डिप्थीरिया से बचने के लिये लगवायें टीका
मुख्य चिकित्साधिकारी ने ग्राम प्रधानों से की अपील
अमित त्रिवेदी
हरदोई। बच्चों में डिप्थीरिया (गला घोंटू) संक्रमण के केस लगातार आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण बच्चे का नियमित टीकाकरण नहीं करवाना है। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रोहताश कुमार ने दी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि शून्य से पाँच साल तक की आयु के बच्चों को डिप्थीरिया सहित 12 जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए नियमित टीकाकरण किया जाता है और यदि कोई बच्चा नियमित टीकाकरण से छूट जाता है तो सघन मिशन इंद्रधनुष अभियान आयोजित कर बच्चों का टीकाकरण किया जाता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि सभी की जिम्मेदारी बनती है कि बच्चों के नियमित टीकाकरण में सहयोग करें। उन्होंने ग्राम प्रधानों से अपील की कि अपनी ग्राम सभा व ग्राम पंचायत में सभी बच्चों के डिप्थीरिया सहित अन्य जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए टीककरण करवाना सुनिश्चित करें। इसके लिए क्षेत्र में लोगों को जागरूक करें कि वह अपने बच्चों का टीकाकरण करवाएं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि डिप्थीरिया अत्यंत संक्रामक रोग है। यह कोर्नीबैक्टीरियम डिप्थीरिया नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह मुख्यत: नाक व गले की म्यूकस झिल्ली को प्रभावित करता है। इससे बचने का उपाय टीकाकरण है। यदि समय पर इलाज हो तो जानलेवा भी हो सकता है। यह टीका परटुसिस और टिटेनस के टीके के साथ डेढ़, ढाई और साढ़े तीन माह में लगाया जाता है। मुख्य चिकित्साधिकारी ने ग्राम प्रधानों से अपील करते हुए कहा है कि डिप्थीरिया संक्रामक होने के कारण यह परिवार में अन्य बच्चों या आस पड़ोस के बच्चों को भी संक्रमित कर सकता है। इसलिए अभिभावकों को जागरूक करें कि बच्चे के बीमार होने के बाद में पैसा खर्च होगा जबकि टीकाकरण करवाने में कोई भी पैसा खर्च नहीं होगा। टीका पूरी तरह सुरक्षित है इसके लगवाने से बच्चा बीमार नहीं होगा। हो सकता है टीका लगने के बाद में बच्चे को बुखार आये इसका मतलब यह है कि टीका असर कर रहा है। यह बुखार अपने आप ठीक हो जाएगा लेकिन यदि आपकी इसमें कोई शंका है तो एएनएम, आशा या स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर चिकित्सक से संपर्क कर सकती हैं इसलिए बच्चे का पूर्ण टीकाकरण अवश्य करवाएं।

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