HomeTrendingडलमऊ की ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की मुख्यमंत्री से लगायी गुहार

डलमऊ की ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की मुख्यमंत्री से लगायी गुहार

  • डलमऊ की ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की मुख्यमंत्री से लगायी गुहार

  • मामला डलमऊ गंगा तट के महाविद्यालय एवं आश्रम भवन की सुरक्षा का

तेजस टूडे सं.
बृजेन्द्र कुमार
डलमऊ, रायबरेली। गंगा तट स्थित ऐतिहासिक संस्कृत महाविद्यालय (छोटा मठ) की सुरक्षा को लेकर महाविद्यालय के प्रधानाचार्य उमाकांत अवस्थी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बचाने की गुहार लगाई है। मुख्यमंत्री भेजे गए प्रार्थना पत्र में बताया गया कि गंगा तट पर स्थित ऐतिहासिक संस्कृत महाविद्यालय छोटा मठ के बगल में दुर्गा प्रतिमाओं के भू विसर्जन से ऐतिहासिक भवनों को भारी नुकसान होने की पूरी आशंका है। प्रार्थना पत्र में ऐतिहासिक भवन परिसर की स्थिति का निरीक्षण कराने तथा प्रतिमाओं को सुरक्षित स्थान पर भू विसर्जन कराने की मांग की गई है।
प्रधानाचार्य उमाकांत अवस्थी ने बताया कि गंगा तट पर वर्ष 1944 में स्थापित मानव जीवन सुधार संघ तथा वर्ष 1953 में स्थापित संस्कृत महाविद्यालय की ऐतिहासिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत हैं। नवरात्र के दोनों पक्षों में प्रतिमाओं के भू विसर्जन से संस्थानों से जुड़ी इमारतों और परिसर को भारी नुकसान पहुंच सकता है। प्रधानाचार्य ने बताया कि मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष पूर्व में भी समस्या उठाई गई लेकिन उसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले को लेकर पूर्व में तहसील प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई। इस मामले को लेकर लगभग 4 वर्ष पूर्व हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में केस दर्ज कराया गया था जो अभी तक उच्च न्यायालय में विचाराधीन चल रहा है।
मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायत में मामले को गंभीरता से लेते हुए ऐतिहासिक भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने, आवश्यक संरक्षण कार्य कराने तथा प्रतिमाओं के भू विसर्जन को सम्मानपूर्वक सुरक्षित स्थान पर कराए जाने की प्रार्थना की है। यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो ऐतिहासिक धरोहरों को अत्यधिक नुकसान होने की पूर्ण संभावना है। ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

 

 

 

 

 

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