भूमाफियाओं व प्रशासन की मिलीभगत से किसान की जमीन पर कब्जा
पीड़ित किसान ने दी आमरण अनशन की चेतावनी
तेजस टूडे ब्यूरो
आशीष पचौरी
फिरोजाबाद। जनपद के ग्राम राजपुर (नगला केवल), मजरा एका में स्थित गाटा संख्या 1949 की जमीन को लेकर चल रहे विवाद ने अब विकराल रूप ले लिया है।
ग्राम एका के किसान लाखन सिंह की करोड़ों की जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे ने प्रशासन की साख को दाव पर लगा दिया है। 5 सालों से चले आ रहे न्याय के संघर्ष के बाद भी जिलाधिकारी कार्यालय और राजस्व विभाग ने ठोस कार्रवाई करने में नाकामी दिखाई। अब लाखन सिंह ने 15 जुलाई से आमरण अनशन करने की चेतावनी दी है, अगर उनकी जमीन से अवैध कब्जा हटाकर न्याय नहीं दिया गया।
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जाति छुपाकर हुई दो बार अवैध बिक्री, राजस्व अधिकारियों का खुला संरक्षण
लाखन सिंह की जमीन का एक हिस्सा भिकारी पुत्र श्यामलाल ने जानबूझकर अपनी जाति छुपाकर 1999 में जमीन बैनामा कर दी। इसके बाद 2019 में उसी जमीन को अनुसूचित जाति की महिला माया देवी सागर, जो नगर पंचायत एका की चेयरमैन भी हैं, को बैनामा किया गया। राजस्व अधिकारियों ने इस फर्जी बैनामा को रोकने के बजाय उसे वैध करने में सक्रिय भूमिका निभाई।
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राजस्व अधिकारियों व नगर पंचायत की मिलीभगत
अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) के आदेश के बावजूद, राजस्व निरीक्षक, क्षेत्रीय लेखपाल और नगर पंचायत के ईओ ने मिलकर 2 जून और 2 जुलाई 2025 को पुलिस बल के साथ जाकर लाखन सिंह की फसल जुतवा दी और जमीन पर सीमेंट के खंभे गाड़कर जमीन को घेर लिया। लाखन सिंह ने बताया कि यह प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की गई संगठित साजिश है, जिससे उनका परिवार मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से बर्बाद हो रहा है।
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प्रशासन की उपेक्षा से बढ़ता किसान आन्दोलन
लाखन सिंह ने जिलाधिकारी और उच्च प्रशासन से मांग की है कि तुरन्त उक्त अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, अन्यथा वे 15 जुलाई से आमरण अनशन पर बैठकर अपनी और हजारों किसानों की आवाज़ बुलंद करेंगे, जो अन्याय के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन भी बन सकता है।
सवाल-जवाब: क्या प्रशासन नतमस्तक हो चुका है भूमाफिया और राजनीतिक संरक्षण के आगे? यह मामला स्थानीय प्रशासन की नाकामी और भ्रष्टाचार को उजागर करता है। जब तक प्रशासन सक्रिय भूमिका नहीं निभाएगा, तब तक आम किसान अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए मजबूरन संघर्ष करते रहेंगे। क्या शासन-प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को अनदेखा करता रहेगा या फिर न्याय के लिए कदम उठाएगा? फिरोजाबाद से विशेष रिपोर्ट: यह मामला शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर एक आईना है, और अब समय आ गया है कि बड़े अधिकारियों द्वारा शीघ्र न्याय सुनिश्चित किया जाए, नहीं तो यह भूमि विवाद आमरण अनशन जैसे बड़े आंदोलन में तब्दील हो सकता है।
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