इतनी अधिक दवाइयां जिला अस्पताल को नहीं मिलतीं: प्रमुख चिकित्सा अधिकारी
तेजस टूडे ब्यूरो
देवी प्रसाद
आजमगढ़। मोर्चरी हाउस के पीछे कूड़े में पाई गई जीवन रक्षक दवाइयों का मामला शांत भी नहीं हुआ कि पुराने मोर्चरी हाउस के अंदर फिर अधिक मात्रा में जीवन रक्षक दवाइयां पाई गई जो मोर्चरी हाउस सीएमओ के अंडर में आता है। जहां कूड़े में फेंकी गई जीवन रक्षक दवाइयां मिली, वहीं से चंद कदम की दूरी पर एमएसडी स्टोर है। यहां से जिले भर के सीएससी और पीएससी के लिए दवाइयां भेजी जाती हैं तो जिम्मेदारी किसकी होती है? मोर्चरी हाउस के पीछे कूड़े में मिली दवाइयां के बारे में पूछे जाने पर सीएमओ ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि अस्पताल परिषद जिला अस्पताल का है।
इसकी जिम्मेदारी प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक की होती है। कहीं ठीक उसी तरह आज संकेत देकर प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक रीता दुबे यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश तो नहीं न कर रही है कि ज्यादा मात्रा में दवाइयां जिला अस्पताल को नहीं मिलती हैं। इससे तो यही साबित होता है कि स्वास्थ्य अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को एक—दूसरे के ऊपर डालकर पीछा तो नहीं न छुड़ा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि इतनी ज्यादा मात्रा में मरीजों को दी जाने वाली जीवनदायिनी दवाइयां कूड़े के ढेर में आई कहां से? किसने फेंका इन जीवनदायिनी दवाइयों को कूड़े में? अब तो यह मामला निष्पक्ष जांच का है। क्या प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक द्वारा गठित जांच टीम अपने स्वास्थ्य कर्मियों के लिए निष्पक्ष जांच करेगा। जीवनदायिनी दवाइयों को कूड़े के ढेर में फेंके जाने की खबरों की हेड लाइनों पर जिले के बड़े हकीमों की नजर नहीं पड़ती।
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