सुख में जो करे प्रभु स्मरण, उसे दुख छू भी नहीं सकता: राधा मोहन दास
कुंती चरित्र एवं नारद प्रसंग का हुआ भावपूर्ण वर्णन
तेजस टूडे ब्यूरो
मुकेश तिवारी
झांसी। ग्वालियर रोड स्थित सिविल लाइन के कुंज बिहारी मंदिर में पुरुषोत्तम मास पर आयोजित श्रीमद भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास बुंदेलखंड धर्माचार्य महंत राधा मोहन दास महाराज ने महर्षि नारद, भीष्म पितामह एवं माता कुंती के चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मनुष्य को भगवान से संसारिक सुख-सुविधाएं नहीं, बल्कि उनकी भक्ति मांगनी चाहिए। उन्होंने माता कुंती और भगवान श्रीकृष्ण के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि दुख मनुष्य को ईश्वर के करीब लाता है जबकि सुख में व्यक्ति अक्सर प्रभु को भूल जाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा— “दुख में सुमिरण सब करें, सुख में करे न कोय, जो सुख में सुमिरण करे तो दुख काहे को होय।” कथा में नारद जी के पूर्व जन्म, कर्दम ऋषि एवं देवहुति विवाह प्रसंग के साथ भगवान कपिल मुनि के अवतार की कथा का भी वर्णन किया गया।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने जीवन में परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव ले आता है तब उसका अहंकार समाप्त हो जाता है और उसे प्रभु कृपा प्राप्त होने लगती है। कार्यक्रम के प्रारंभ में आचार्य रामलखन उपाध्याय ने श्रीगणेश पूजन, ग्रंथ पूजन एवं व्यास पीठ पूजन संपन्न कराया। इसके पश्चात परीक्षित परिवार की ओर से ममता अजय अग्रवाल, पूनम रविंद्र मोहन अग्रवाल, गायत्री किशनलाल अग्रवाल, नीतू राकेश अग्रवाल, दीर्घा विजय अग्रवाल सहित पीहू, आदित्य, राघव, राधिका, समृद्धि, माधव ने श्रीमद भागवत पुराण की आरती उतारी। अंत में व्यवस्थापक पवनदास ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
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