Jaunpur News : शहीद स्तम्भ पर पीपल के पेड़ के साथ उगी खास, जिम्मेदार हैं मौन
शूरवीरों के बलिदान हो रहा अपमान, परिसर में घास समेत फैली गन्दगी
विवेक सिंह/विनोद कुमार
सिरकोनी, जौनपुर। शहीद स्तम्भ एक ऐसी जगह है जहां पर हम लोग शहीदों को याद कर सकते हैं। इस नाम को सुनते ही हमारे दिलों दिमाग में हर उन शहीदों की याद तरोताजा हो जाती है जिन्होंने देश को आज़ाद कराने में अपने प्राणों की आहूति दे दी।
जरा सोचिए उनकी याद में बना शहीद स्तम्भ की स्थिति अगर जीर्ण शीर्ण हो या शहीद स्तम्भ पर पीपल का पेड़ उगा हो और शहीद परिसर में गंदगी के साथ घास उगे हो तो क्या कहेंगे आप इसे इस देश का दुर्भाग्य कहे या कुछ और कहे। हम बात कर रहे हैं सिरकोनी विकास खण्ड के हौज गांव में स्थित शहीद स्मारक की जहां शहीद स्तम्भ पर लगी कुछ टाइल्स उखड़ने के कगार पर है और उस पर पीपल के पेड़ के साथ घास उग चुकी है।
वहीं शहीद स्तंभ परिसर में घास समेत जगह जगह गंदगी देखने को मिल रही है। शहीद स्मारक की स्थिति देख हैरानी होती है कि जिन्होंने अपने प्राणों की आहूति देकर देश को आजाद कराया। उनकी याद में बने शहीद स्तम्भ को अपने ही दुर्दशा पर आशु बहाना पड़ रहा है जबकि जिला मुख्यालय से लगभग 10 से 15 किलोमीटर पर स्थित है। बाबजूद इसके भी शहीद स्मारक की देखभाल को नजरंदाज किया जा रहा है। आजादी की लड़ाई में अपना योगदान देने वाले शूरवीरों की याद में सन् 1986 में शहीद स्मारक व स्तम्भ का निर्माण कराया गया था। बता दें कि 1857 की गदर क्रांति में हौज गांव के क्रांतकारियों ने बड़ चढ़कर हिस्सा लिया।
हौज गांव के जमींदार बालदत्त ने एक युवाओं की टोली तैयार कर ली। 5 जून 1857 को पता चला कि जौनपुर के सभी अंग्रेज अफसर अपने सुपरवाइजर के नेतृत्व में वाराणसी जा रहे हैं। बालदत्त अपने करीब सैकड़ों साथियों के साथ उन्हें रास्ते में घेरकर सभी अंग्रेजों को मौत के घाट उतारकर शव को वहीं दफन कर दिया। इसका पता जब अंग्रेजी हुकूमत को चला तो सभी के खिलाफ मुकदमा चलाया गया। इसी दौरान गांव के ही कुछ लोगों की गवाही पर 16 लोगों को फांसी सजा सुनाकर फांसी दी गई। जबकि बालदत्त को काला पानी की सजा सुनाई गई। सजा के दौरान उनकी मौत हो गई।
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