सीतापुर के कवि साहित्य भूषण कमलेश मृदु का हुआ सम्मान
जन्मभूमि हित हम रखें राम सरिस अनुराग: कमलेश मौर्य
तेजस टूडे ब्यूरो
आरएल पाण्डेय/शुभम जायसवाल
लखनऊ। एसएस इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष प्रवीण सिंह चौहान ने कवि सम्मेलन का आयोजन किया। अहमदाबाद बढ़ौली स्थित शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि भ्रमर बैसवारी ने किया जहां मुख्य अतिथि मंयंक कनौजिया रहे। सीतापुर जनपद के वरिष्ठ कवि, राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय मंत्री साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु को माल्यार्पण करते हुये भगवान गणेश जी का चित्र भेंट करके सम्मानित किया गया। कवि सम्मेलन का संचालन हास्य कवि संदीप अनुरागी ने किया। कमलेश मौर्य मृदु ने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को रेखांकित करते हुए कहा—— रावण मरा नहीं है अभी तक जिंदा है वो, उग्रवादी, भ्रष्टाचारी देशद्रोही सोच में। रावण को खोजने चलो तो वो मिलेगा अभी सनातन विरोधी राजनीतिक एप्रोच में। बनते हैं गरुण भुशुंडि काग भाषणों में, अहंकार स्वार्थ षड्यंत्र दाबे चोंच में। राम की रिजीम को बदलने का दंभ पाले, रावण की आत्मा घुसी है काकरोच में।
उन्होंने जन जन का आह्वान करते हुए कहा—— मर्यादा में हम रहें करें राष्ट्र हित त्याग। जन्मभूमि के प्रति रखें राम सरिस अनुराग।। पूजन अर्चन राम का मात्र नहीं पर्याप्त। बनें राम से रावणी हों प्रवृत्तियां समाप्त।। गया विहार की कवयित्री नीतू गुप्ता गयावी ने श्रृंगार की रचनाएं सुनाकर सबका मन मोहा—— बातों बातों में मुस्काना छोड़ दिया, उसकी गली में आना जाना छोड़ दिया, एक झलक पाने की उसकी चाहत में, छत पर घंटों बाल सुखाना छोड़ दिया।
पुंवाया शाहजहांपुर के व्यंग्यकार विजय तन्हा के व्यंग्य ख़ूब सराहे गये। सीतापुर के कवि अतुल बाजपेई के सुपुत्र बाल कवि मारुति बाजपेई ने अपने पिता की रचनाएँ सुनाकर वाहवाही बटोरी। नवोदित युवा कवयित्री साक्षी मिश्रा व विदुषी विदु की रचनाएं सराही गईं। इसके अतिरिक्त सरिता कटियार सदाबहार, डा. रूबी राज, मधु पाठक, मनमोहन बाराकोटी, अखिलेश श्रीवास्तव अखिल, शशि नारायण त्रिपाठी, सुशील कुमार, आशुतोष आशु, बेअदब लखनवी, इं. सुनील बाजपेई, हिमांशु सक्सेना अर्श लखनवी सहित 30 कवियों ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम संयोजक संध्या त्रिपाठी ने सभी का स्वागत किया तथा आयोजक योगेश सिंह चौहान ने आभार प्रकट किया। सभी कवियों को माल्यार्पण व स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया गया।













