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Jaunpur News: आशुतोष श्रीवास्तव की स्मृतियों से जीवंत हुआ सबरहद का रामलीला मंच

  • आशुतोष श्रीवास्तव की स्मृतियों से जीवंत हुआ सबरहद का रामलीला मंच

  • नारद मोह एवं विष्णु मोहिनी स्वयंवर का हुआ भावपूर्ण मंचन

  • सनातन प्रेम एवं रामलीला के प्रति समर्पण को गांव ने दी अनूठी श्रद्धांजलि

तेजस टूडे सं.
चन्दन अग्रहरि
शाहगंज, जौनपुर। रामलीला समिति सबरहद के तत्वावधान में 23 अक्टूबर से प्रभु श्रीराम की लीलाओं का भव्य मंचन शुरू हो गया। रामलीला के प्रथम दिन विधि-विधान से पूजन-अर्चन एवं भव्य आरती के साथ मंचन का शुभारंभ हुआ। इसके बाद नारद मोह एवं विष्णु मोहिनी स्वयंवर का रोचक और भावपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किया गया जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं आसपास के श्रद्धालु मौजूद रहे। मंचन के दौरान कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय और प्रभावशाली संवाद अदायगी से दर्शकों को देर तक बांधे रखा। नारद की भूमिका में संतोष श्रीवास्तव, ब्रह्मा की भूमिका में प्रवीण विश्वकर्मा, भगवान विष्णु की भूमिका में अंकित श्रीवास्तव तथा भगवान शंकर की भूमिका में रामराज मौर्य ने अपने अभिनय से प्रसंग में जीवंतता भर दी। कलाकारों के संवाद, भाव-भंगिमा और मंचीय प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों से उत्साहवर्धन किया।

आशुतोष की स्मृतियों को समर्पित है रंग मंच
सबरहद की रामलीला का यह मंच केवल धार्मिक आयोजन का मंच नहीं, बल्कि एक ऐसे समर्पित युवा की स्मृतियों का भी प्रतीक बन चुका है जिसने अपना जीवन प्रभु श्रीराम की लीला और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में समर्पित कर दिया था। रामलीला समिति एवं ग्रामीणों ने हिंदू संगठन से जुड़े रहे पत्रकार साथी स्व. आशुतोष श्रीवास्तव के सनातन प्रेम, हिंदूवादी विचारधारा और रामलीला के प्रति उनके अगाध लगाव को देखते हुए मंच का नाम “आशुतोष श्रीवास्तव स्मृति रंगमंच, सबरहद” रखा है। बताया जाता है कि करीब दो वर्ष पूर्व आशुतोष श्रीवास्तव जब सुबह लगभग नौ बजे अपने घर से काम के लिए निकले थे तभी घर से कुछ दूरी पर बदमाशों ने गोली मारकर उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। उनके परिजन आज भी न्याय की आस में संघर्षरत हैं।

रामलीला के मंच पर आज भी महसूस होती है आशुतोष की मौजूदगी
आशुतोष रामलीला के प्रमुख किरदारों में शामिल रहे थे। वह स्वयं मंच पर विभिन्न भूमिकाएं निभाते थे और रामलीला के सफल एवं सुचारू संचालन के लिए तन, मन और धन से पूरी तरह समर्पित रहते थे। आयोजन की तैयारियों से लेकर मंचन तक वह हर स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाते थे। ग्रामीणों का कहना है कि आशुतोष भले ही आज उनके बीच मौजूद नहीं हैं लेकिन रामलीला के इस मंच पर उनकी यादें, उनकी मेहनत और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी आस्था आज भी जीवंत है। मंच का नाम उनके नाम पर रखा जाना उनके प्रति गांव की श्रद्धा और आत्मीय सम्मान का प्रतीक है। रामलीला के शुभारंभ पर श्रद्धालुओं ने कहा कि आशुतोष का व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों को सनातन संस्कृति, सामाजिक सरोकार और धार्मिक परंपराओं के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता रहेगा। उनके द्वारा रामलीला के लिए किए गए योगदान को गांव लंबे समय तक याद रखेगा। प्रथम दिन के मंचन के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय रहा। जय श्रीराम के जयघोष से परिसर गूंजता रहा और श्रद्धालुओं ने देर रात तक प्रभु श्रीराम की लीलाओं का आनंद लिया। आगामी दिनों में रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जायेगा।

 

 

 

 

 

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