जौनपुर में तेजी से बढ़ रहा मुंह का कैंसर, कारण नशा: डा. अवधेश गुप्ता
तेजस टूडे सं.
अजय विश्वकर्मा
सिद्दीकपुर, जौनपुर। जिले में आज एक ऐसी बीमारी तेजी से पैर पसार रही है जो चुपचाप लोगों की जिन्दगी निगल रही है। वह है मुँह का कैंसर जिसका सबसे बड़ा और चिंताजनक कारण है समाज में खुलेआम बिकने और खाए जाने वाले तम्बाकू उत्पाद- दोहरा, गुटखा, पान मसाला, खैनी और जर्दा। उक्त बातें डॉ. अवधेश गुप्ता एसोसिएट प्रोफेसर दंत रोग विभाग (मुख रोग एवं सूक्ष्म जीव विज्ञान विशेषज्ञ) स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय ने पत्र—प्रतिनिधि से हुई वार्ता के दौरान कही। उन्होंने आगे बताया कि जौनपुर के गांव-गांव, कस्बों और शहर की हर गली-मोहल्ले में 15-16 साल के किशोर से लेकर 60 साल के बुजुर्ग तक इन उत्पादों का सेवन करते दिखाई देते हैं। लोगों को लगता है कि दोहरा या गुटखा सिगरेट से कम हानिकारक है लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अनुसार भारत में होने वाले मुँह के कैंसर के 90% से अधिक मामले चबाने वाले तम्बाकू के कारण ही होते हैं और उत्तर प्रदेश इस मामले में सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक है।
क्यों इतने खतरनाक हैं दोहरा, गुटखा एवं पान मसाला?
इन उत्पादों में तम्बाकू के साथ सुपारी, चूना, कत्था सहित सैकड़ों हानिकारक रसायन मिले होते हैं। सुपारी स्वयं एक कैंसरकारी पदार्थ है। जब व्यक्ति इसे घंटों मुँह में दबाकर रखता है तो ये रसायन सीधे मुँह की कोमल झिल्ली को नुकसान पहुंचाते हैं। धीरे-धीरे मुँह के अंदर की त्वचा कठोर होने लगती है, मिर्च-मसाला खाने से जलन होने लगती है, मुँह पूरा खुलना बंद हो जाता है और अन्त में यही स्थिति कैंसर में बदल जाती है।
शुरूआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज
मुँह के कैंसर से बचाव का सबसे आसान तरीका है इसकी समय पर पहचान। यदि आपको निम्न लक्षणों में से कोई भी 2 सप्ताह से अधिक समय तक दिखे तो तत्काल दंत रोग विभाग में जांच करायें। याद रखें, शुरुआती स्टेज में पकड़ा गया मुँह का कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है।
जौनपुर को तम्बाकू-मुक्त बनाना सबकी जिम्मेदारी
कैंसर केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से तोड़ देता है। जौनपुर जैसे जिले में जहां अधिकांश लोग कृषि और मजदूरी पर निर्भर हैं, एक व्यक्ति का कैंसर से ग्रस्त होना पूरे परिवार को गरीबी के दलदल में धकेल देता है। अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर इस जहर के खिलाफ आवाज उठायें। अभिभावक अपने बच्चों पर नजर रखें, शिक्षक स्कूलों में जागरूकता फैलायें, दुकानदार नाबालिगों को ये उत्पाद न बेचें और प्रशासन स्कूलों-कॉलेजों के 100 मीटर के दायरे में इनकी बिक्री पर सख्ती से रोक लगायें।













