दो दिवसीय कार्यशाला का हुआ उद्घाटन
सिफ्सा ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित किया “मेरा मानसिक स्वास्थ्य-मेरा उत्तरदायित्व” कार्यक्रम
मुकेश तिवारी
झांसी। राष्ट्रीय सेवा योजना और राज्य परिवार नियोजन सेवा अभिनवीकरण परियोजना एजेंसी (सिफ्सा) बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झाँसी द्वारा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर “मेरा मानसिक स्वास्थ्य–मेरा उत्तरदायित्व” कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस मौके पर डॉ. श्वेता पाण्डेय और डॉ. उमेश कुमार द्वारा लिखित किताब एडवांस एडवरटाइजिंग और सिफ्सा कार्यक्रम पत्रिका विमोचन किया गया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए अधिष्ठाता कला संकाय बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय प्रो. मुन्ना तिवारी ने कहा कि आज मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर समस्या के रूप में समाज के सामने आ खड़ा हुआ है। कोविड के बाद सोशल मीडिया का उपयोग बहुत ही अधिक बढ़ गया है जिससे लोग आपस में बात कम सोशल मीडिया पर समय ज्यादा देते हैं। मानसिक अवसाद से बचने के लिए हमें नियमित शारीरिक व्यायाम एवं मैडिटेशन करना चाहिए। प्रो. तिवारी ने कहा कि 2019 में दुनिया भर में लगभग 28 करोड़ लोग मानसिक अवसाद से ग्रस्त थे जिनकी संख्या दिन प्रति दिन बढती जा रही है। उन्होंने बताया कि 14 वर्ष से कम उम्र से ही मानसिक अवसाद की समस्या शुरू हो जाती है। प्रो. तिवारी ने कहा कि हम अपनी हॉबी पर काम करते हुए मानसिक अवसाद से बच सकते हैं। मुख्य अतिथि बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनय सिंह ने कहा कि जीवन से बड़ी कोई समस्या नहीं होती है। हर समस्या का समाधान समय के साथ हो जाता है। जब कभी यह महसूस हो कि कुछ अच्छा नहीं लग रहा है तो किसी दोस्त से या परिवार के किसी सदस्य से बात करें। समाधान जरुर निकलता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलानुशासक बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय प्रो. आर.के. सैनी ने कहा कि आज के समय में वित्तीय घाटा, अचानक किसी जानलेवा बीमारी का पता लगना, परीक्षा में फेल हो जाने पर मानसिक अवसाद जल्दी ही हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि मानसिक अवसाद में आत्म हत्या का विचार आए तो मनोचिकित्सक या काउंसलर से तत्काल सलाह लेनी चाहिए। मनोचिकित्सक आकलन से कारणों का निदान करने का प्रयास करते हैं। इसके साथ ही परिवार को भी इसके बारे सूचित करना चाहिए।
विवि के परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर ने कहा कि शारीरिक व्यायाम करना मानसिक सेहत के लिए सबसे अच्छा है। खेलने, दौड़ने, टहलने या कसरत करने से मूड को ठीक करने वाले हार्मोन्स बनते हैं। यह जरुरी है कि हम प्रतिदिन कुछ न कुछ शारीरिक व्यायाम करें। संस्कृति पर्व पत्रिका के सम्पादक संजय तिवारी ने कहा कि महाभारत के युद्ध में अर्जुन जब मानसिक अवसाद से गुजर रहे थे तो उनके मित्र श्रीकृष्ण ने उन्हें इससे बचाया था। उन्होंने कहा कि परेशानी सभी की जिन्दगी में आती है। इसके लिए जरुरी यह है कि हम उनका समाधान खोजें न कि उनसे छिपने का प्रयास करें। यह कोई नई समस्या नहीं है कि परेशानियाँ अभी शुरू हुई हैं पहले नहीं हुआ करती थी, यह हमेशा से रही हैं। इनके समाधान के बारे में भी हमारे ऋषियों-मुनियों ने बहुत काम किया है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मंडलीय परियोजना प्रबंधक सिफ्सा डॉ. आनंद चौबे ने डॉ. श्वेता पाण्डेय को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों को जागरूक करने में अहम् भूमिका का निर्वहन करते हैं। उन्होंने कहा कि पोस्टर एवं चित्रकला प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं अन्य गतिविधियों में सहभागिता से जहाँ हमारे हुनर में निखार आता है, वही मन को सुकून भी मिलता है। उन्होंने कहा कि सिफ्सा बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झाँसी द्वारा विद्यार्थियों के हित में किया जा रहा यह कार्य सराहनीय है। कार्यक्रम की रुपरेखा प्रस्तुत करते हुए सिफ्सा नोडल अधिकारी डॉ. श्वेता पाण्डेय ने बताया कि इस कार्यशाला का आयोजन सिफ्सा से प्राप्त निर्देशों के अनुसार दो दिनों के लिए किया जा रहा है। इसमें विषय विशेषज्ञों के साथ ही विद्यार्थियों की रचनात्मक सहभागिता को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
एडवांस एडवरटाइजिंग किताब का हुआ विमोचन
डॉ. श्वेता पाण्डेय एवं डॉ. उमेश कुमार द्वारा लिखित किताब एडवांस एडवरटाइजिंग का विमोचन किया गया। इस किताब में विज्ञापन लेखन, उपभोक्ता व्यवहार, विज्ञापन शोध जैसे विषयों को शामिल किया गया है। डॉ. पाण्डेय ने बताया कि यह किताब विज्ञापन की नई विधियों को सीखने के साथ ही प्रभावी तरीके से विज्ञापन योजना बनाने और संचालित करने में मददगार साबित होगी।














