महिला जिला अस्पताल का कारनामा, मासूमों की डेड बॉडी का होने लगा सौदा
32 सौ रुपये दो-बच्चे की डेड बॉडी लो
संदीप पाण्डेय
रायबरेली। जिला महिला अस्पताल जो अपने कारनामो की वजह से चर्चित रहता है। करोड़ों की लागत से बने नई बील्डिंग मे जब से आया है तब से इसके ऊपर मरीज व तीमरदारों ने गंभीर आरोप लगाए। जो कभी बाहर से दवा लिखने,अल्टासाउंड व खून की जांच कराने के नाम पर आरोप लगे तो कभी आपरेशन के नाम पर हजारों लिए गए। पैसा न देने की स्थिति में तीमारदारों के साथ मारपीट, गाली गलौज के साथ बड़ी धमकियां दी जाती हैं लेकिन कुछ ही घंटे बितते ही अस्पताल की ओर से परिजनों का मरीज का एक बयान व पत्र जारी करके सफाई दी जाती है और पूरे घटना क्रम पर लीपापोती हो जाती हैं। अस्पताल का समस्त स्टाफ अगले शिकार की ओर बढ़ जाता है और हुई घटना बीती हो जाती है। ये खेल वर्षों से चल रहा है।

आज तक किसी राजनीतिक, शासनिक व प्रशासनिक अमले ने कोई करवाई करने की जहमत नहीं उठाई तो ये सभी का मूक समर्थन अस्पताल को मिलता रहा है जिसका फायदा वो सरे आम उठाता है। जनता बेचारी सिर्फ पिसने के लिए मजबूर है आखिर कब तक…? दरअसल फिर से महिला जिला अस्पताल का एक मामला सामने आया है जिसमें पैसे के लिए बच्चे का शव बंधक बनाने की बात है। परिजनों का आरोप है कि पैसा मिलने तक उसे नहीं बताया गया कि उसका बच्चा मर चुका है। मामले की जानकारी होते ही भाजपा नेता कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं।
सलोन थाना इलाके के रहने वाले तेज भानु वर्मा बीती रात अपनी पत्नी को प्रसव के लिए लाए थे। यहां उसे आश्वासन दिया गया कि नार्मल डिलेवरी होगी। सुबह तेज भान से बताया गया कि आपरेशन करना पड़ेगा। इस बीच उसे 3300 नगद जमा करने के अलावा दवा का एक पर्चा भी पकड़ाया दिया गया। तेज भान पैसे का बंदोबस्त कर 22 सौ की बाहर से दवा खरीदकर पहुंचा। यहां आपरेशन थियेटर पर बताया गया कि आईसीयू से अपना बच्चा ले लो। वहां तेजभान पहुंचा तो उसे मृत बच्चा देकर गेट के बाहर धकेल दिया गया। तेजभान ने अपना सामान वार्ड से लाने के लिए अंदर जाना चाहा तो उसे सुरक्षा गार्ड्स ने 12 बजे के बाद आने की बात कहते हुए परिजनों को धकेल दिया। तेजभान परिजनों के साथ बाहर बैठ कर 12 बजने का इंतजार कर रहा था, उसी बीच भाजपा नेता संतोष पांडेय को मामले की जानकारी हुई। संतोष मृत बच्चे को गोद में लेकर कार्रवाई होने तक के लिए धरने पर बैठ गए हैं जिसके बाद जिला महिला अस्पताल के डाक्टर व कर्मचारी एक्शन मोड में आए और परिजनों पर दबाव बनाकर मामले को फिर से रफा-दफा करवाने की कोशिश करने लगे।
क्या कहती हैं प्रभारी सीएमएस डा. तौहीदा?
जब इस संबंध में प्रभारी सीएमएस डा. तौहीदा से बात की गई तो उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए पैसे लेने की बात से इनकार कर दिया।
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