HomeTrendingप्रान्तीय मेला नजदीक, तैयारियां अधूरी

प्रान्तीय मेला नजदीक, तैयारियां अधूरी

  • प्रान्तीय मेला नजदीक, तैयारियां अधूरी

  • बदहाल सड़कें बढ़ायेंगी श्रद्धालुओं की मुश्किलें

तेजस टूडे सं.
बृजेन्द्र कुमार
डलमऊ, रायबरेली। स्थानीय कस्बे में लगने वाले विशाल प्रांतीय कार्तिक पूर्णिमा मेला एवं स्नान पर्व के चंद दिन रह गए हैं लेकिन प्रशासनिक तैयारियां अभी भी आधी अधूरी नजर आ रही हैं। प्रांतीय मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना के बाद भी क्षेत्र की प्रमुख सड़कों की बदहाली और क्षतिग्रस्त पटरियां आवागमन में बड़ी बाधा बन सकती हैं। ऐसे में मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। चौदहमील से मुराईबाग तक सड़क की पटरी जगह-जगह क्षतिग्रस्त है। वहीं सड़क चौड़ीकरण का कार्य चलने के कारण आवागमन पहले से ही मुश्किल बना हुआ है। पिछले दो दिनों से हो रही बे मौसम बरसात ने सड़कों की हालत और बदतर हो गई है।
मुराई बाग मुख्य चौराहे पर सड़क में बने बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढे आए दिन राहगीरों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। बड़े और छोटे वाहनों की लगातार आवाजाही के चलते सड़क की स्थिति और खराब हो गई है। मुख्य चौराहे से गुजरना भी राहगीरों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है जबकि आगामी 24 नवंबर को डलमऊ में विशाल प्रांतीय कार्तिक पूर्णिमा मेला एवं स्नान पर्व आयोजित होना है। इस दौरान रायबरेली सहित आसपास के जनपदों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। सामान्य रूप से मेले की तैयारियां दो माह पहले से शुरू कर दी जाती हैं।
मेला बैठक में अधिकारियों ने सभी संबंधित विभागों को समय से पहले व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए थे लेकिन लोक निर्माण विभाग की सुस्ती के चलते प्रमुख मार्गों की हालत अब तक नहीं सुधर सकी है। रायबरेली मुंशीगंज मार्ग कार्तिक पूर्णिमा मेला का मुख्य मार्ग होने के कारण इस मार्ग से भारी संख्या में श्रद्धालुओं और राहगीरों का आवागमन रहता है। सड़कों की बदहाली के चलते यहां दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी हुई है। सनातन धर्म पीठ बड़ा मठ डलमऊ के स्वामी दिव्यानंद गिरि ने कहा कि डलमऊ का प्रांतीय मेला क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु यहां गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। मेले की तैयारियों के लिए शासन से लाखों रुपये का बजट भी प्राप्त होता है लेकिन हर वर्ष तैयारियों के नाम पर धन खर्च होने के बावजूद व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई देता।
कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर्व नजदीक आने पर आनन-फानन में जैसे-तैसे व्यवस्थाएं पूरी की जाती हैं। इस वर्ष भी मेले को लेकर तैयारियां सुस्त हैं। उन्होंने संबंधित विभागों से समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने की मांग की है। अब सवाल यह है कि जब मेले में श्रद्धालुओं के पहुंचने का समय नजदीक है तो जिम्मेदार विभाग सड़कों की बदहाली को लेकर कब गंभीर होंगे? यदि समय रहते गड्ढों की मरम्मत और क्षतिग्रस्त पटरियों को दुरुस्त नहीं किया गया तो मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की राह मुश्किलों से भरी होना तय है।

 

 

 

 

Must Read