बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर डिजिटल दुनिया एवं एआई के असर पर मंथन
तेजस टूडे ब्यूरो
अजय जायसवाल
गोरखपुर। तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया, सोशल मीडिया, रील्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है। इस गंभीर चुनौती पर मंथन के लिए मनोरोग विशेषज्ञों का दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन UPIPS-2026 शनिवार को मोहद्दीपुर के एक होटल में शुरू हुआ। सम्मेलन का विषय ‘यंग माइंड इन ट्रांजिशन: फ्रॉम अवेयरनेस टू एक्शन’ रखा गया है। सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि एम्स गोरखपुर की निदेशक डॉ. विभा दत्ता और विशिष्ट अतिथि महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने किया। इसमें देश-प्रदेश के नामी मनोरोग विशेषज्ञ जुटे हैं।
सोशल मीडिया एवं रील्स से बढ़ रहा तनाव
पहले सत्र में निमहांस बेंगलुरु के पूर्व निदेशक प्रो. शेखर शेषाद्री ने कहा कि रील्स और इंस्टाग्राम पर दिखने वाली काल्पनिक जीवनशैली बच्चों में असंतुलन और तनाव पैदा कर रही है। इसके सकारात्मक-नकारात्मक प्रभावों को समझना जरूरी है।
नशे की लत एवं व्यवहारगत विकारों पर चर्चा
दूसरे सत्र में प्रयागराज के डॉ. क्षितिज श्रीवास्तव और KGMU लखनऊ के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. आदर्श त्रिपाठी ने किशोरों में नशे की प्रवृत्ति, उसके जोखिम और रोकथाम के उपायों पर विस्तार से चर्चा की।
मूड डिसऑर्डर एवं नयी तकनीक
सफदरजंग अस्पताल दिल्ली के डॉ. निशांत गोयल ने किशोरों में मूड डिसऑर्डर के आधुनिक उपचार, वहीं देहरादून मेडिकल कॉलेज के डॉ. शोभित गर्ग ने न्यूरोमॉड्यूलेशन जैसी नई तकनीकों पर जानकारी दी।
नाबालिगों के उपचार में नैतिक चुनौतियां
KGMU की चाइल्ड साइकियाट्री यूनिट के डॉ. विवेक अग्रवाल और निमहांस के फोरेंसिक साइकियाट्री यूनिट के अध्यक्ष प्रो. सुरेश बड़मत ने मस्तिष्क विकास संबंधी विकारों और नाबालिग मरीजों के इलाज में सहमति, गोपनीयता और कानूनी प्रावधानों की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए परिवार, समाज और चिकित्सा जगत को मिलकर प्रयास करने होंगे। सम्मेलन रविवार को भी जारी रहेगा।













