एआरटीओ कार्यालय में दलालों का कथित राज!
लाइसेंस के नाम पर 2 से 3 हजार वसूली के आरोप
डीबीए के कमरा नम्बर-6 से चल रहे कामकाज पर सवाल
आखिर किसके संरक्षण में सक्रिय हैं बिचौलिये?
तेजस टूडे ब्यूरो
रविन्द्र चौधरी
उरई, (जालौन)। एआरटीओ कार्यालय में कथित दलालों के बढ़ते प्रभाव और लाइसेंस बनवाने के नाम पर अवैध वसूली के आरोपों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार कार्यालय में डीबीए के कमरा नंबर-6 से लाइसेंस संबंधी कामकाज संचालित होने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि आम लोगों को अपने काम के लिए कथित बिचौलियों का सहारा लेना पड़ता है और बिना अतिरिक्त रकम दिए काम कराना मुश्किल हो जाता है। सूत्रों के मुताबिक सामान्य ड्राइविंग लाइसेंस के नाम पर 2,000 रुपये और हैवी लाइसेंस के लिए 3,000 रुपये तक लिए जाने के आरोप हैं। यदि ये दावे सही पाए जाते हैं तो यह जांच का गंभीर विषय है कि निर्धारित सरकारी शुल्क के अलावा रकम किस आधार पर ली जा रही है और इस कथित वसूली से किसे लाभ पहुंच रहा है।
दलालों का दबदबा या व्यवस्था की कमजोरी?
सरकारी कार्यालयों में आम नागरिकों को पारदर्शी और नियमानुसार सेवाएं मिलनी चाहिए। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि लाइसेंस बनवाने पहुंचने वाले लोगों को कथित बिचौलियों पर निर्भर क्यों होना पड़ रहा है? डीबीए के कमरा नंबर-6 में कौन-कौन से कार्य होते हैं और वहां कामकाज की निगरानी कौन करता है? इन बिंदुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
एआरटीओ प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
यदि कार्यालय परिसर में कथित अवैध वसूली हो रही है तो उसकी जिम्मेदारी तय करना विभागीय प्रशासन का काम है। क्या अधिकारियों को इन शिकायतों की जानकारी है? क्या लाइसेंस प्रक्रिया और शुल्क की निगरानी की जा रही है? इन सवालों पर एआरटीओ प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जांच होगी तो सामने आयेगी सच्चाई
मामले की निष्पक्ष जांच कराकर लाइसेंस के लिए निर्धारित सरकारी शुल्क सार्वजनिक किया जाना चाहिए। साथ ही आवेदकों से अतिरिक्त रकम लेने के आरोपों की पड़ताल कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जरूरत इस बात की भी है कि शिकायत करने वाले आवेदकों की समस्याएं सुनी जाएं और उन्हें बिना बिचौलियों के काम कराने की सुविधा मिले। फिलहाल कथित वसूली के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और एआरटीओ प्रशासन का पक्ष भी सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इन आरोपों पर क्या जवाब देते हैं और जांच के लिए क्या कदम उठाते हैं?













