लोक अदालत में दिया गया फैसला अन्तिम होता है: जनपद न्यायाधीश

तेजस टूडे ब्यूरो
देवी प्रसाद शर्मा
आजमगढ़। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली व राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देश पर जिला प्राधिकरण द्वारा जनपद न्यायाधीश जय प्रकाश पाण्डेय की अध्यक्षता में जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ जहां तमाम न्यायिक अधिकारीगण, बैक पदाधिकारीगण, अधिवक्तागण, न्यायालय के कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारम्भ जनपद न्यायाधीश जय प्रकाश पाण्डेय ने दीप प्रज्जवलित करके तथा वाग्देवी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके किया। इसके बाद अहसानुल्लाह खान प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय, बन्दना सिंह पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, अजय शाही अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नम्बर 1, कमलापति विशेष न्यायाधीश एस0सी0/एस0टी0 एक्ट, अजय श्रीवास्तव अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विजय वर्मा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, संतोष यादव नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत, जैनुद्दीन अंसारी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफ0टी0सी0 प्रथम सहित अन्य न्यायिक अधिकारीगण, बार अध्यक्ष, महामंत्री व बैंक के पदाधिकारीगण ने वाग्देवी की प्रतिमा के समक्ष पुष्पार्चन किया।
इस दौरान जनपद न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत आम आदमी के लिए उपलब्ध एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र है जिसके माध्यम से विवाद का निपटारा निःशुल्क व त्वरित किया जाता है। लोक अदालत में दिया गया फैसला अन्तिम होता है, उसके खिलाफ किसी उपरी न्यायालय में अपील नहीं होती हैं। लोक अदालत में दिये गये फैसले सुलह-समझौते के आधार पर होते हैं, इसलिए पक्षकारों के बीच मतभेद भी समाप्त हो जाते है। इसमें न कोई जीतता है और न ही कोई हारता है। लोक अदालत में निस्तारण हेतु कुल 112315 वाद चिन्हित किये गये थे जिसमें कुल 99884 वाद निस्तारित हुए तथा रू0 253038958 धनराशि का समझौता हुआ। प्रीलिटिगेशन स्तर पर 84741 तथा कोर्ट से 15143 दीवानी व फौजदारी वाद, राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारित हुए।
जनपद न्यायाधीश द्वारा 2 वादों का निस्तारण किया गया। बन्दना सिंह पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा कुल 116 वादों, अजय शाही अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नम्बर 1 द्वारा 1 वाद, कमलापति विशेष न्यायाधीश एस0सी0/एस0टी0 एक्ट द्वारा 5 वादों, अजय श्रीवास्तव अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नम्बर 3 द्वारा 3 वादों, विजय वर्मा विशेष न्यायाधीश ई0सी0 एक्ट द्वारा कुल 533 वादों, संतोष यादव अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नम्बर 6 द्वारा 17 वादों का निस्तारण किया गया। जैनुद्दीन अंसारी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफ0टी0सी0-I द्वारा 2 वादों, अमर सिंह-I अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफ0टी0सी0-02 द्वारा 4 वादों का निस्तारण किया गया। सत्यवीर सिंह मुख्य न्यायिक मजिस्टेट द्वारा 3402 वादों का निस्तारण किया गया।
वहीं पारिवारिक न्यायालय से अहसानुल्लाह खान प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय द्वारा 34 वादों, प्रेमशंकर अपर प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय संख्या 1 द्वारा 136 वादों का निस्तारण किया गया। इस प्रकार पारिवारिक न्यायालय द्वारा 170 वादों का निस्तारण किया गया जिनमें 50 दम्पत्तियों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर व मिठाई खिलाकर एक साथ जाने का निर्णय लिया। इस लोक अदालत में जिला कारागार में निरूद्ध बन्दियों द्वारा कौशल विकास के तहत बनाये गये सामानों का भी स्टॉल लगाया गया। कार्यक्रम का संचालन अंकित वर्मा सचिव जिला प्राधिकरण ने किया।

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