किसानों को मृदा संरक्षण एवं टिकाऊ खेती के प्रति किया गया जागरूक
कृषि विज्ञान केन्द्र बक्शा के सभागार में कृषि विभाग ने आयोजित हुआ कार्यक्रम
तेजस टूडे सं.
विकास यादव
बक्शा, जौनपुर। कृषि विभाग, विकास खंड बक्शा के तत्वावधान में कृषि विज्ञान केंद्र, बक्शा के सभागार में ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष भूपेश सिंह ने किया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों एवं प्रगतिशील किसानों ने खेतों की उर्वरता बनाए रखने, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक डॉ. अश्वनी सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. वी.के. सिंह, वैज्ञानिक डॉ. राजीव सिंह, डॉ. राकेश सिंह एवं डॉ. रुपेश सिंह ने किसानों को कृषि से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी देने के लिए अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन डिप्टी पीडी आत्मा डॉ. रमेश चंद्र यादव ने किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भूपेश सिंह ने कहा कि खेत और किसान भारतीय कृषि व्यवस्था की आधारशिला हैं। खेतों की उर्वरता और उत्पादकता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। किसानों को जागरूक होकर मिट्टी की गुणवत्ता, जल संरक्षण और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाना चाहिए। खेतों को सुरक्षित रखकर ही खेती को लाभकारी और भविष्य की पीढ़ियों के लिए कृषि संसाधनों को संरक्षित किया जा सकता है।
डॉ. अश्वनी सिंह ने कृषि विभाग की योजनाओं एवं किसान हितैषी कार्यक्रमों की जानकारी देने के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही कहा कि मृदा स्वास्थ्य के अनुसार उर्वरकों का संतुलित प्रयोग, फसल चक्र अपनाना, जैविक पदार्थों का उपयोग तथा कृषि विभाग की तकनीकी सलाह के अनुरूप खेती करना आवश्यक है। किसानों को मिट्टी की जांच कराकर संस्तुति के अनुसार पोषक तत्वों का प्रयोग करना चाहिए, जिससे खेती की लागत कम करने और उत्पादन की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिले।
डॉ. वी.के. सिंह ने मृदा स्वास्थ्य एवं खेतों की दीर्घकालिक उत्पादकता पर जोर देते हुए कहा कि मिट्टी केवल फसल उगाने का माध्यम नहीं, बल्कि एक जीवंत प्राकृतिक संसाधन है। लगातार असंतुलित उर्वरक प्रयोग, फसल अवशेषों का अनुचित प्रबंधन और मिट्टी में जैविक पदार्थों की कमी भूमि की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
डॉ. राजीव सिंह ने वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। साथ ही कहा कि खेत की मिट्टी, जल उपलब्धता और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुसार फसलों का चयन तथा उचित कृषि तकनीकों का उपयोग करना चाहिए।
डॉ. राकेश सिंह ने खेतों में फसल अवशेष प्रबंधन एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही किसानों को फसल अवशेषों को जलाने से बचने तथा उनका उचित प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. रुपेश सिंह ने टिकाऊ कृषि, मृदा संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों के समन्वित उपयोग पर अपने विचार रखे। साथ ही कहा कि खेतों की उत्पादन क्षमता बनाए रखने के लिए मिट्टी की संरचना, नमी एवं पोषक तत्वों का संरक्षण आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. रमेश चंद्र यादव डिप्टी पीडी आत्मा ने कृषि विकास में प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी के प्रसार तथा किसानों की सक्रिय भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही कृषि वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों एवं किसानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता बताई। इस अवसर पर सहायक विकास अधिकारी (कृषि) अनुराग सिंह के साथ धर्मेंद्र पटेल, दिलीप कुमार, अश्वनी सिंह, सर्वेश यादव, विरेन्द्र मौर्य, शशिकांत पटेल, अरविंद सिंह, सूरज सरोज सहित कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सहभागिता रही।
प्रगतिशील किसान डॉ. अशोक सिंह, राम प्रसाद यादव, संतोष यादव, सुहेल यादव, विजयपाल सिंह, संजय सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को खेतों की उर्वरता बनाए रखने, वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने का संदेश दिया गया। खेत बचेंगे, मिट्टी स्वस्थ रहेगी और खेती टिकाऊ बनेगी—इसी संकल्प के साथ खेत बचाओ अभियान को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।














