भागवत कथा के तीसरे दिन ध्रुव व विदुर चरित्र का प्रसंग सुन भाव—विभोर हुये श्रोतागण
96398
भागवत कथा के तीसरे दिन ध्रुव व विदुर चरित्र का प्रसंग सुन भाव—विभोर हुये श्रोतागण
तेजस टूडे सं.
चन्दन अग्रहरि
शाहगंज, जौनपुर। नवरात्र को लेकर हंसडीहा स्थित पगवारा दुर्गा मंदिर परिषद में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन को कथावाचक दुर्गविजय मिश्र ने ध्रुव व विदुर चरित्र की कथा का प्रसंग सुनाया। कथा वाचक ने कहा कि अगर ध्रुव 5 साल की उम्र में भगवान को पा सकता है तो फिर हम कैसे पिछड़ सकते हैं। अगर सच्चे मन से भगवान की भक्ति की जाय तो भगवान खुद अपने भक्तों से मिलने पहुंच जाते है।
कथा के दौरान झांकियां भी सजाई गई। वहीं विदुर प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम की व्याकुलता के बारे में उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण विदुर जी की कुटिया में भोजन करने गये और वहां केले के छिलकों का भोग स्वीकारा। इसके पहले वे दुर्योधन के महल में छप्पन भोग का त्याग कर आए थे।
उन्होंने कहा कि भगवान तो प्रेम के भूखे होते हैं और विदुर-विदुरानी ने भगवान को प्रेम से भोजन करवाया तो उन्होंने केले के छिलके भी प्रेम से खा लिए। कथा के दौरान कथा वाचिका ने श्रद्धालुओं के समक्ष सृष्टि वर्णन के प्रसंग को भी विस्तार से सुनाया। इस अवसर पर तमाम लोगों की उपस्थिति रही।
आधुनिक तकनीक से करायें प्रचार, बिजनेस बढ़ाने पर करें विचारहमारे न्यूज पोर्टल पर करायें सस्ते दर पर प्रचार प्रसार।