प्रशासनिक उपेक्षा के शिकार हो गये आदिवासी समाज के लोग: डॉ. उमेश
तेजस टूडे ब्यूरो
दीपक कुमार
मुगलसराय, चन्दौली। आदिवासी कांग्रेस उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. उमेश चन्द्र द्वारा प्रेस वार्ता कर दो मुद्दे पर चर्चा की गई।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. उमेश चन्द्र ने प्रदेश में निवासरत गोंड और खरवार जातियों के सदस्यों को कतिपय जिला प्रशासन द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी न करने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में जिला प्रशासन के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा शासनादेशों की अवहेलना कर अपने मर्जी के अनुसार सत्यापन रिपोर्ट लगाकर गोंड और खरवार जाति के सदस्यों को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र निर्गत होने में बाधा डाल रहे हैं और इन जातियों के सदस्यों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखने का षडयंत्र कर रहे हैं। जिला प्रशासन कभी-कभार दो-चार प्रमाण पत्र इसलिए जारी कर देता है कि उनसे पूछे जाने पर वो कह सकें कि हम जांचोपरांत प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं। आयुक्त सचिव राजस्व परिषद अनुभाग-4 द्वारा शासनादेश संख्या जी-144/4-149ए/ 2017 (टीसी) दिनांक 22 मार्च 2021 जो समस्त मंडलायुक्त एवं समस्त जिलाधिकारी उत्तर प्रदेश को संबोधित है, जिसमें स्वैच्छिक तरीके से गलत सत्यापन रिपोर्ट ना लगाकर सुसंगत शासनादेशों के क्रम में विधि अनुरूप जाति प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दिए गए हैं। बलिया जिलाधिकारी द्वारा शासन से मार्गदर्शन मांगने पर उन्हें शासनादेश सं. 129 दिनांक 3/11/2021 का पालन करने हेतु कहा गया है। जबकि इस शासनदेश के पालन हेतु दिसंबर महीने में शासनादेश सं. 3497 दिनांक 02 दिसंबर 2024 को भी जारी हो चूका था। उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि क्या प्राधिकृत अधिकारी शासनादेशों का पालन सुनिश्चित करेंगे? स्वेच्छाचार की समस्या का समाधान क्या है? उन्होंने मांग की है कि उत्तर प्रदेश शासन इस मामले को प्रति संवेदनशील बने और गोपनीय जांच कराकर जिला प्रशासन के दोषी अधिकारियों के विरुद्ध प्रशासनिक करवाई सुनिश्चित करें। प्रदेश अध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ राज्य के हसदेव अरण्य, जलवायु परिवर्तन और सरकार की नीतियों का मुद्दा भी पत्रकारों के समक्ष रखते हुए कहा कि वैश्विक तापमान और जलवायु परिवर्तन में ग्रीन हॉउस गैस उत्सर्जन प्रमुख कारक है जो जीवाश्म ईधन, औद्योगिकी और परिवहन के कारण होता है। वर्तमान में तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने की संभावना केवल 14 प्रतिशत हैं। सतत विकास लक्ष्य के अनुसार ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भारी कमी 2030 तक होनी चाहिए और 2050 तक शून्य तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने भूमंडलीय तापमान और जलवायु परिवर्तन के विषय पर भारत सरकार की राजनीतिक इच्छा शक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि हसदेव जंगल की कटाई और खनन के कारण 5 अरब तन कोयला के उत्पादन और इसके जलने के कारण उत्पन्न ग्रीन हॉउस गैस से क्या भूमंडलीय तापमान बढेगा नहीं, सतत विकास लक्ष्य के अनुसार तापमान को 1.50 सेल्सियस कैसे मेंटेन किया जायेगा? अतः सतत विकास और मानव सभ्यता को सुरक्षित बनाये रखने के लिए आवश्यक है कि भारत में खनन को प्रतिबंधित करते हुए केवल भारत की आवश्यकतानुसार खनन की अनुमति दी जाय और ऐसे परियोजनाओं के शुरू करने के पूर्व विस्थापित होने वाली आबादी के पुनर्स्थापन की पर्याप्त व्यवस्था की जाय। उन्होंने मांग की है कि हसदेव जंगल की कटाई और खनन पर रोक लगाई जाय। इस दौरान कुंदन खरवार प्रदेश सचिव, संजीव गौड़ प्रदेश सचिव, घुरऊ गोंड, रविशंकर गोंड, कृष्ण गोंड व शुभम खरवार उपस्थित रहे।
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