अधूरे पड़े शौचालय, खुले में शौच को विवश ग्रामीण
निन्दूरा, बाराबंकी। विकास खण्ड निन्दूरा क्षेत्र में प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत गांवों को खुले में शौच मुक्त कराने के लिए बनाए गए शौचालय भ्रष्ट नौकरशाही की भेंट चढ़ कर रह गए हैं। घर-घर शौचालय बनवाकर गाँव को ओडीएफ करने की मुहिम कागजों में ही दफन होकर रह गई। मानक को दरकिनार कर बनाए गए अधूरे शौचालय प्रयोग लायक न होने के कारण ग्रामीण इलाकों में लोग आज भी खुले में शौच को विवश हो रहे हैं।

इस महत्वपूर्ण कार्य को कागजों में ही पूरा किया गया है। इसकी हकीकत तो गांवों में देखने को मिलती है, जब सुबह शाम हाथों में लोटा लेकर महिलाओं, पुरुषों को खेतों में जाते या सड़क किनारे शौच करते हुए देखा जाता है। गाँव में जो शौचालय बने भी हैं वह अधूरे हैं। लाभार्थियो में किसी की दूसरी किस्त नहीं आई तो उसमें कंडा भर दिया है। किसी के शौचालय पर छत ही नहीं डाली गई है ऐसे में लोग क्या करेंगे। इन शौचालयों को बनाने में गाँव में बजट तो करोड़ो रुपए खर्च हुआ पर किसी काम का नहीं रहा। ठेकेदारी प्रथा के तहत बनाए गए शौचालयों के पल्ले कब जर्जर होकर चल बसे किसी को पता ही नहीं चला। क्षेत्र के चाहे जिस गांव मे देखा जाये। हर घर में शौचालय अधूरा पड़ा है। इस तरह शौचालय बनवाने से क्या फायदा जब गरीब जनता लोटा लेकर शौच के लिए इधर-उधर भटकती रहती है। निन्दूरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत भद्रास रीवा सीवा मल्लावां खिझना टिकैतगंज गंगौली बड्डूपुर बजगहनी खुज्जी गांव के लोगों का कहना है कि ग्राम प्रधान व सचिव द्वारा आधे अधूरे शौचालय तो खड़े कर दिए गए लेकिन आज तक कंप्लीट नहीं किए गए जिसके चलते शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है।
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