राज्याभिषेक की खुशी से लेकर राम वनगमन तक के मार्मिक मंचन ने दर्शकों को किया भाव—विभोर
मंथरा की कुटिल चाल, कैकेयी का कोप भवन, दशरथ मरण एवं गंगा पार करने के प्रसंग ने दर्शकों की आंखें की नम
तेजस टूडे सं.
बृजेश यादव
खुटहन, जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र के कोकना (पिलकिछा) में सन् 1948 से अनवरत संचालित धर्म मंडल रामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला में राम राज्याभिषेक की घोषणा से लेकर राम वनगमन, राजा दशरथ के मरण और गंगा पार करने तक के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। राम राज्याभिषेक की खबर सुनकर अयोध्यावासियों में जहां खुशी की लहर दौड़ उठी, वहीं मंथरा के प्रवेश और उसकी कुटिल चाल ने कथा को नया मोड़ दे दिया।
मंचन के दौरान मंथरा ने कैकेयी को अपने बहकावे में लेकर राजा दशरथ से दो वरदान मांगने के लिए प्रेरित किया। कैकेयी ने कोप भवन में जाकर पहला वरदान भरत के लिए राजगद्दी और दूसरा भगवान श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। महाराज दशरथ के लिए यह निर्णय असहनीय पीड़ा का कारण बना लेकिन रघुकुल की मर्यादा और वचन पालन की परंपरा के चलते श्रीराम ने सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया।
भगवान श्रीराम के वनगमन के दृश्य ने उपस्थित दर्शकों को भावुक कर दिया। माता सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ श्रीराम के अयोध्या छोड़ने, पुत्र वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने तथा आगे बढ़ते हुए श्रीराम के गंगा तट पहुंचने और गंगा पार करने के प्रसंग का कलाकारों ने प्रभावशाली मंचन किया। इन दृश्यों के माध्यम से त्याग, मर्यादा, भ्रातृ प्रेम और वचन पालन का संदेश दिया गया। रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं क्षेत्रीय दर्शक उपस्थित रहे।
रामलीला के इस दिन के कार्यक्रम का उद्घाटन श्रीकृष्ण पाण्डेय बड़कऊ ने फीता काटकर तथा भगवान विष्णु की आरती करके किया। श्रीकृष्ण पाण्डेय बड़कऊ अखिल भारतीय प्रधान संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष, भाजपा के जिला संयोजक तथा दि ग्राम टूडे के संपादक हैं। उद्घाटन के पश्चात रामलीला मंचन का शुभारंभ हुआ और दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय की सराहना किया। कार्यक्रम का संचालन राजन पाठक ने किया। अंत में समिति के पदाधिकारी बृजेश उपाध्याय, बजरंग बली उपाध्याय, धर्मेंद्र उपाध्याय, प्रवीण उपाध्याय आदि ने कार्यक्रम में पधारे अतिथियों, श्रद्धालुओं एवं सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
धर्म मंडल रामलीला समिति, कोकना (पिलकिछा) द्वारा वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। रामलीला के माध्यम से क्षेत्र में भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।














