Thursday, December 1, 2022
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नगर में फिर फूटा कोरोना बम, मिले दो पॉजिटिव

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चंदन अग्रहरि शाहगंज, जौनपुर। स्थानीय कोतवाली क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर जमीनी विवाद में हुई मारपीट में सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गये। घायलों को राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। क्षेत्र के ताखा पूरब गांव में गुरुवार को दो पक्षों में जमीनी विवाद में हुई मारपीट में एक पक्ष के 42 वर्षीय साहब लाल पुत्र विकास, 30 वर्षीय मीरा पत्नी शोभनाथ, 32 वर्षीय इन्द्रवती पत्नी साहब लाल, 27 वर्षीय रिंका पत्नी रमाकांत व 60 वर्षीय पंचकुला पत्नी अमरदेव घायल हो गये। वहीं सुरिस गांव में मामूली विवाद को लेकर दो पक्षों में मारपीट हो गई। जिसमें 30 वर्षीय विजय कुमार सिंह पुत्र कंचन सिंह व 28 वर्षीय आशीष पुत्र सूरजभान सिंह घायल हो गए। घायलों को राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। वहीं भुक्तभोगियों की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

चंदन अग्रहरि
शाहगंज, जौनपुर। कोरोना संक्रमण नगर में तेज़ी से पांव पसार रहा है इसी क्रम गुरुवार को कोरोना संक्रमण के कराएं गये सैम्पलिंग की एक और रिपोर्ट जांच रिपोर्ट आई जिसमें नगर के पुराना चौक निवासी दो मित्र युवक करोना संक्रमित पाए गए। जिन दोनों साथियों का कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई उनमें से एक युवक बीते दिनों कोरोना संक्रमण के चलते मृत व्यवसाई के खानदान में आयोजित एक तेरहवीं के कार्यक्रम में शामिल हुआ था।

बदलापुर, जौनपुर। आकाशीय बिजली की चपेट में आने से हुई किसान की मौत के बाद सोमवार को प्रशासन द्वारा उनके परिजन को मुआवजा स्वीकृति प्रमाण-पत्र दिया गया। स्थानीय क्षेत्र के ग्रामसभा पूरा सावल निवासी राजदेव यादव खेत में काम करने गए थे। तभी आकाशीय बिजली की चपेट में आ जाने से उनकी मौत हो गई थी। जिसका प्रशासन द्वारा सोमवार को चार लाख रूपये का मुआवजा स्वीकृति प्रमाण-पत्र उनकी पत्नी अनीता यादव को विधायक रमेश मिश्रा, एसडीएम अंजनी सिंह ने दिया। इस मौके पर प्रधान राजेश सिंह, मण्डल अध्यक्ष बलवीर गौड़, रामअवतार मौर्य, जवाहर लाल यादव, कृष्ण कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।

गुरुवार को कोरोना जांच की एक रिपोर्ट आई है। जिसमें नगर के पुराना चौक निवासी दो युवा मित्र की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उनमें से एक युवक बीते दिनों कोरोना संक्रमण के चलते मृत व्यवसाई के खानदान में आयोजित एक तेरहवीं के कार्यक्रम में शामिल हुआ था। नगर वासी बढ़ते संक्रमण को देखते काफी भयभीत है।

जौनपुर। अध्यक्ष नीलामी समिति/अपर प्रधान न्यायधीश तृतीय कुटुम्ब न्यायालय ने अवगत कराया है कि जनपद न्यायालय परिसर स्थित समस्त कैंटिन, पान शॉप व स्टेशनरी की दुकान एवं वाहन स्टैंड की सार्वजनिक नीलामी 10 जुलाई को 2 बजे दिन में परिसर स्थित सभागार में की जायेगी। बदलापुर, जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र के ग्रामसभा भगतपुर निवासी कोमल यादव खेत में काम करने गये थे। तभी अचानक आकाशीय बिजली की चपेट में आने से झुलस गए। परिजनों ने उपचार के लिए शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। समाचार लिखे जाने तक पीड़ित के हालत में सुधार की सूचना है। जौनपुर। भाजपा कार्यालय पर सामाजिक दूरी का ख्याल रखते हुये जिलाध्यक्ष श्री पुष्पराज सिंह के अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें आपातकाल पर चर्चा हुई। जिलाध्यक्ष ने कहा कि 25 जून का दिन एक विवादस्पद फैसले के लिए जाना जाता है यही वह दिन था जब देश में आपातकाल लगाने की घोषणा हुई तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जनता को बेवजह मुश्किलों के समुंदर में धकेल दिया। 25 जून, 1975 को आपातकाल की घोषणा की गई और 26 जून 1975 से 21-मार्च 1977 तक यानी 21 महीने की अवधि तक आपातकाल जारी रहा। आपातकाल के फैसले को लेकर इंदिरा गांधी द्वारा कई दलीलें दी गईं। देश को गंभीर खतरा बताया गया, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही थी उन्होंने कहा कि हमारे जिले जौनपुर से भी कई नेता जेल गए जिसमे मुख्य रूप से पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह अल्प आयु में ही जेल गए कैलाश विश्वकर्मा जी, हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव तमाम नेता जेल गये थे। जिलाध्यक्ष ने कहा कि आपातकाल की नींव 12 जून 1975 को ही रख दी गई थी जब इंदिरा गांधी के खिलाफ संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी राजनारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की राजनारायण ने अपनी याचिका में इंदिरा गांधी पर 6 आरोप लगाये थे 12 जून 1975 को राजनारायण की इस याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया इंदिरा गांधी को चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का दोषी पाया गया और इंदिरा गांधी के निर्वाचन को रद्द कर दिया और 6 साल तक उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ता इसलिए इस लटकती तलवार से बचने के लिए प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर आपात बैठक बुलाई गई। इस दौरान कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष डीके बरुआ ने इंदिरा गांधी को सुझाव दिया कि अंतिम फैसला आने तक वो कांग्रेस अध्यक्ष बन जाएं और प्रधानमंत्री की कुर्सी वह खुद संभाल लेंगे लेकिन बरुआ का यह सुझाव इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी को पसंद नहीं आया संजय की सलाह पर इंदिरा गांधी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 23 जून को सुप्रीम कोर्ट में अपील की सुप्रीम कोर्ट ने अगले दिन 24 जून 1975 को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वो इस फैसले पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें प्रधानमंत्री बने रहने की अनुमति दे दी, मगर साथ ही कहा कि वो अंतिम फैसला आने तक सांसद के रूप में मतदान नहीं कर सकतीं विपक्ष के नेता सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला आने तक नैतिक तौर पर इंदिरा गांधी के इस्तीफे पर अड़ गए। एक तरफ इंदिरा गांधी कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहीं थीं, दूसरी तरफ विपक्ष उन्हें घेरने में जुटा हुआ था। गुजरात और बिहार में छात्रों के आंदोलन के बाद विपक्ष कांग्रेस के खिलाफ एकजुट हो गया। लोकनायक कहे जाने वाले जयप्रकाश नारायण (जेपी) की अगुआई में विपक्ष लगातार कांग्रेस सरकार पर हमला कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अगले दिन 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में जेपी ने एक रैली का आयोजन किया जिसमे अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, आचार्य जेबी कृपलानी, मोरारजी देसाई और चंद्रशेखर जैसे तमाम दिग्गज नेता एक साथ एक मंच पर मौजूद थे। विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से इमरजेंसी के घोषणा पत्र पर दस्तखत करा लिए जिसके बाद सभी विपक्षी नेता गिरफ्तार कर लिए गए 26 जून 1975 को सुबह 6 बजे कैबिनेट की एक बैठक बुलाई गई इस बैठक के बाद इंदिरा गांधी ने ऑल इंडिया रेडियो के ऑफिस पहुंचकर देश को संबोधित किया उन्होंने कहा कि आपातकाल के पीछे आंतरिक अशांति को वजह बताई लेकिन इसके खिलाफ गहरी साजिश रची गई इसके बाद प्रेस की आजादी छीन ली गई, कई वरिष्ठ पत्रकारों को जेल भेज दिया गया अखबार तो बाद में फिर छपने लगे, लेकिन उनमें क्या छापा जा रहा है। ये पहले सरकार को बताना पड़ता था। इमरजेंसी का विरोध करने वालों को इंदिरा गांधी ने जेल भेज दिया था 21 महीने में 11 लाख लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. 21 मार्च 1977 को इमरजेंसी खत्म करने की घोषणा की गई। इंदिरा गांधी और कांग्रेस आपातकाल को संविधान के अनुसार लिए गया फैसला बताते रहे, लेकिन वास्तव में उन्होंने 1975 में संविधान द्वारा दिए गए इस अधिकार का दुरुपयोग किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल जिला उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंघानियां, अमित श्रीवास्तव, जिला महामंत्री शुशील मिश्रा, पीयूष गुप्ता, जिला मंत्री राजू दादा, अभय राय डीसीएफ चेयरमैन धन्यजय सिंह, भूपेंद्र पांडे, आमोद सिंह, विनीत शुक्ला, राजवीर दुर्गवंशी, रोहन सिंह, इन्द्रसेन सिंह प्रमोद, अनिल गुप्ता, प्रमोद प्रजापति, भाजयुमो जिला महामंत्री विकास ओझा, शुभम मौर्या आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे। तेजस टूडे न्यूज। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गैंगस्टर विकास दुबे को उज्जैन के महाकाल मंदिर में दर्शन करते हुए गिरफ्तार कर लिया गया है। बता दें, बीते कई दिनों से दुबे फरार चल रहा था। जिसकी तलाश कई राज्यों में उत्तर प्रदेश की पुलिस कर रही थी। बता दें, विकास पर 8 पुलिसकर्मियों की हत्या करने का आरोप है। आपको बता दे कि बीते शुक्रवार को उत्तर प्रदेश पुलिस, कानपुर के चौबेपुर में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने पहुंची थी। जहां विकास दुबे ने अपने साथियों के साथ मिलकर पुलिसवालों पर हमला कर दिया था। जिसमें प्रदेश के डिप्टी SP देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे पर 60 आपराधिक मामले दर्ज है।

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