देवा शरीफ में मजार पर फिर उड़ेगा कौमी एकता का गुलाल
तेजस टूडे ब्यूरो
गोविन्द वर्मा
बाराबंकी। कस्बा देवा स्थित विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर इस वर्ष होली के आयोजन को लेकर बना संशय आखिरकार समाप्त हो गया है। पिछले कई दशकों से आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रही पुरानी समिति के पीछे हटने के बाद प्रशासन के सक्रिय हस्तक्षेप से एक नई कमेटी का गठन किया गया है। एसडीएम नवाबगंज आनंद तिवारी और क्षेत्राधिकारी नगर संगम कुमार ने स्थानीय लोगों के साथ बैठक कर करीब सवा सौ वर्षों से चली आ रही इस अनूठी परंपरा को जीवित रखने का मार्ग प्रशस्त किया है। अब नई कमेटी के नेतृत्व में देवा की सरजमीं से एक बार फिर पूरे देश में अमन-चैन और भाईचारे का पैगाम भेजा जाएगा।
नवगठित कमेटी के अध्यक्ष अवध किशोर मिश्रा ने आयोजन की रूप—रेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि होली का जुलूस कौमी एकता गेट से सुबह नौ बजे शुरू होगा। यह जुलूस अपने निर्धारित मार्ग से होते हुए दोपहर सवा बारह बजे दरगाह परिसर पहुंचेगा, जहां परंपरा के अनुसार केवल फूलों और पीले गुलाल से होली खेली जाएगी। इसके उपरांत दोपहर 12:45 बजे जुलूस का शांतिपूर्ण समापन होगा। आयोजन को लेकर नई कमेटी के पदाधिकारियों ने आस्ताना मैनेजर शाद महमूद वारसी से भी मुलाकात की जिन्होंने इस नई पहल का स्वागत करते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है।
देवा नगर पंचायत के सभासद शफीक जुबेरी ने बताया कि बचपन से ही वह यहां हिंदू-मुस्लिमों को एक साथ मिलकर गुलाल उड़ाते देखते आए हैं। यह स्थान देश के कोने-कोने से आने वाले लोगों के लिए कौमी एकता का सबसे बड़ा केंद्र है। पुरानी कमेटी द्वारा असमर्थता जताने के बाद स्थानीय नागरिकों और प्रशासन ने मिलकर जो तत्परता दिखाई है, उससे इस ऐतिहासिक विरासत पर मंडरा रहा खतरा टल गया है। इस बार भी वारिस पाक की चौखट पर भाईचारे के रंग बिखरेंगे जो यह साबित करेंगे कि देवा शरीफ की गंगा-जमुनी तहजीब किसी भी परिस्थिति में फीकी नहीं पड़ने वाली है
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