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इस दौरान कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डुमरांव प्रखंड के वेक्टर जनित रोग सुपरवाइजर अभिषेक सिन्हा ने छात्राओं को एनटीडी के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि विश्व उपेक्षित उष्ण कटिबंधीय रोग (नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज) को एनटीडी रोग कहा जाता है। जिसमें लिम्फैटिक फाइलेरिया (हाथीपांव), कालाजार, कुष्ठ, डेंगू, चिकुनगुनिया, सर्पदंश, हाइडेटिडोसिस, रेबीज जैसे कुल 20 रोगों को शामिल किया है। जिनकी रोकथाम संभव है। एनडीटी जीवन को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाली बीमारियों का समूह है, जो सबसे अधिक गरीब व कमजोर आबादी को प्रभावित करता है। हालांकि, इन रोगों का रोकथाम संभव है, लेकिन फिर भी पूरी दुनिया में इन गंभीर बीमारियों से हर साल लोगों की या तो मौत हो जाती है या फिर वे विकलांग हो जाते हैं। जिसको देखते हुए पूरे विश्व के लोगों को जागरूक करने के लिए यह दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। वीबीडीएस अभिषेक सिन्हा ने बताया कि एनटीडी में शामिल बीमारियां वायरस, बैक्टीरिया, पैरासाइट फंगस और टॉक्सिन से होती हैं। जिसमें फाइलेरिया, डेंगू और कालाजार को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। जिस प्रकार लगातार प्रयासों से हमने चेचक को खत्म कर दिया है। ठीक उसी प्रकार हम सभी मिलकर एनटीडी में शामिल बीमारियों को भी खत्म कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि अमूमन देखा जाता है कि इन बीमारियों के प्रति समुदाय जागरूक नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों को मजबूती देने के लिए अब सभी वर्गों के लोगों जागरूकता दिखानी होगी। इन रोगों में लक्षणों की पहचान बेहद जरूरी है, यदि समय से मरीजों में इन रोगों की पहचान कर उनका इलाज शुरू किया जाए तो वह स्वस्थ हो जाएंगे। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर किसी मरीज को इन बीमारियों के लक्षण दिखे तो तत्काल अपने क्षेत्र की आशा को इसकी जानकारी दें और सरकारी अस्पताल में दिखाएं। ताकि, समय से इलाज करा कर इन बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।





