राजकीय संप्रेक्षण गृह में राज्यपाल ने कम्प्यूटर लैब का किया उद्घाटन
बेटियों को सकारात्मक वातावरण, उपलब्ध कराने के दिये निर्देश
तेजस टूडे ब्यूरो
गोविन्द वर्मा
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोरी) में राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा स्थापित कंप्यूटर लैब का उद्घाटन कर सर्वाइकल कैंसर जागरूकता एवं एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ करते हुये व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने संप्रेक्षण गृह में निवासरत किशोरियों से बात कर उनके जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं भविष्य की योजनाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त किया। सर्वाइकल कैंसर जागरूकता एवं एचपीवी टीकाकरण अभियान के अंतर्गत राजकीय संप्रेक्षण गृह तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की कुल 40 बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाई गई। राज्यपाल ने बेटियों को शैक्षणिक किट प्रदान करते हुए कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास तथा आत्मनिर्भरता का आधार है। उन्होंने बेटियों का आह्वान किया कि वे नियमित अध्ययन के साथ विभिन्न रोजगारपरक एवं कौशल आधारित गतिविधियों में भी दक्षता प्राप्त करें।
उन्होंने बेटियों को कंप्यूटर शिक्षा, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, मेहंदी कला, ब्यूटीशियन प्रशिक्षण, पाककला तथा स्वच्छता संबंधी व्यवहारिक ज्ञान अर्जित करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि वर्तमान में शिक्षा के साथ कौशल विकास भी समान रूप से आवश्यक है। कौशलयुक्त शिक्षा बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ रोजगार के अवसरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। राज्यपाल ने कहा कि जीवन में आने वाली प्रतिकूल परिस्थितियां किसी व्यक्ति के भविष्य का निर्धारण नहीं करतीं। दृढ़ इच्छाशक्ति, सकारात्मक सोच, सतत परिश्रम तथा कौशल विकास के माध्यम से प्रत्येक चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। बेटियों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प सहित अन्य उत्पादों का अवलोकन करते हुए राज्यपाल ने उनकी प्रतिभा और सृजनात्मक क्षमता की सराहना कि। साथ ही कहा कि ऐसी गतिविधियों को केवल शौक तक सीमित न रखकर स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए। राज्यपाल ने संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित रूप से दूध के सेवन, योगाभ्यास तथा स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर विशेष बल देते हुए कहा कि उत्तम स्वास्थ्य ही शिक्षा, आत्मविश्वास एवं जीवन में सफलता की आधारशिला है। उन्होंने बेटियों को पुस्तकालय का नियमित उपयोग करने, पुस्तकें पढ़ने तथा उनसे प्राप्त ज्ञान, प्रेरणा और सीख को लिखित रूप में अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित किया। प्रत्येक बेटी पढ़ी गई पुस्तक के संबंध में अपने विचार एवं अनुभव लिखकर उन्हें प्रेषित करे। यह अभ्यास न केवल लेखन क्षमता और अभिव्यक्ति कौशल को विकसित करेगा, बल्कि आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच एवं व्यक्तित्व विकास में भी सहायक सिद्ध होगा।
राज्यपाल ने बेटियों से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने अनुभवों से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
बालिका गृह की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए जिला प्रशासन, विश्वविद्यालय तथा संस्थान को अनेक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि बालिका गृह केवल आश्रय का स्थान नहीं, बल्कि बेटियों के व्यक्तित्व निर्माण, शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता का केंद्र बनना चाहिए।बेटियां स्वयं को रचनात्मक गतिविधियों में इतना व्यस्त रखें कि वे अतीत की नकारात्मक स्मृतियों से निकलकर नए जीवन की सकारात्मक शुरुआत कर सकें। बालिका गृह का संचालन विद्यालय की तरह व्यवस्थित ढंग से किया जाए, जहां शिक्षा, अनुशासन, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियां और कौशल विकास सभी का संतुलित समावेश हो। प्रत्येक बेटी में प्रतिभा और क्षमता होती है, आवश्यकता केवल उसे पहचानने, प्रोत्साहित करने और उचित अवसर प्रदान करने की होती है।
इस अवसर पर राज्यमंत्री खाद्य एवं रसद सतीश चन्द्र शर्मा, जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह, पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय, मुख्य विकास अधिकारी अन्ना सुदन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. सी.एम. सिंह, एसडीएम नवाबगंज गुंजिता अग्रवाल सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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