालिया कलाल, कलवार/जायसवाल जाति से संबंध रखते थे जो पंजाब में एक प्रमुख जाति है। उनकी वीरता और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें सिख इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। उनकी माता ने उन्हें गुरबानी के ज्ञान में पारंगत किया और वे सिख मंडलियों में सुबह और शाम कीर्तन करते थे। नवाब सरदार कपूर सिंह ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अपने संरक्षण में लिया। उन्होंने नवाब कपूर सिंह के साथ रहकर सेना के घोड़ों को खिलाने का काम किया और बाद में उन्हें अमृतपान करवाया गया। उन्होंने सिख साम्राज्य की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अहमद शाह अब्दाली और नादिर शाह जैसे शक्तिशाली आक्रमणकारियों का सामना किया और सिख साम्राज्य की रक्षा किया।
——इनसेट——
कपूरथला घराने की स्थापना
जस्सा सिंह कपूरथला घराने के संस्थापक थे। उन्होंने अपनी वीरता और नेतृत्व क्षमता के बल पर सिख साम्राज्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपनी एक अलग पहचान बनाई। वह एक महान सिख योद्धा थे जिन्होंने सिख साम्राज्य की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी वीरता और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें सिख इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। वह कलवार जाति से संबंध रखते थे और उनकी उपलब्धियां आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।
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उत्तर प्रदेश सहित बिहार—राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रभारी बनाये गये: ध्रुवचन्द जायसवाल
तेजस टूडे ब्यूरो
दिल्ली। अखिल भारतीय कलवार-कलाल-कलार जायसवाल महासभा की बैठक दिल्ली में राजीव जायसवाल की अध्यक्षता में हुई जहां कुछ महत्वपूर्ण पदाधिकारियों के चयन के सम्बन्ध में विचार-विमर्श के दौरान राष्ट्रीय संरक्षक पूरन चन्द झरीवाल ने सभी नियुक्तियों पर सहमति प्रदान किया।
जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के रमाकांत जायसवाल, बिहार के अमित प्रवीण जायसवाल एवं राजस्थान के नरेश धनावट के नाम सर्वसम्मति से तय की गयी। इसी दौरान क्रमशः राष्ट्रीय वरिष्ठ कार्यकारी अध्यक्ष विजय जायसवाल उत्तर प्रदेश, जिला जयपुर निवासी लोकेश जायसवाल राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रभारी राजस्थान राजस्थान एवं आशीष जायसवाल राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रभारी उत्तर प्रदेश के नाम भी तय कर दिया गया। कुछ महत्वपूर्ण पदों के लिये नामों की घोषणा भी शीघ्र ही कर दी जायेगी।
इस आशय की जानकारी देते हुये राष्ट्रीय महासचिव ध्रुवचन्द जायसवाल ने बताया कि मई माह के दूसरे सप्ताह में पूर्वोत्तर के राज्य आसाम, नागालैंड, मिजोरम, मेघालय, छत्तीसगढ़ सहित 11 राज्यों में पहले चरण के अध्यक्षों का मनोनयन कर दिया जायेगा। दूसरे चरण में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र सहित 7 प्रदेशों में भी प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की जाएगी।
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जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा दिल्ली एनसीआर के अध्यक्ष शैलेन्द्र जायसवाल की अगुवाई में दिल्ली मुख्यमंत्री का हुआ स्वागत
तेजस टूडे ब्यूरो
शुभम जायसवाल/शुभांशू जायसवाल
नई दिल्ली। अंतराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन द्वारा आयोजित दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में अभिनंदन सम्मान समारोह दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता एवं होली मंगल मिलन समारोह धूमधाम से मनाया गया जहां वैश्यों के सभी घटकों के प्रमुख वैश्य बंधु कार्यक्रम में उपस्थित रहे।कार्यक्रम की अध्यक्षता आईवीएफ के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने किया जहां दिल्ली के सभी वैश्य विधायक, सांसद सहित राजनीतिज्ञ मौजूद रहे। जायसवाल घटक की तरफ से जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा दिल्ली एनसीआर के अध्यक्ष शैलेंद्र जायसवाल एडवोकेट की अगुवाई में अनेकों जायसवाल बंधु कार्यक्रम की शोभा बढ़ाये।
समारोह में अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महिला महासभा की राष्ट्रीय संयोजिका मीनाक्षी शैलेंद्र जायसवाल, मीना गुप्ता एवं जयश्री गुप्ता ने पुष्प गुच्छ, शाल/अंगवस्त्र भेंट करके दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का अभिनंदन किया।
शैलेंद्र जायसवाल ने मुख्यमंत्री जी का परिचय कराते हुए बताया कि किस प्रकार से दिल्ली में जायसवाल वैश्य बंधुओं ने भाजपा के पक्ष में एक होकर मतदान करने का फैसला किया। वहीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि मेरे भी चुनाव क्षेत्र में बाहर से आये जायसवाल बंधुओं ने काम किया है। मैं आप सभी की आभारी हूं कि आप सभी के समर्थन और सहयोग से दिल्ली में भाजपा की सरकार और मैं मुख्यमंत्री बन पाई हूं। मैं एक वैश्य नेत्री हूं और वैश्य हमेशा की तरफ से राष्ट्र शक्ति के रूप में सामाजिक, आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता रहा है। आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है कि आगे भी मुझे सभी वैश्य भाइयों का दिल्ली को विकसित दिल्ली और विकसित भारत बनाने में सहयोग पूर्व की तरह ही करते रहेंगे।
समारोह में अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय के महासभा के राष्ट्रीय महासचिव शैलेंद्र जयसवाल की अहम भूमिका रही जहां दूसरे भी पदाधिकारी उपस्थित रहे जिनमें भीम जी जायसवाल, विनोद गुप्ता सीए, दिनेश कलवार, बृजमोहन जायसवाल, अंजनी जायसवाल, अनिल जायसवाल, शिवम जायसवाल, अर्पित जायसवाल, राजेश जायसवाल, अशोक गुप्ता, रितेश जायसवाल के साथ तमाम जायसवाल बंधु मौजूद रहे। कलाकारों द्वारा भव्य रंगारंग होली फाग महोत्सव का आयोजन हुआ जहां लोगों ने भाग का आनंद लिया। स्वागत टीम द्वारा सभी अतिथियों को अंगवस्त्र भेंट करके स्वागत किया गया। समारोह में हर दृष्टि से राजनीतिक एवं सामाजिक सद्भाव का समन्वय दिखा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने उद्बोधन में एक वैश्य नेत्री को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाकर देश के प्रधानमंत्री ने भारत की आबादी का प्रतिनिधित्व एक महिला को सौंपा है। पूरे देश की सभी हमारी माता बहनों का सम्मान बढ़ाया है। हमें ऐसे देश के प्रधानमंत्री पर गर्व है। हम सब बहनों का भी एक कर्तव्य है कि हम एक भारत श्रेष्ठ भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निर्धारित करें।
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सामाजिक समरसता एवं एकता का कोई विकल्प नहीं: मदन लाल जायसवाल
जायसवाल समाज यमुनापार का 42वां होली मंगल मिलन समारोह सम्पन्न
मंचासीन अतिथियों ने ‘जायसवाल संदेश स्मारिका’ का किया विमोचन
विवाह योग्य युवक-युवती परिचय सम्मेलन में जुटे तमाम स्वजातीय बंधु
तेजस टूडे ब्यूरो
शुभांशू जायसवाल/शुभम जायसवाल
नई दिल्ली। सामुदायिक भवन वेलकम कालोनी के विशाल प्रांगण में जायसवाल समाज यमुनापार दिल्ली द्वारा 42वां होली मंगल मिलन समारोह सह युवक परिचय सम्मेलन संपन्न हो गया जहां समाज की एकता और उसे एक सूत्र में बांधने का दृढ़ संकल्प लिया गया, क्योंकि सामाजिक एकता एवं जागरूकता से ही सामाजिक कुरीतियों पर नियंत्रण किया जा सकता है।
समारोह की अध्यक्षता राम हर्ष जायसवाल, स्वागताध्यक्ष लौटन जायसवाल एवं संचालन आदित्य वर्धनम राष्ट्रीय महासचिव ने किया। सम्मेलन में हजारों स्वजातीय लोगों की सपरिवार उपस्थिति कार्यक्रम को विशेष भव्यता प्रदान की। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलदेवता राज-राजेश्वर सहस्त्रार्जुन के तैल चित्र पर पुष्प एवं माल्यार्पण करते हुये पूजा एवं दीप प्रज्वलन से प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में साबरमती के धरती से पधारे अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मदन लाल प्रभाती लाल जायसवाल मौजूद रहे। जायसवाल समाज यमुनापार दिल्ली के पदाधिकारियों द्वारा अतिथियों को अंगवस्त्र एवं उपहार देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में युवा टीम की सहभागिता एवं ऊर्जा देखते ही बन रही थी और काबिले तारीफ थी।
विशिष्ट अतिथि एवं सम्मानित अतिथि के रूप में वरिष्ठ समाजसेवी सुरेश प्रसाद (एमडी राकेश मसाला), दयाराम राय (झांसी), दिव्य जायसवाल (पूर्व महापौर दिल्ली), नर्मदेश्वर जायसवाल (पूर्व महासचिव जायसवाल समाज दिल्ली), राजीव जायसवाल (अध्यक्ष जायसवाल समाज दिल्ली), अशोक चौधरी (अध्यक्ष जायसवाल जागृति), अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के पदाधिकारी हरि प्रकाश जायसवाल (राष्ट्रीय सचिव), राजू भाई (राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष), संतोष जायसवाल (राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं सह प्रभारी), डॉ हर्षा मनीष जायसवाल (राष्ट्रीय महिला महासचिव), सविता जायसवाल (राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष), रविंद्र जायसवाल (राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष दुद्धी सोनभद्र), अवधेश गुप्ता, संत लाल जायसवाल, शंकर लाल जायसवाल, विजय जायसवाल, राजकुमार जायसवाल, राजकुमार जायसवाल, मनोज शाह, गोपाल जायसवाल (नोएडा), महेश जायसवाल, शैलेंद्र जायसवाल (अध्यक्ष जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा दिल्ली), बृजमोहन जायसवाल, पूनम चौधरी, मीनू गुप्ता सहित दिल्ली एनसीआर के तमाम गणमान्य समाजसेवी रहे। इस दौरान मुख्य व विशिष्ट अतिथियों का उद्बोधन हुआ जिसमें सभी ने होली मिलन की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुये कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए प्रशंसा की गयी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय जायसवाल (सर्व) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मदन लाल प्रभाती लाल जायसवाल ने सामाजिक समरसता एवं एकता पर जोर देते हुये कहा कि इसका कोई विकल्प नहीं है। हमारी एकता ही एकमात्र हमारी ताकत है जिसके लिए वह निरंतर प्रत्यनशील रहेंगे। पूर्व महापौर दिव्य जायसवाल एवं राजीव जायसवाल अध्यक्ष जयसवाल समाज दिल्ली ने कहा कि लोगों को पूरे साल इस कार्यक्रम का इंतजार रहता है जो यहां हर उम्र वह वर्ग के लोगों की सहभागिता रहती है। दयाराम राय झांसी, रविंद्र जायसवाल दुद्धी सोनभद्र, संतोष जायसवाल गोरखपुर ने राजनीतिक चेतन पर जोर दिया देते हुये समाज को सशक्त बनाने हेतु सभी की राजनीतिक भागीदारी के लिए आह्वान किया। हरि प्रकाश जायसवाल, डॉ. हर्षा मनीष जायसवाल, सविता जायसवाल ने होली मिलन के लगातार 42वां आयोजन को सामाजिक समरसता एवं बिरादरी एकजुटता का प्रमाण बताया और भविष्य में ऐसे जबरदस्त सफल आयोजन होते रहे, इसके लिये शुभकामनाएं प्रेषित किया।
इस दौरान जायसवाल संदेश स्मारिका का विमोचन उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने किया। साथ ही प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी विवाह योग्य युवक-युवती परिचय सम्मेलन का कार्यक्रम हुआ जिससे उन्हें जीवनसाथी के सुचयन में मदद मिलती है। कलाकारों एवं समाज के बच्चों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत झांकी, गीत, संगीत, कविता पाठ, लोक नृत्य आदि के जीवंत कार्यक्रम की प्रस्तुति हुई। जायसवाल समाज यमुनापार द्वारा उन्हें पुरुस्कृत कर उनका उत्साह वर्धन किया।
इस कार्यक्रम की विशेषता यह है कि यह कार्यक्रम पूर्णत: समाज द्वारा समाज को समर्पित कार्यक्रम है। सामाजिक कार्यों के लिए चंदा लेना और उस चंदा का हिसाब देना प्राय: आयोजक अपनी शान के विपरीत समझते हैं जबकि जायसवाल समाज यमुनापार दिल्ली कार्यक्रम के बाद एक-एक पैसे का हिसाब सार्वजनिक करना अपना विनम्र कर्तव्य और धर्म मानकर चलते हैं। ऐसा ही प्रत्येक वर्ष आय-व्यय एवं चंदा देने वालों की दे राशि सहित सूची प्रकाशित करने की परंपरा का निर्वाह करते हुए समाज में सुचिता एवं पारदर्शिता बनाये रखते हैं, यह अपने आपमें अति सराहनीय एवं दृढ़ संकल्प का परिचायक है।
कार्यक्रम को भव्यता एवं पूर्णता प्रदान करने में रामहर्ष जयसवाल अध्यक्ष, आदित्य वर्धनम महासचिव, अवधेश गुप्ता कोषाध्यक्ष, दयाशंकर जायसवाल सचिव, विजय जायसवाल उपसचिव, आसाराम जायसवाल उपाध्यक्ष, वीरेंद्र जायसवाल प्रचार मंत्री, कमलेश जायसवाल भंडार मंत्री, जीवन लाल जायसवाल प्रचार मंत्री, माता प्रसाद जायसवाल भंडार मंत्री, अमित जायसवाल युवा अध्यक्ष, योगेंद्र जायसवाल युवा कोषाध्यक्ष, मुकेश जायसवाल युवा उपाध्यक्ष, श्री घनश्याम जायसवाल युवा सचिव, अजय जायसवाल, विनोद जायसवाल संगठन मंत्री, करण जायसवाल संगठन मंत्री, संदीप जयसवाल संगठन मंत्री, रितेश जायसवाल सहित तमाम स्वजातीय बन्धुओं का योगदान सराहनीय रहा।
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दिल्ली में डबल इंजन की ट्रेन क्यों हो रही लेट?: खोसला
तेजस टूडे ब्यूरो
आरएल पाण्डेय
नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश नेशनल पैंथर्स पार्टी के अध्यक्ष राजीव जोली खोसला ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के 8 तारीख को बंपर जीत मिलीं 70 में से 48 विधायक जीते, मगर फिर भी 5 दिन गुजर जाने के बाद डबल इंजन सरकार का लाभ दिल्ली की जनता को नहीं मिल रहा। क्या कारण है? क्या पहला इंजन दूसरे इंजन को तय नहीं कर पा रहा? कौन रफ्तार से चलेगा? कहीं न कहीं कुछ न कुछ दाल में काला है।उन्होंने कहा कि इतनी बंपर जीत से तो साथ के साथ ही दूसरा इंजन का नाम तय कर देना चाहिए था जो आज 5 दिन गुजर जाने के बाद भी दूर-दूर तक पता नहीं है। भाजपा ने जो घोषणा की, दिल्ली की जनता के प्रति उनका लाभ जनता को कैसे मिलेगा? पिछले 10 वर्षों में जनता महंगाई बेरोजगारी, भ्रष्टाचारी, खाद्य पदार्थों में मिलावटी सामान का बिकना, स्वास्थ्य सेवाएं भी चरमराई हुई हैं। शिक्षा का भी बुरा हाल है। जिस तरफ देखो घोटाले ही घोटाले हैं। सड़कें—गलियां टूटी पड़ी हैं। कूड़े के ढेर लगते जा रहे हैं। सरकार अपना ज्यादा पैसा विज्ञापनों पर खर्च करती हैं। न जाने दिल्ली की जनता को इस से कब निजात मिलेगा? पैंथर्स पार्टी पहले इंजन यानी मोदी जी से निवेदन करती है कि शीघ्र दूसरे इंजन का नाम सार्वजनिक किया जाय जिससे जनता को डबल इंजन सरकार से लाभ मिले पुरानी सरकार द्वारा किए गए झूठे वादों से निजात भी मिले जिससे बच्चों का भविष्य अंधकार में है।
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मधुबनी पेंटिंग साड़ी पहनकर वित्त मंत्री ने संस्कृति व कलाकारों का किया सम्मान
इं. आरके जायसवाल
नई दिल्ली। बीते शनिवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में विश्व प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग वाली साड़ी पहनकर बजट पेश किया। यह साड़ी मधुबनी दौरे के समय पद्मश्री दुलारी देवी उन्हें वो साड़ी भेंट की थी। मधुबनी पेंटिंग जिसे मिथिला पेंटिंग के नाम से भी जाना जाता है, लोक कला की एक पारंपरिक और जटिल शैली है जो भारत के बिहार के मिथिला क्षेत्र से उत्पन्न हुई है। इस कला रूप की विशेषता इसके जीवंत रंग, ज्यामितीय पैटर्न और प्राकृतिक रंगों का उपयोग है। मधुबनी पेंटिंग अक्सर हिंदू पौराणिक कथाओं, प्रकृति और दैनिक जीवन के दृश्यों को दर्शाती हैं। यह पीढ़ियों से आम तौर पर मिथिला क्षेत्र के लोगों द्वारा बनाई जाती हैं। बीते कुछ वर्षों से यह उपेक्षा का शिकार रही है लेकिन अब सरकार द्वारा कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत कर व पद्मश्री दुलारी देवी द्वारा भेंट की गई मधुबनी पेंटिंग वाली साड़ी पहनकर बजट पेश करना स्वभाविक रूप में ऊर्जा वर्धक है लेकिन अभी सरकार से बहुत कुछ अपेक्षित है।
मधुबनी कला का इतिहास और उत्पत्ति की बात करें तो ऐसा माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति रामायण के दौरान हुई थी, जब राजा जनक ने कलाकारों को अपनी बेटी सीता के विवाह को चित्रित करने का कार्य सौंपा था। वहीं इसकी खोज 1934 में विलियम जी आर्चर नामक एक ब्रिटिश औपनिवेशिक अधिकारी द्वारा की गई थी। एक बड़े भूकंप से हुए नुकसान का निरीक्षण करते समय उनकी नजर बिहार में घरों की भीतरी दीवारों पर लगी इन पेंटिंग्स पर पड़ी। मूलतः यह कला शुभ अवसरों पर मिट्टी की दीवारों या मिट्टी की जमीन पर बनाई जाती थी और अगले दिन उसे मिटा दिया जाता था। नतीजतन ये कलाकृतियां संरक्षित नहीं रह सकीं। फिर जब क्षेत्र में भयंकर सूखा पड़ा तो अखिल भारतीय हस्तशिल्प बोर्ड ने मधुबनी जिले की महिलाओं से जीविकोपार्जन हेतु कैनवास, कागज या कपड़े पर चित्रकारी करने का आग्रह किया। तब से चित्रकला विभिन्न तरीकों से विकसित हुई है।
विश्व भर में मिलने वाली मिथिला पेंटिंग की कलाकृतियां मधुबनी जिले में ही मुख्य रूप से बनाई जाती है। इस क्षेत्र में हजारों की संख्या में मधुबनी पेंटिंग के कलाकार है जो विभिन्न क्षेत्रों में पेंटिंग बनाकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। मिथिला पेंटिंग के कुछ प्रसिद्ध कलाकार दुलारी देवी, रांटी की महासुन्दरी देवी, गोदावरी दत्ता, बउआ देवी, जगदंबा देवी, सीता देवी, गंगा देवी, संजय जायसवाल आदि देश में विख्यात है। वित्त मंत्री द्वारा मधुबनी पेंटिंग वाली साड़ी पहनने पर मधुबनी पेंटिंग कलाकारों, मिथिलांचल सहित मिथिला चित्रकला संस्थान व कलाकारों में खुशी की लहर है।
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इं. सौरभ जैन ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन दिल्ली प्रदेश महासचिव मनोनीत
तेजस टूडे ब्यूरो
आरएल पाण्डेय
दिल्ली। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवी प्रसाद गुप्ता की संस्तुति मिलने के बाद सॅगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुखमाल जैन ने प्रमुख सामाजिक व्यक्तित्व तथा पत्रकार इं. सौरभ जैन को ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन दिल्ली प्रदेश का महासचिव मनोनीत किया।
स्मरणीय है कि 14 जनवरी को एसोसिएशन के राष्ट्रीय कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर इं. सौरभ जैन ने अत्यंत सक्रिय एवं सराहनीय भूमिका निभाई थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष देवी प्रसाद गुप्ता सहित सॅगठन के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण चौहान, सचिव नरेश सक्सेना सहित आमंत्रित अतिथियों ने उनकी प्रशंसा भी की थी। श्री जैन विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुडे हैं तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं। विभिन्न समाचार पत्रों तथा दृश्य मीडिया के लिये काम करते हैं। संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने पर श्री जैन ने आभार व्यक्त करते हुये दिल्ली में शीघ्र ही सॅगठन विस्तार को जिला, तहसील, ब्लॉक स्तर तक ले जाने का सॅकल्प व्यक किया है।
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कला, आध्यात्म एवं प्रकृति प्रदर्शनी का आयोजन दिल्ली में होगा: पंकज तिवारी
तेजस टूडे ब्यूरो
नई दिल्ली। ‘कला, आध्यात्म और प्रकृति, शीर्षक से कलाकारों का एक मंच पर उपस्थित होना और अपने विचारों एवं रंगों के साथ उपस्थित होना कलाकारों, दर्शकों सभी के लिए एक वरदान साबित होगा। प्रकृति सबसे अमूल्य कृति है जिसका न कोई ओर है और न ही कोई छोर। ठीक इसी प्रकार कला भी सीमाओं से परे की बात हो जाती है और आध्यात्म भी ऐसा ही है। ऐसी स्थिति में कलाकारों के सामने तमाम चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हो जाती हैं कि क्या मैं अपने कलाकृति के साथ न्याय कर पाऊंगा? क्या विषय के गहरे तल से अनमोल विचारों के मोती तराश पाऊंगा? क्या दर्शकों तक विषय बोध और सौंदर्य बोध के साथ पहुंच पाऊंगा? ऐसे ही तमाम प्रश्न हैं जिसके निवारण हेतु सभी को इस प्रदर्शनी में जरूर पहुंचना चाहिए और गहरे एवं गूढ़ विचारों युक्त कृतियों से रूबरू होना चाहिए। यह एक सामूहिक प्रदर्शनी है जिसमें पूरे देश से 35 कलाकार अपनी कृतियों के साथ प्रस्तुत हो रहे हैं। प्रदर्शनी 7 से 11 दिसंबर तक विजुअल आर्ट गैलरी, इंडिया हैबिटेट सेंटर में चलने वाली है। प्रदर्शनी का उद्घाटन संजीव किशोर गौतम (महानिदेशक नेशनल गैलरी ऑफ माॅडर्न आर्ट नई दिल्ली) करेंगे। प्रदर्शनी के क्यूरेटर राजीब सिकदर हैं।
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चंद्रयान मिशन द्वारा चिह्नित चंद्रमा तक भारत की यात्रा, अंतरिक्ष अन्वेषण में देश की बढ़ती शक्ति के प्रमाण के रूप में खड़ी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा लॉन्च किए गए चंद्रयान का उद्देश्य हमारे आकाशीय पड़ोसी के रहस्यों को उजागर करना और वैश्विक मंच पर भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को प्रदर्शित करना है।
श्री बहादुर सिंह नंगथला जी ने बताया की चंद्रमा की खोज का सपना 22 अक्टूबर 2008 को साकार हुआ था, जब इसरो ने चंद्रयान-1 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ क्योंकि भारत चंद्र अन्वेषण में सक्षम देशों के चुनिंदा समूह में शामिल हो गया। यह मिशन इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की वर्षों की सावधानीपूर्वक योजना, विकास और समर्पण का परिणाम था।
चंद्रयान-1 ने अपेक्षाकृत कम मिशन जीवन के बावजूद महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। इसकी सबसे उल्लेखनीय खोजों में से एक चंद्रमा की सतह पर पानी के अणुओं की उपस्थिति थी। पानी की खोज, मुख्य रूप से चंद्रमा के ध्रुवों पर बर्फ के रूप में, भविष्य के चंद्र अन्वेषण के लिए गहरा प्रभाव डालती है, जिससे भविष्य के मिशनों और यहां तक कि मानव उपनिवेशीकरण को बनाए रखने की क्षमता मिलती है।
चंद्रयान-1 की सफलता के आधार पर, इसरो ने चंद्रयान-2 शुरू किया, जो एक अधिक महत्वाकांक्षी मिशन था जिसका उद्देश्य न केवल चंद्रमा की सतह बल्कि उसके दक्षिणी ध्रुव का भी पता लगाना था। चंद्रयान-2 मिशन इस मामले में अनोखा था कि इसमें एक ऑर्बिटर, एक लैंडर (विक्रम) और एक रोवर (प्रज्ञान) शामिल था, जो सॉफ्ट चंद्र लैंडिंग में भारत की क्षमताओं को प्रदर्शित करता था।
चंद्र अन्वेषण में इसरो के प्रयास चंद्रयान के साथ समाप्त नहीं होते हैं। संगठन ने पहले से ही चंद्रयान-3 पर अपनी नजरें जमा ली थी , जिसका लक्ष्य चंद्रमा पर सफल लैंडिंग करना था। चंद्रयान मिशन ने भविष्य के चंद्र अन्वेषणों की नींव रखी है, जिससे भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष समुदाय में एक प्रमुख स्थान पर पहुंच गया है।
भारत की वैज्ञानिक यात्राओं की कहानी में, चंद्रयान परियोजना देश के कौशल और आधुनिक तकनीक को दर्शाती हुई स्पष्ट रूप से सामने आती है। जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ रहा है और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी ताकत दिखा रहा है, अंतरिक्ष अनुसंधान में इसका काम बुलंदियों पर है। इस क्षेत्र में एक बड़ा कदम चंद्रयान-3 मिशन का सफल होना है।
श्री बहादुर सिंह नंगथला जी ने बड़े उल्लास के साथ खा की यह बेहद गर्व और खुशीकी बात हैं हम अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना को लाइव देख पाए। आज, हम चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-3 लैंडर की सफल लैंडिंग का जश्न मनाते हैं, जो भारत और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक असाधारण उपलब्धि है। चंद्रयान-3 के तीन मुख्य उद्देश्य सतह पर सुरक्षित रूप से उतरना, रोवर संचालन का प्रदर्शन करना और साइट पर वैज्ञानिक प्रयोग करना है।
भारतीय चंद्र मिशन चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त को शाम 6:04 बजे इतिहास लिखा। जब इसने चंद्रमा की सतह पर सफल लैंडिंग की। भारत लैंडर की बदौलत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर “सॉफ्ट लैंडिंग” सफलतापूर्वक पूरा करने वाला पहला देश बन गया है। फिर लैंडर रोवर, चंद्रमा की सतह पर यात्रा करने के लिए डिज़ाइन किया गया एक छोटा वाहन, उभरा।
इसी उपलक्ष में एडवोकेट रोहित सिंह नंगथला जी ने बताया की चंद्रयान मिशन भारत के लिए कई लाभ लाते हैं, जिनमें वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति से लेकर राष्ट्र को प्रेरित करना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है। ये मिशन न केवल चंद्रमा तक पहुंचने के बारे में हैं, बल्कि भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण यात्रा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के बारे में भी हैं।
चंद्रयान मिशन वैज्ञानिक प्रगति में योगदान देता है। वे चंद्रमा की भूवैज्ञानिक, रासायनिक और भौतिक विशेषताओं के बारे में हमारी समझ को बढ़ाने में मदद करते हैं। इस ज्ञान को ग्रह विज्ञान और खगोल भौतिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है।
ये मिशन भारत में तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देते हैं। उन्हें अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे के विकास, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
अंतरिक्ष क्षेत्र आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकता है। चंद्रयान मिशन उपग्रह प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान और उपग्रह संचार में व्यावसायिक अवसरों के विकास को प्रोत्साहित कर सकता है।
चंद्रयान मिशन राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति को बढ़ावा देते हैं। वे अंतरिक्ष अन्वेषण में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान हासिल करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।
ये मिशन भारत के युवाओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में करियर बनाने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करते हैं, जिससे देश के मानव संसाधन विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।
भारत के अंतरिक्ष प्रयासों का कूटनीतिक प्रभाव है। वे अंतरिक्ष अनुसंधान में शामिल देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करते हैं और अंतरिक्ष गतिविधियों में शांतिपूर्ण सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
चंद्रयान जैसे अंतरिक्ष मिशन भारत की वैश्विक स्थिति और अंतरिक्ष प्रशासन और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष समझौतों में इसकी भूमिका को बढ़ाने में योगदान करते हैं।
श्री बहादुर सिंह नंगथला जी का कहना हैं की इस क्षण तक की यात्रा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रतिभाशाली दिमागों के समर्पण, दृढ़ता और अटूट प्रतिबद्धता में से एक रही है। उनके अथक प्रयास और अंतरिक्ष अन्वेषण की सीमाओं को आगे बढ़ाने का जुनून हमें आज यहां ले आया है।
जैसे ही चंद्रयान-3 लैंडर धीरे से चंद्रमा की सतह पर उतरा, इसने चंद्र अन्वेषण के एक नए युग की शुरुआत की। यह उपलब्धि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती क्षमताओं और मानवता की भलाई के लिए वैज्ञानिक ज्ञान को आगे बढ़ाने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। श्री बहादुर सिंह नंगथला जी ने यह भी बताया की चंद्रयान 3 से क्या – क्या नयी जानकारी प्राप्त होगी। चंद्रयान 3 के वैज्ञानिक प्रयोगों से चंद्रमा के बारे में कुछ नया मिलेगा, जैसे की चंद्रमा की सतह और संरचना, चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र, चंद्रमा के वायुमंडल आदि।
इस सफल लैंडिंग के महत्व को कम करके आंका नहीं जा सकता। चंद्रयान-3 हमारे चंद्र अन्वेषण प्रयासों की निरंतरता का प्रतिनिधित्व करता है, जो अपने पूर्ववर्तियों से मिली सफलताओं और सबक पर आधारित है। इस मिशन से एकत्र किए गए डेटा और अंतर्दृष्टि चंद्रमा की भूविज्ञान, खनिज संरचना और चंद्र पर्यावरण की हमारी समझ में योगदान देंगे।
इसके अलावा, यह उपलब्धि हमें महत्वाकांक्षी भविष्य के मिशनों की प्राप्ति के एक कदम और करीब ले जाती है, जिसमें चंद्रमा पर मानव अन्वेषण की क्षमता भी शामिल है। चंद्रयान-3 नवाचार, खोज और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भावना को बढ़ावा देते हुए और भी अधिक रोमांचक संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करता है।
चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग वाकई बहुत बड़ी बात है! इससे पता चलता है कि भारत अंतरिक्ष की खोज में वास्तव में अच्छा हो रहा है। यह उपलब्धि इसरो के लोगों की कड़ी मेहनत और स्मार्ट सोच के कारण है। अब, हम चंद्रमा के बारे में और अधिक जानेंगे, जैसे कि यह किस चीज से बना है और यह कैसा है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें अंतरिक्ष को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है। चंद्रयान-3 हमें चंद्रमा पर लोगों को भेजने जैसे भविष्य के मिशनों के भी करीब लाता है। अंत में श्री बहादुर सिंह नंगथला जी ने कहा की यह सिर्फ एक मिशन नहीं है; यह इस बात का प्रतीक है कि कैसे भारत अंतरिक्ष अन्वेषण में एक बड़ा खिलाड़ी बन रहा है। यह रोमांचक है और दिखाता है कि जब हम एक साथ काम करते हैं तो हम अद्भुत चीजें कर सकते हैं। यह अंतरिक्ष की और भी अधिक खोज की दिशा में एक बड़े कदम की तरह है।
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दिल्ली: भारतीय फिल्म उद्योग के लगातार विकसित हो रहे परिदृश्य में, नए लोगों और रचनात्मक दिमागों के लिए चमकने के अवसरों की लहर बढ़ रही है। चित्रजीत एंटरटेनमेंट, अपनी आगामी फिल्म ‘एबीबी’ और उभरती प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता के साथ, भारतीय सिनेमा में इस नए युग का एक चमकदार उदाहरण है। यह फिल्म, अपनी व्यापक पहल के साथ, दिल्ली और उसके बाहर फिल्म निर्माण के क्षेत्र में क्रांति लाने का वादा करती है।
भारतीय फिल्म निर्माण का हृदय:
दिल्ली, अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जीवंत वातावरण के साथ, लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत रही है। शहर की परंपरा और आधुनिकता का अनूठा मिश्रण कहानीकारों के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि प्रदान करता है। ‘एबीबी’, एक परियोजना के रूप में, दिल्ली के सार को समाहित करता है, इसकी गलियों, इसकी छिपी कहानियों और इसकी समृद्ध विविधता की खोज करता है। अनगिनत सपनों का घर रहा यह शहर अब नए जमाने के फिल्मकारों के सपनों का कैनवास बन गया है।
चित्रजीत एंटरटेनमेंट के दृष्टिकोण का सबसे उल्लेखनीय पहलू नई प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के प्रति उसका समर्पण है। एक ऐसे उद्योग में जिसे अक्सर विशिष्ट माना जाता है, चित्रजीत एंटरटेनमेंट के खुले दरवाजे और समावेशी रवैया एक ताज़ा बदलाव प्रदान करते हैं। फिल्म उद्योग अब कुछ चुनिंदा लोगों तक ही सीमित नहीं है; इसके बजाय, यह नई आवाज़ों और दृष्टिकोणों का खुली बांहों से स्वागत करता है।
‘एबीबी’ सिर्फ एक फिल्म से कहीं अधिक का प्रतिनिधित्व करता है; यह एक व्यापक प्रयास है जो विभिन्न रूपों में रचनात्मकता को प्रोत्साहित करता है। आत्मा में गूंजने वाले गीतों से लेकर आकर्षक वेब श्रृंखला, प्रभावशाली लघु फिल्में और पारंपरिक सिनेमा तक, अवसर विविध हैं। महत्वाकांक्षी कलाकारों को अन्वेषण और प्रयोग करने की स्वतंत्रता है, जिससे उन्हें मनोरंजन की दुनिया में अपना अनूठा स्थान खोजने का मौका मिलता है।
विविध कहानी कहने की शक्ति को नकारा नहीं जा सकता। ‘एबीबी’ के साथ, चित्रजीत एंटरटेनमेंट उन कहानियों के प्रति अपना समर्पण प्रदर्शित करता है जो भारतीय आबादी के विविध अनुभवों और दृष्टिकोणों को दर्शाती हैं। इन कहानियों के माध्यम से, हम समाज के मर्म में उतर सकते हैं, उसकी विचित्रताओं और जटिलताओं का जश्न मना सकते हैं।
दिल्ली के फिल्म उद्योग का उज्ज्वल भविष्य:
चित्रजीत एंटरटेनमेंट की ‘एबीबी’ दिल्ली में फिल्म निर्माण के भविष्य के लिए आशा की किरण है। इस पहल में न केवल नई प्रतिभाओं की खोज करने की क्षमता है बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग में शहर की स्थिति को भी ऊंचा उठाने की क्षमता है। यह एक ऐसे माहौल को बढ़ावा देता है जहां रचनात्मकता की कोई सीमा नहीं होती और जहां कहानी कहने का शौक रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए सपने पहुंच के भीतर होते हैं।
जैसे-जैसे ‘एबीबी’ और चित्रजीत एंटरटेनमेंट की नवागंतुकों को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता पर से पर्दा उठ रहा है, हम इस पहल से सामने आने वाली फिल्मों, गानों, वेब सीरीज और लघु फिल्मों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह वादों और संभावनाओं से भरी यात्रा है और दर्शक कहानी कहने की इस नई लहर को अपनाने के लिए तैयार हैं।
चित्रजीत एंटरटेनमेंट की फिल्म ‘एबीबी’ और फिल्म उद्योग में नई प्रतिभाओं के लिए अवसर पैदा करने के प्रति इसका समर्पण भारतीय सिनेमा के लगातार विकसित हो रहे परिदृश्य के लिए एक प्रमाण के रूप में काम करता है। यह पहल दरवाजे खोलती है, बाधाओं को तोड़ती है और विविध और रोमांचक सामग्री के लिए मार्ग प्रशस्त करती है। ऐसे प्रयासों से दिल्ली में फिल्म निर्माण की दुनिया पहले कभी इतनी उज्ज्वल नहीं दिखी। हम उन सभी को शुभकामनाएं देते हैं जो इन रोमांचक अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए तैयार हैं।
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घर खरीददारों का विश्वास खोते कई बिल्डर: इं. आरके जायसवाल
दिल्ली/एनसीआर। कहा जाता है कि भगवान कि मेहरबानी से एक सपनों का घर मिलता है और इसमें सहायक बने लोगों को भी ईश्वर के प्रतिनिधि के रूप में माना जाता है लेकिन जब ये प्रतिनिधि किसी बिल्डर या डेवलपर रूप में एक राक्षस बनकर लोगों के सामने आता है तो आपके जीवन भर के पसीने की कमाई को एक झटके में गबन कर जाती है, फिर आपको उनके औफिस के दरवाजे पर बाउंसर मिलते हैं और कोर्ट कचहरी के बाद भगवान भरोसे ही छोड़ देते हैं। अधिकांश परियोजनाओं में घटनाओं का क्रम नीरस और पूर्वानुमानित है। घर बुक होने से पहले बिल्डर संभावित खरीदारों के पीछे भागते हैं और बुक होने के बाद खरीदार बिल्डर के पीछे भागते हैं। क्रेता की उम्मीदें इस हद तक कम हो गई हैं कि एक साल की देरी वाली परियोजना को पूरी तरह से अस्वीकार्य माना जाता है, फिर भी फंसे हूए क्रेता खराब निर्माण गुणवत्ता और वादा की गई सुविधाओं में कमी को नजर अंदाज कर भी अपने सपनों के घर का मालिकाना हक़ के लिए दर-दर ठोकरें खाते हैं। सच्ची चुनौती तब सामने आती है जब कोई परियोजना खिंच जाती है या रुक जाती है और बिल्डर संवाद करना बंद कर देता है। इसके बाद एक कानूनी लड़ाई होती है और धोखेबाज घर खरीदार को अक्सर पता चलता है कि डेवलपर की कानूनी टीम उसकी निर्माण टीम से बड़ी है। भले ही कानूनी लड़ाई कोई भी जीतता हो, अंतिम परिणाम स्पष्ट है कि अधिकांश घर खरीदार बिल्डर पर विश्वास खो देते हैं और परियोजना की नियमित निगरानी और पर्यवेक्षण के साथ लगभग अंशकालिक बिल्डर बनने के लिए मजबूर हो जाते हैं। कोविड महामारी के बाद से रियल एस्टेट में जबर्दस्त मांग के साथ उछाल आई है। सूत्रों के अनुसार समीक्षाधीन अवधि में दिल्ली-एनसीआर में आवास बिक्री 11 हज़ार यूनिट से 27 प्रतिशत बढ़कर 14 हज़ार यूनिट हो गई है। साथ ही भारतीय शहरों के एनसीआर प्रापर्टी में लोगों कि रुचि में लगातार वृद्धि हो रही है। वहीं अभी देश में त्योहारों का सीजन दहलीज पर खड़ी है और इसका फायदा उठा कर कुछ डेवलपर शिकारी के रूप में दाने डालने शुरु कर दी है, इसीलिए सावधान रहें और अपने मेहनत कि पसीने से कमाई को सही जगह सोच समझ कर सुरक्षित करें। साथ ही कोर्ट कचहरी परेशानियों से वंचित रहें और अपने सपनों को साकार बनाएं। दिल्ली-एनसीआर कि कुछ छोटे बड़े बिल्डर व डेवलपर को छोड़ दिया जाय तो अधिकांश अपने आपको दिवालिया घोषित करने कि होड़ में लगें हुये हैं। वहीं लाखों लोगों को कई साल बीत जाने के बाद भी सपनों का घर नहीं मिल पाया है। सरकार ने इसके लिए कूछ कठोर कदम उठाते हुए कुछ कानून बनाया जरूर लेकिन यह शिकारी और भी फंसते चले गये। इनकी बजह से खरीदारों के साथ साथ अच्छे-अच्छे बिल्डरों कि भी परेशानी बढ़ गई है। एनसीआर से सटे दिल्ली, ग्रुरूग्राम ख़ासकर नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद के सभी राज्य सरकारों को उपभोक्ताओं का अपना सपनों के घर को इन शिकारियों के चंगुल से मुक्त कराने में मदद करनी चाहिए। यह कब तक हो पाएगा, मालूम नहीं लेकिन आप अपनी लड़ाई सरकार द्वारा बनाए गए रेरा अधिनियम-16 के साथ लड़ सकते हैं।
लाखों लोग ऐसे हैं जो घर खरीदते समय बिल्डर की बात पर आंख बंद करके भरोसा कर लेते हैं लेकिन जाल में फंस जाते हैं जिसका बाद में उन्हें पछतावा होता है। जरूरी नहीं है कि सब बिल्डर एक जैसे हों लेकिन आपका बिल्डर सही है, इसका पता लगाना जरूरी है, अन्यथा आपकी सारी गाढ़ी कमाई दांव पर लग सकती है। वहीं जब आप अपने सपनों का घर खरीदने जा रहे हों तो पहले इन सभी बातों का जायजा बिल्डर से जरूर लें। जैसे बिल्डिंग प्लान और उसकी स्वीकृति, सेल डीड, मदर डीड, प्रॉपर्टी का रेरा पंजीकरण, खाता प्रमाण पत्र, ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट, अप्रूवल लाइसेंस और बिल्डर की विश्वसनीयता को परख करके ही घर खरीदें।
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वैश्य शक्ति है राष्ट्र शक्ति, समाज हो मजबूत और संगठित: सांसद रमा देवी
समाज जोड़े, रोटी-बेटी के रिश्तों से ही समाज में आयेगी एकजुटता: पूर्व मुख्यमंत्री व्यापार से हटकर अन्य क्षेत्र में भी अपने बच्चों को अग्रसर करे: विधायक
शुभम जायसवाल
दिल्ली। नई दिल्ली के द्वारका क्षेत्र में कुलदेवता बलभद्र जी महराज, राज राजेश्वर सहस्त्रबाहु अर्जुन जी महाराज का 19वां पूजनोत्सव धूमधाम से मनाया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कलवार समाज की शिरोमणि सांसद रमा देवी शिवहर बिहार, चेयरपर्सन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय स्टैंडिंग कमेटी एवं बिहार सरकार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद जायसवाल एवं ढाका बिहार से भाजपा विधायक पवन जायसवाल रहे। उनके साथ दिल्ली के प्रमुख समाजसेवी विजय भगत पूर्व डिप्टी मेयर दिल्ली नगर निगम एवं अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के राष्ट्रीय वरिष्ठ कार्यकारी अध्यक्ष, दिल्ली एनसीआर के जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के अध्यक्ष एडवोकेट शैलेंद्र जायसवाल, समाजसेवी संजय बिहारी, ओम प्रकाश गुप्ता, रवि जायसवाल, रागनी गुप्ता, मीनाक्षी जायसवाल, कामेश्वर प्रसाद, संस्थाध्यक्ष बैजनाथ प्रसाद, उमेश प्रसाद तथा उनके सभी कार्यकारिणी के सदस्यों के साथ हजारों की संख्या मे समाज के लोग उपस्थित रहे। सर्वप्रथम प्रातःकाल भगवान बलभद्र जी, श्री गणपति जी महाराज, श्री कृष्ण जी, राज राजेश्वर सहस्त्रार्जुन जी एवं हनुमान जी की प्रतिमा का अनावरण उनका पूजन—उत्सव विधिवत शास्त्रीय विधि से हवन पूजन इत्यादि संपन्न होने के बाद अतिथियों ने पूजन एवं उद्बोधन किया। मुख्य अतिथि सांसद रमा देवी ने कहा कि वैश्य शक्ति में ही राष्ट्र शक्ति है, हमें संकल्प लेना होगा कि हम समाज को संगठित व मजबूती प्रदान करने में हर संभव प्रयास करेंगे। वैश्य समाज की संख्या इतनी है कि अगर हम एकजुट हो जाए तो केंद्र व प्रदेश सरकार को समाज के उत्थान एवं सामाजिक हित में किसी भी कार्य को मनवाने के लिए मजबूर कर सकते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री बिहार तार किशोर प्रसाद ने कहा कि हमें अपने कलाल, कलार, कलवार एवं अन्य वैश्य की जातियों के परिवारों में रोटी बेटी का रिश्ता शुरू करना होगा, जब हम एक दूसरे परिवार से रिश्तों के रूप में बंध जाएंगे तभी वैश्य एकता की सही परिभाषा पूरी हो सकेगी। वहीं बिहार के ढाका क्षेत्र से भाजपा विधायक पवन जायसवाल ने कहा कि हम जो पीढ़ी दर पीढ़ी व्यवसाय करते आये हैं। उनसे हटकर राजनीतिक क्षेत्र, सिविल सर्विसेज, पुलिस सर्विसेज, शिक्षा के क्षेत्र में, सामाजिक गतिविधियों आदि में हिस्सेदारी बढ़ानी पड़ेगी तभी हमारे समाज का उत्थान व हमारे लोगों का सम्मान व विकास हो सकेगा। अन्य वक्ताओं ने भी समाज के उन्नति और विकास के साथ समाज किस प्रकार से संगठित होख् इसी बात पर मुख्य रूप से चर्चा करते हुये आग्रह किया कि समाज को अब उप वर्ग भेद मिटाकर, वैश्य शक्ति को इस देश की राष्ट्र शक्ति बनाना चाहिए और सभी उपवर्गों में रोटी—बेटी का रिश्ता कायम करना चाहिए। कार्यक्रम में आये समस्त अतिथियों का ब्याहुत महासभा के अध्यक्ष एवं उनकी पूरी टीम ने शाल, माला, पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। दिल्ली एनसीआर के अध्यक्ष शैलेंद्र जायसवाल एडवोकेट ने समारोह में पधारे अतिथियों सहित उपस्थित कलवार बंधुओं का आभार प्रकट किया। भविष्य में भी समाज हित में इसी प्रकार से एक जुटता के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करे। संगठित हो, शिक्षित हो, एक साथ समाज के हित में खड़े होने की शक्ति अपने अंदर पैदा करें। कलवार-वैश्य शक्ति को राजनीतिक शक्ति में परिवर्तित करें, ऐसा आह्वान किया।सभा का संचालन दिनेश प्रसाद कलवार सलाहकार दिल्ली प्रदेश ब्याहुत कलवार महासंघ ने किया। कार्यक्रम के उपरान्त प्रसाद, फल वितरण एवं भोजन की उत्तम व्यवस्था रही। सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं झांकी इतना मनमोहक रहा कि उपस्थित सभी लोग प्रसन्न दिखे एवं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का जमकर आनंद लिया।
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