जल जीवन मिशन: मानकों को ताख पर रखकर जिले में तैयार हो रहे नलकूप, खुल्लमखुल्ला हुआ भ्रष्टाचार
ग्रामीणांचों की सड़कों को भी किया ध्वस्त, दो कम्पनियों ने दिया था ठेके पर ठेका
पीले ईंट घटिया मसालों से निर्माण, पाइप लाइन में भी हुआ खेल, उच्चस्तरीय जांच की जरूरत
संदीप पाण्डेय
रायबरेली। सरकारी कागजों में भले ही ग्रामीण क्षेत्रों में बसंत का आगाज दिखाया गया हो किन्तु यहां हकीकत कौन बताए की स्थिति पतझड़ से भी बद्तर है। वह कागजी आंकड़े, विकास के दावे सबको शातिराने अंदाज के भ्रष्टाचारी ठेंका दिखा दिखा कर भ्रष्टाचार को खुल्लमखुल्ला अंजाम दिया है और जिम्मेदारों ने चूं तक करना मुनासिब नहीं समझा। हम बात कर रहे हैं। जल जीवन मिशन हर घर जल हर घर नल जल योजना की जिसके तहत आने वाले 2024 में ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में नलकूप का पानी पहुंचाने का संकल्प लिया गया था किंतु मौके की हकीकत बद से बद्तर है। लाखों रुपए के हुए भ्रष्टाचार की दास्तां जानने के लिए उच्च स्तरीय जांच टीम की जरुरत है। बताते हैं कि मौके की हकीकत क्या है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत नलकूपों के निर्माण के लिए दो कांट्रक्शन कम्पनियों को ठेका दिया गया जिसमें एक नागार्जुन कांस्ट्रक्शन कम्पनी (एनसीसी) है और एक अन्य है। इन दोनों कम्पनियों ने सरकार से निर्माण का कार्य का ठेका लेकर ठेके पर ठेका दे दिया। अब यहां से शुरू हो गया भ्रष्टाचार का खेल। नलकूपों में पीले ईंटो का प्रयोग किया गया। घटिया मसालों का प्रयोग किया गया जिससे नलकूप कुछ ही वर्षों धराशाई होना तय है। यहां तक की सरिया और बोरिंग में भी भ्रष्टाचार को अंजाम देने में ठेकेदारों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ा। जाहिर सी बात है कि उच्चस्तरीय टीम से यदि ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई जा रही नलकूपों की जांच हो तो भ्रष्टाचार का पुलिंदा समक्ष आ जायेगा किन्तु इस गम्भीर भ्रष्टाचार की तरफ साहब रुख करना मुनासिब नहीं समझते है जिसका फायदा उठाकर मनबढ़ ठेकेदार मनमानीपूर्वक भ्रष्टाचार को खुल्लमखुल्ला अंजाम देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
ठेकेदारों ने ध्वस्त कीं सड़कें व इंटरलॉकिग, मिट्टी में मिला गांव का विकास
यदि जानकारी की मानें तो जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में बिछाए जा रहे नलकूपों के पाइप लाइन कनेक्शन के दौरान गड्ढे खोदे जाने के बाद बंद करने और रास्ता मार्ग को पूर्व वत ही करने का जिम्मा लिया गया है किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में ठेकेदारों ने हाल ही में बनी कई ग्रामीण क्षेत्रों की डामर रोडों और इंटरलाकिंग मार्गों को उखाड़ फेंका और गांव के विकास कार्यों को मिट्टी में मिलाकर चंपत हो गये। अब ग्रामीण व राहगीर भ्रष्टाचारी ठेकेदारों नहीं, बल्कि सरकार पर सड़कों की दुर्गति का ठीकरा फोड़ रहें हैं। जल जीवन मिशन के तहत विकास होने से पहले ठेकेदारों ने गांवों को विनाश की ओर धकेल दिया है जिसका प्रभाव आने वाले 2024 के लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है। आखिर ठेके पर ठेका की यह प्रथा जनपद में कब तक हावी रहेगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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