वर्षों से खराब पड़ी गांवों में लगी स्ट्रीट लाइटें, सरकारी फाइलों में रोशन हो रहे गांव
लाखों रूपये खर्च होने के बावजूद भी अंधेरे के आगोश में डूबे गांव
स्ट्रीट लाइट खरीद में जिम्मेदारों ने जमकर की धांधली, विभाग मौन
मो. इसराइल
नसीराबाद, रायबरेली। गांवों में उजाले के लिए शासन से आदेश के बाद विद्युत पोल पर सरकारी खजाने से लाखों खर्च कर प्रधान ने स्ट्रीट लाइटें लगवाईं लेकिन कुछ ही दिन में लाइटें खराब हो गई। वर्तमान स्थिति यह है कि शायद ही किसी गांव में स्ट्रीट लाइट जल रही हो लेकिन सरकारी फाइलों में तो गांव रोशन हैं। छतोह व डीह ब्लॉक के अधिकतर गांवों में सरकारी आदेश आने के बाद टेंडर कर प्रधानों ने विद्युत पोल पर लाइटें लगवाईं थीं। स्ट्रीट लाइट लगाने वाली संस्था ने एक से दो वर्ष तक की वारंटी देकर लाइट लगाया। ब्रांड के नाम पर एक हजार से पन्द्रह सौ तक की लाइटों का भुगतान सरकारी खजाने से पैंतीस सौ से चार हजार तक का किया गया। लाइट लगने के बाद गांवों में रोशनी भी फैली लेकिन यह 15 दिन से एक महीने बाद बंद होनी शुरू हो गई और गांवों में फिर से अंधेरा छा गया। वहीं कुछ लगी स्ट्रीट लाइट तो जली ही नहीं।
घटिया किस्म की स्ट्रीट लाइटें, मोटी रकम की बन्दरबांट
अच्छी कम्पनी की स्ट्रीट लाइट लगाई गई होती है तो यह समस्या नहीं आती लेकिन यहां तो लोकल स्ट्रीट लाइट लगवाकर ओरिजनल व अच्छी क्वालिटी की स्ट्रीट लाइट का पेमेंट कर मोटी रकम का बंदरबांट किया गया। इससे सरकारी फाइलों में भले ही स्ट्रीट लाइटें रोशनी दे रही हों, हकीकत में यह धीरे धीरे सब खराब हो गई। यहां तक कुछ खंभो से लाइटे से गायब भी हो गई लेकिन जिम्मेदार इस ओर ध्यान देना मुनासिब नही समझ रहे।

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