विश्वविद्यालय आने के लिये शिक्षकों को प्राचार्य से लेनी होगी अनुमति
कुलपति के आदेश पर कुलसचिव ने जारी किया कालेजों को पत्र
शिक्षकों को पढ़ाई बाधित न करने का दिया गया निर्देश
सम्बद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों को कुलसचिव ने जारी किया पत्र
तेजस टूडे ब्यूरो
शुभांशू जायसवाल
जौनपुर। पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने महाविद्यालयों के शिक्षकों को अब प्राचार्य से अनुमति लेकर ही विश्वविद्यालय आना होगा, अन्यथा वह नहीं आ सकते। इसके लिए कुलपति के आदेश पर कुलसचिव ने सभी कॉलेजों और शिक्षकों को पत्र जारी कर दिया। शिक्षण कार्य की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देश दिया कि वे अपने यहां कार्यरत शिक्षकों को विश्वविद्यालय आने के दौरान निर्धारित कक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित नहीं करने के लिए निर्देशित करें।
कुलसचिव डॉ. विनोद सिंह की ओर से 6 नवम्बर को जारी पत्र में कहा गया है कि संज्ञान में आया है कि संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक महाविद्यालय के कार्य समय में विश्वविद्यालय आते हैं। इससे उनकी निर्धारित कक्षाएं एवं अन्य शैक्षणिक दायित्व प्रभावित होते हैं। विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए कक्षाओं का नियमित संचालन तथा पाठ्यक्रम समय से पूरा करना आवश्यक है।
पत्र में प्राचार्यों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने महाविद्यालय के सभी शिक्षकों को विश्वविद्यालय आने की योजना इस प्रकार बनाने के लिए अवगत करायें जिससे अध्यापन कार्य बाधित न हो। यदि महाविद्यालय के कार्य समय में विश्वविद्यालय आना आवश्यक हो तो संबंधित शिक्षक प्राचार्य से पूर्व सूचना देकर आवश्यक अनुमति प्राप्त करें। साथ ही अपनी निर्धारित कक्षाओं एवं अन्य शैक्षणिक दायित्वों के निर्वहन के लिए समुचित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया है कि शिक्षकों के विश्वविद्यालय आने से पहले संबंधित विद्यार्थियों को इसकी सूचना दी जाए, ताकि अध्यापन कार्य निर्बाध रूप से चलता रहे। कुलसचिव ने सभी प्राचार्यों एवं शिक्षकों से निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
ऐसे आदेश का विरोध करते हैं शिक्षक: डा. यदुवंश
शिक्षक नेता डा. यदुवंश कुमार ने कहा कि शिक्षक कक्षाएं पूरी करके ही छात्र शिक्षक हित कॉलेज हित में विश्वविद्यालय जाता है। परीक्षा परिणाम फंसा होता है या जो भी काम जरूरी होते हैं, वह शिक्षण कार्य पूरी करके जाता है। शिक्षकों पर किसी तरह का टिप्पणी करने के पहले मूल्यांकन किया जाय। ऐसे आदेश का शिक्षकगण विरोध करते हैं।
यह आदेश दुर्भावनापूर्ण: प्रो. राहुल
प्रो. राहुल सिंह अध्यक्ष शिक्षक संघ पूर्वांचल विश्वविद्यालय का कहना है कि यह आदेश दुर्भावनापूर्ण है। शिक्षकों के मर्यादा के खिलाफ है। 3 लाख छात्रों को पठन-पाठन प्रक्रिया में लगे शिक्षक पूरी निष्ठा से कक्षा संचालन करते हैं। उसके बाद छात्र व शिक्षक समस्या होती है या अन्य कोई समस्या होती है जरूरी होता है तभी विश्वविद्यालय जाते हैं। प्राचार्य से अनुमति लेकर ही जाते हैं। इस आदेश का हम पूरी तरह विरोध करते हैं और विश्वविद्यालय में तमाम कमियां है, उसको सुधारा नहीं जा रहा है, वहां के बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, काफी संख्या में रिजल्ट प्रभावित है, उसका निराकरण नहीं किया जा रहा है। शिक्षकों पर किसी तरह का भेद आरोप बर्दाश्त नहीं करेंगे।













