कांस्य पदक लेकर लौटे रोहित, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब
गाड़ियों के काफिले के साथ निकला विजय जुलूस
मियाचक से अदारी तक फूल-मालाओं से हुआ अभिनन्दन
तेजस टूडे सं.
अरविन्द यादव
मीरगंज, जौनपुर। जापान के नागोया में आयोजित 20वें एशियाई खेल में भाला फेंक स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर लौटे अंतरराष्ट्रीय एथलीट रोहित यादव के स्वागत में क्षेत्र की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। बाबतपुर एयरपोर्ट से मियाचक पहुंचने के बाद रोहित का विजय जुलूस निकला। गाड़ियों के काफिले के साथ खुली जीप में निकले रोहित के स्वागत के लिये रास्ते भर लोग उमड़े रहे। मियाचक, बंधवा बाजार, जगदीशपुर, गोधना बाजार से लेकर अदारी तक जगह-जगह फूल-मालाओं से उनका अभिनन्दन किया गया। रोहित के पहुंचते ही युवाओं और बच्चों में खासा उत्साह दिखाई दिया। लोगों ने भारत माता की जय और रोहित के समर्थन में नारे लगाया। कई स्थानों पर लोगों ने उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया। युवाओं में उनके साथ सेल्फी लेने की होड़ रही। गांव और बाजारों में लोग काफी देर तक जुलूस के पहुंचने का इंतजार करते रहे। स्वागत कार्यक्रम में अखिलेश सिंह, रामासरे यादव, विजय श्याम, नितिन यादव, केपी यादव, मनीष सेठ, चंद्रसेन गिरी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।
पिता बोले- रास्ता दिखाया, बेटे ने मेहनत की
रोहित के पिता सभाजीत यादव ने कहा कि उन्होंने बेटे को आगे बढ़ने का रास्ता जरूर दिखाया लेकिन मुकाम तक पहुंचाने वाली मेहनत रोहित ने खुद की। उन्होंने बताया कि परिवार के तीनों बच्चे जैवलिन थ्रो से जुड़े हैं। प्रतियोगिता के दौरान रोहित का प्रदर्शन परिवार ने टीवी और मोबाइल पर देखा था। एक थ्रो तार से टकरा गया था। पिता के मुताबिक वह प्रयास सफल होता तो पदक का रंग बदल सकता था। उन्होंने उम्मीद जताई कि रोहित आगामी विश्व चैंपियनशिप और 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में भी देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
संसाधनों की कमी के बीच शुरू किया सफर
रोहित के बड़े भाई राहुल यादव ने बताया कि शुरुआती दौर में जैवलिन थ्रो के लिए जरूरी उपकरण जुटाना भी चुनौती था। गांव में खेल सुविधाएं और तकनीकी जानकारी सीमित थी। इसके बावजूद उपलब्ध संसाधनों में अभ्यास करते हुए रोहित ने मेहनत जारी रखी और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई। विजय जुलूस के दौरान मीरगंज पुलिस यातायात और सुरक्षा व्यवस्था में जुटी रही। थानाध्यक्ष अरविंद सिंह पुलिसकर्मियों के साथ मौजूद रहे।












