Homeलखीमपुर खीरीनशीले पदार्थों से बचाव ही है खुशहाल जीवन का आधार: डॉ अखिलेश

नशीले पदार्थों से बचाव ही है खुशहाल जीवन का आधार: डॉ अखिलेश

नशीले पदार्थों से बचाव ही है खुशहाल जीवन का आधार: डॉ अखिलेश

लखीमपुर खीरी। जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को जिला ग्राम्य विकाश संस्थान में नशा उन्मूलन कार्यशाला का आयोजन हुआ जहां नशीले/मादक पदार्थों से बचाव के बारे में बताया गया। इस दौरान डॉ अखिलेश शुक्ला मनोचिकित्सक जिला चिकित्सालय ने बताया कि नशा हम सब के लिए एक अभिशाप है जो हमारे समाज में आम है। मानव ही इस धरती पर सबसे बुद्धिमान और शक्तिशाली है और अपने जीवन को सुखद बनाने के लिए हर संभव कोशिश करता है लेकिन अच्छी शिक्षा के अभाव में लोग कम उम्र में ही नशा जैसे अन्य शारीरिक परिणामों का शिकार हो जाते हैं और आजीवन नशे की लत में रहते हैं। एक अध्ययन से पता चला कि 35 प्रतिशत भारतीय किसी न किसी तरह की नशा करते हैं। इनमें 20% से अधिक महिलायें और 47% मनुष्य हैं।

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नशा से होने वाली बीमारियां
नशे से होने वाली बीमारियाँ का विशेषज्ञों का मानना है कि तम्बाकू का सेवन करने वाले लोगों की आयु कम होती है, क्योंकि यह दांतों, आंखों, मुहों और फेफडों पर बुरा असर डालता है। तम्बाकू का सेवन मुंह से किया जाता है, इसलिए यह पहले मुह पर असर डालता है जहां मुह का कैंसर और दांत गिरना जैसी गंभीर बीमारियाँ होती हैं। तम्बाकू में पाया जाने वाला निकोटिन रक्तचाप को बढ़ाता है जो सांस लेने में कठिनाई, चक्कर आना और कमजोरी जैसी बीमारियाँ पैदा करता है। अर्थात् नशा हमारे लिए पूरी तरह से घातक है। सभी को नशा करना हानिकारक है। यह सभी को प्रभावित कर सकता है, चाहे वह पुरुष हो या स्त्री लेकिन नशा महिलाओं का पूरा जीवन बर्बाद कर सकता है। नशा मुक्त महिलाओं की तुलना में नशा से ग्रस्त महिलाओं की “गर्भपात दर” 15 फिसदी अधिक होती है। महिलाओं में दिल का दौरा, फेफडों कैंसर, सांस की बीमारी, निमोनिया, माहवारी की समस्याएं और प्रजनन संबंधी बीमारियाँ होती हैं। अगर वे इसे खाते हैं तो उनका पूरा जीवन खराब कर सकता है।
मनोचिकित्सक डॉ शुक्ला का कहना है कि नशा-मुक्त वातावरण बनाना, सहायता समूहों में भाग लेना और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की मदद लेना शामिल हो सकता है। व्यक्ति और परिवार मिलकर नशे के चक्र को तोड़ने में मुख्य भूमिका निभा सकता है। नशीली दवाओं की लत के बारे में खुलकर बात करना। इसका प्रभाव व्यक्ति और परिवार पर पड़ता है। ऐसे माहौल को बढ़ावा देकर जहां ईमानदारी से बातचीत हो सके, व्यक्ति और परिवार नशे के साथ आने वाली चुनौतियों और संघर्षों की बेहतर समझ हासिल कर सकते हैं। यह खुला संचार लत से जुड़े कलंक को तोड़ने में भी मदद कर सकता है, जिससे अधिक सहानुभूति की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त नशे की लत, इसके कारणों और उपलब्ध उपचार विकल्पों के बारे में स्वयं को शिक्षित करना महत्वपूर्ण है। चिकित्सक, परामर्शदाता और नशा मुक्ति विशेषज्ञ जैसे लोगों के पास प्रभावी उपचार और मार्गदर्शन प्रदान करने की विशेषज्ञता और अनुभव है। वे व्यक्तियों को उनकी लत के अंतर्निहित कारणों की पहचान करने, मुकाबला करने की योजना बनाने में मदद कर सकते हैं। इस अवसर पर जिला ग्राम्य विकास संस्थान के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। साथ ही ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक, आंगनवाड़ी सहायिका, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं उपस्थित रही।

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तम्बाकू के प्रयोग से होने वाले बीमारियां
तम्बाकू उत्पादों में लगभग 5 हजार से भी ज्यादा जहरीले पदार्थ पाए जाते हैं, इनमें सबसे ज्यादा हानिकारक निकोटीन, टार और कार्बन मोनोआक्साइड हैं, जो निम्नलिखित बीमारियों को जन्म देते अगर आप निम्न बतायी गयी बीमारियों को जानते हुए भी नशा करते हैं तो आप स्वयं से जिम्मेदार हैं लेकिन आपके साथ आपके परिवार (मता-पिता, पत्नी, पुत्र-पुत्री आदि) को भी इसका भुगतान करना होगा। अगर आप अपने परिवार और रिश्तों से प्यार करते हैं तो शराब पीना और नशा करना छोड़ दें और इसके बारे में दूसरों को भी बताये, ताकि आपका समाज, रिश्ते-नाते और परिवार नशे से मुक्त हो सके।

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मादक पदार्थ
भारत में कई मादक पदार्थ हैं जिनमें से कुछ प्राकृतिक है तो कुछ मानव निर्मित। मानव निर्मित मादक पदार्थ जैसे सिगरेट, तम्बाकू, हुक्का आदि होते हैं और प्राकृतिक रूप से प्राप्त मादक पदार्थ जैसे गाजा, भाग, धतूर, सूर्ती आदि होते हैं।

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नशा से दूर रहने का तरीका या उपाय
समाज को नशा से बचाने का सबसे बड़ी उपाय यह है कि उन्हें नशा से होने वाली बीमारियों के बारे में बताया जाय और यह कि नशा आपकी सेहत, पर्यावरण, आपके परिवार और आने वाली पीढी पर कैसे बुरा असर डालता है। नशाखोरी महिलाओं को शिशु जन्म देने में भी परेशानी हो सकती है। महिलाओं का नशा करना बाझपन, समय से पहले जन्म, मृत शिशु का जन्म या गर्भस्राव जैसी कई गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है।

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नशा को रोकने के लिये सरकार ने बनाये नियम
साइकेट्रिक सोशल वर्कर अतुल पाण्डेय ने बताया कि नशे को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कई नियम बनाए हैं। अगर किसी को सार्वजनिक स्थान पर शराब पीते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाती है, मई 2003 को सरकार ने राष्ट्रिय तम्बाकू नियंत्रण कानून पारित किया है। कानून सभी तंबाकू पदार्थ पर लागू होगा। जैसे-गुटखा, सिगरेट, पान मसाला, खैनी, इत्यादि। नशा रोकने को रोकने वाले धाराएं और कानून निम्नलिखित है।

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