भगवान की भक्ति के बिना ज्ञान बेकार: देवकीनंदन
आरके धनगर
मथुरा। वृन्दावन विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में ठा. प्रियाकान्तजु मंदिर पर आयोजित सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग महोत्सव में भक्तों ने तीसरे दिवस 1 लाख ग्यारह हजार पार्थिव शिवलिंग बनायें। पार्थिव शिवलिंगों का अभिषेक-पूजन कर यमुना में विसर्जन किया गया। देवकींनदन महाराज ने ब्रज में भक्ति का महत्व बताया। छटीकरा मार्ग स्थित ठा. श्रीप्रियाकान्तजु मंदिर पर भागवत कथा श्रवण कराते हुये देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति के बिना ज्ञान का लाभ नहीं मिलता है। वृन्दावन में भक्ति जवान होती है और ज्ञान-वैराग्य मूच्र्छित हो गये। भक्ति के प्रयासों से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने पर ही ज्ञान-वैराग्य की चेतना वापस हुई थी।
उन्होंने कहा कि गुरू के सानिध्य में अपने धर्म, ईश्वर को जानों, अपने शास्त्रों से प्रेम करो, उन्हें पढ़ो, समझो तभी मानव जीवन सम्पूर्ण होगा। जब तक जीवन का उद्देश्य स्पष्ट नहीं होगा तब तक हम यूँ ही विभिन्न योनियों में भटककर जीवन-मरण के भंवर में फंसे रहेंगे। धर्म, संत, मां-बाप और गुरु की सेवा करो। भगवान की कथा का श्रवण और भजन करने से ही जीवन में शांति मिलती है। संस्था सचिव विजय शर्मा ने बताया कि आयोजन के तीसरे दिन शिवभक्तों ने 1 लाख ग्यारह हजार पार्थिव शिवलिंग बनाकर अभिषेक किया। उन्होंने निवेदन करते हुये कहा कि वृन्दावन में बाढ़ पीड़ित गौशालाओं की गऊओं की सेवा के लिये मंदिर पर सम्पर्क किया जा सकता है। स्थिति सामान्य होने तक ऐसी सभी गायों की सेवा प्रियाकान्तजु गौशाला में की जायेगी।
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