स्कूलों में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया दीपोत्सव
तेजस टूडे ब्यूरो
राजीव जायसवाल
प्रयागराज। सरस्वती विद्या मंदिर माधव ज्ञान केंद्र नैनी में पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय मिश्र ने माँ सरस्वती, भारत माता एवं परमब्रह्म ॐ के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन कर किया। विद्यालय के नन्हे-मुन्ने बच्चे भगवान श्रीराम, लक्ष्मण एवं माता जानकी के मनमोहक स्वरूप में सुसज्जित होकर सभी का मन मोह लिया। विद्यालय के भैया-बहनों ने अपने भाषणों के माध्यम से दीपावली एवं पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किये।
कार्यक्रम प्रमुख आचार्य श्याम सुंदर ने अपने उद्बोधन में 5 दिवसीय दीपोत्सव पर्व के महत्व को विस्तारपूर्वक समझाया। अंत में प्रधानाचार्य अजय मिश्र ने अपने आशीर्वचन में विद्यालय के समस्त भैया-बहनों एवं आचार्यों को दीपावली पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना किया। प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में डॉ. मधुलिका सिंह, प्राचार्या, सिटीजन गर्ल्स कॉलेज एवं बबली शुक्ला, मातृ भारती सदस्या उपस्थित रहीं। अतिथि निर्णायक बंधुओं का सम्मान प्रधानाचार्य द्वारा किया गया।
कार्यक्रम की प्रमुख आचार्या वन्दना सिन्हा, प्रतिभा तिवारी एवं सविता तिवारी रहीं। इसी प्रकार अरैल स्थित बीएल एकेडमी, डे बोर्डिंग स्कूल में दीपावली के अवसर पर कला, शिल्प एवं रंगोली प्रदर्शनी का भव्य आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने अपनी रचनात्मकता, कलात्मक प्रतिभा और कल्पनाशक्ति का शानदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई आकर्षक रंगोलियां, हस्तनिर्मित दीपक, सजावटी वस्तुएं एवं विभिन्न कलाकृतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। बच्चों की मेहनत, उत्साह और सुंदर प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। अभिभावकों ने भी विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
प्रधानाचार्या शालिनी त्रिपाठी एवं प्रबंधक राजकुमार त्रिपाठी ने विद्यार्थियों की प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास, टीम भावना एवं भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान विकसित करते हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में श्वेता, यशार्थ, तृप्ति, आयुषी, दरक्षण एवं यशश्वी आदि शिक्षिका का विशेष योगदान रहा।












