सलोन के बीआरसी कार्यालय में भ्रष्टाचार का पोषक है प्राथमिक विद्यालय का प्रधानाध्यापक
चयन वेतनमान को लेकर प्रधानाध्यापक के खिलाफ एक अध्यापक ने बीएसए दफ्तर में काटा था हंगामा
बीईओ की लापरवाही और अकर्मण्यता से दफ्तर में मिश्रा की बोलती है तूती
संदीप पाण्डेय
रायबरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभी विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों को भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार सख्त हिदायत दे रहे हैं। अधिकारियों के निर्देश है कि सभी प्रकार की शिकायतों का त्वरित निस्तारण पूर्ण पारदर्शिता के साथ करें लेकिन मूल जिम्मेदारी का निर्वहन करने में दिलचस्पी ने लेने वाले सलोन ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय राजापुर माफी से ही खंड शिक्षा अधिकारी का कार्यालय चलाया जा रहा है। यहां तैनात प्रधानाध्यापक राजेश मिश्रा मठाधीशी के सुरूर में अपना मूल कर्तव्य भूल चुका है।सूत्रों की मानें तो यहां तैनात बीईओ की मूक सहमति से ही एक प्रधानाध्यापक के हौसलें बुलंद हैं। बीईओ की लापरवाही और अकर्मण्यता से दफ्तर में मिश्रा की तूती बोलती है जिस कारण सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा विद्यालय में बच्चों के लिए बनने वाले मध्यान्ह भोजन में किया जाता है। नामांकन के सापेक्ष ही लगभग संख्या में मध्यान्ह भोजन दिखाया जाता है जबकि उपस्थिति लगभग आधी होती है।मीनू के बावजूद नामांकित बच्चों को दूध और फल तो शायद ही दिया जाता है। इतना ही नहीं, नियमानुसार विद्यालय बंद हो जाने के बाद मिश्रा की परिसर में मौजूदगी सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है। सबसे ज्यादा फजीहत बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की हो रही है। आखिर क्या कारण है कि बीईओ इस प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक के आगे नतमस्तक हो चुकी है। चयन वेतनमान लगाए जाने को लेकर इस प्रधानाध्यापक द्वारा अपने चहेतों को फायदा ही नही पहुंचाया गया बल्कि अधिकारियों के नाम पर अवैध वसूली भी की गई है। बीते दिनों सलोन ब्लाक के ही एक स्कूल में तैनात अध्यापक के बीएसए दफ्तर में हंगामे का मामला खूब सुर्खियों में छाया था। दरअसल उसमें भी मिश्रा द्वारा अध्यापक को काफी समय तक टरकाने के बाद ही वह मुख्यालय गया था और फिर बात बढ़ने पर वह आपे से बाहर हो गया था। फिलहाल प्रधानाध्यापक के क्रियाकलापों की जांच हो जाए तो इसके द्वारा बड़े पैमाने पर किये गए भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है।

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