जेल रिहाई के दिन कैदी की हालत बिगड़ी, कोमा में पहुंचा कैदी
अस्पताल में भर्ती कराकर पुलिस कर्मी हुये फरार
तेजस टूडे ब्यूरो
रूपा गोयल
बांदा। जिला कारागार में बंद एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में हालत बिगड़ गई है। धारा 376 और पाक्सो एक्ट के तहत जेल में बंद कैदी, जिसे आज ही जमानत पर रिहा होना था। फिलहाल रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज के एडवांस आईसीयू के वेंटिलेटर में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। मामले में पुलिसकर्मियों के अस्पताल से भागने और जिला अस्पताल के डाक्टर द्वारा इलाज से पल्ला झाड़ने के बाद पूरा प्रकरण बेहद संदिग्ध हो गया है। जानकारी के अनुसार मरीज का नाम नीतीश पाल (मेडिकल पर्चे में नितेश 25 वर्ष) है। बताया जा रहा है कि उसे न्यायालय से जमानत मिल चुकी थी और सोमवार को उसकी रिहाई होनी थी लेकिन सुबह अचानक उसे गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया। मेडिकल कॉलेज के कैजुअल्टी रिकॉर्ड के मुताबिक जेल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने बताया कि कैदी को दौरे पड़े और वह जमीन पर गिर गया था।
सुबह 9047 बजे जब मरीज मेडिकल कालेज पहुंचा तब वह पिछले ढाई घंटे से अचेत था। उसका कोमा स्केल न्यूनतम स्तर पर था जो दिमाग के गहरे सदमे (डीप कोमा) को दर्शाता है। उसका ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर पर था। साथ ही मुंह से गुलाबी रंग का झाग आ रहा था जो फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने का साफ संकेत है। इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग और जेल पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्राप्त साक्ष्यों और दावों के बीच बड़े विरोधाभास सामने आए हैं। जिला पुरुष चिकित्सालय के डिस्चार्ज पर्चे पर सुबह 7.51 बजे मरीज के भर्ती होने और डा. हृदेश के अंडर में इलाज चलने का जिक्र है। पर्चे पर बकायदा दौरे की डायग्नोसिस और जीवन रक्षक दवाइयां दिए जाने का उल्लेख है लेकिन डिस्चार्ज पर्चे के अनुसार डा. हृदेश पटेल ने इस मरीज को देखने या इलाज करने से साफ इनकार किया है।
वहीं जब मरीज को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब डा. आकाश ने मरीज को देखा था और थोड़े ही उपचार के बाद उसे मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया था। वहीं रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज के पर्चे पर स्पष्ट दर्ज है कि कैदी को पुलिसकर्मी राकेश गोंड और आशीष पांडेय मेडिकल कालेज लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि सुबह 11.20 बजे मरीज को गंभीर हालत में एआईसीयू में भर्ती कराने के बाद ये दोनों पुलिसकर्मी वहां से रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। ठीक रिहाई के दिन एक कैदी का अचानक गहरे कोमा में चले जाना, साथ आए पुलिसकर्मियों का अस्पताल से भागना और मरीज के अधिवक्ता (वरिष्ठ) इंद्रकरण सिंह व उनके जूनियर रोहित सिंह गौतम एवं मरीज के पिता शिव भवन, के अनुसार जेल प्रशासन पर लगाए गए गंभीर लापरवाही और षडयंत्र के आरोप, ये सभी तथ्य किसी बड़ी साजिश या भारी प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा कर रहे हैं। फिलहाल मरीज की हालत बेहद नाजुक है। सिर के सीटी स्कैन और अन्य जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कोमा में जाने की असली वजह, क्या यह केवल मेडिकल इमरजेंसी है या कोई बाहरी चोट, साफ हो सकेगी। मामले में जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच की दरकार है।
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