अयोध्या धाम में दिखा अद्भुत—अलौकिक—अकल्पनीय नजारा
30 लाख दीपक की रोशनी जगमगा उठा अवध धाम
गिनीज बुक ऑफ वर्ड में दर्ज हुआ नया कीर्तिमान
तेजस टूडे ब्यूरो
राजेश श्रीवास्तव/बिपिन सैनी
अयोध्या धाम। विगत कई वर्षों की भांति इस वर्ष 10वां दीपोत्सव बेहद भव्य रूप में मनाया गया। शनिवार की सायं 6 बजे सरयू नदी के किनारे स्थित सभी 56 घाटों राम की पैड़ी नए घाट पर 30 लाख दीपक जलाकर अयोध्या ने नया कीर्तिमान स्थापित किया। वहीं सभी घाट को सजाने के लिए स्कूल के लाखों बच्चों के साथ करीब 35,000 स्वयंसेवक जुटे रहे।
शाम होते ही सभी 56 घाटों पर स्कूल के विद्यार्थियों ने दीपदान किया। वहीं राम जन्म भूमि, हनुमानगढ़ी मंदिर को रंग बिरंगे फूलों झालर लाइट से आकर्षण रूप से सजाया गया। दीपों की रोशनी जगमगा उठा अवध धाम। क्षेत्र के समस्त मंदिर मानो ऐसा लग रहा है। आकाश के सभी तारे जमी पर आकर जगमगा रहे हैं। वहीं आकाश में एक साथ जगमगा रहे हैं।
इस वर्ष के दीपोत्सव के मुख्य अतिथि भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मंच पर मौजूद रहें। सरयू तट पर 2,151 वेदाचार्य और अर्चक एक साथ भव्य महाआरती में शामिल हुये।
वहीं नया घाट के आकाश में 2,100 स्वदेशी ड्रोन के जरिए रामायण में आधारित विभिन्न दृश्यों का आकर्षक ड्रोन शो और 3D लेजर शो का विहंगम दृश्य खुले आसमान में देख भाव—विभोर हो गये। दीपोत्सव के दौरान अयोध्या की रोशनी देखकर मानो ऐसा लग रहा था। जैसे त्रेता युग में प्रभु श्रीराम 14 वर्षों के वनवास बाद आज अवधपुरी आ गये हैं। देश के कोने—कोने से अयोध्या धाम दीपोत्सव का आनंद लेने पहुंचे दर्शकों को अद्भुत, अलौकिक, अकल्पनीय नज़ारा देखने को मिला। छात्र—छात्रा इस यादगार पल को अपने मोबाइल से सेल्फी लेते नज़र आये। अवध धाम क्षेत्र मानो ऐसा लग रहा था
कि कलयुग में श्रीराम चन्द्र पुष्पक विमान से अयोध्या धाम आ रहे हैं। इसी क्रम में आयोजित कार्यक्रम हेलीकॉप्टर द्वारा राम लक्ष्मण सीता हनुमान जी का आगमन हेलीकॉप्टर द्वारा किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुष्प वर्षा करके भगवान श्रीराम को तिलक लगाकर आरती पूजन किया।
वहीं नये घाट पर देश-विदेश के कलाकारों द्वारा रामलीलाओं का मंचन और 100 से अधिक कलाकारों के सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये। अयोध्या, दीपोत्सव के दौरान रोशनी, भक्ति और सांस्कृतिक शान के एक शानदार नज़ारे देखने को मिला। 14 साल के वनवास के बाद भगवान श्रीराम के अपने जन्मस्थान पर लौटने के सम्मान में मनाया जाने वाला यह शानदार दीपोत्सव त्योहार रामराज्य की भावना को फिर से जगाता है। सनातन धर्म और विश्वास और मेल—जोल के हमेशा रहने वाले मूल्यों को रोशन करता है।
















