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फसल उत्पादन से लेकर किसानों के मुआवजे तक में अहम हैं कृषि आंकड़े

  • फसल उत्पादन से लेकर किसानों के मुआवजे तक में अहम हैं कृषि आंकड़े

  • अधिकारियों को मिला प्रशिक्षण, डीआरडीए सभागार में जिलास्तरीय प्रशिक्षण

  • सटीक आंकड़ों के संग्रहण एवं समय पर रिपोर्ट देने पर दिया गया जोर

तेजस टूडे ब्यूरो
दिनेश तिवारी
रोहतास, बिहार। खेतों में कितनी फसल लगी, उत्पादन और उत्पादकता का स्तर क्या रहा तथा प्राकृतिक आपदा से फसल क्षति होने पर किसानों को कितनी सहायता मिलेगी, इन महत्वपूर्ण फैसलों का आधार कृषि सांख्यिकी के आंकड़े हैं। आंकड़ों की सटीकता किसानों को मिलने वाली सहायता और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से सीधे जुड़ी है। इसी को लेकर डीआरडीए सभागार में कृषि सांख्यिकी से संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों के क्षमतावर्द्धन के लिए जिलास्तरीय आवृतिचर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम किया गया। प्रभारी जिला पदाधिकारी-सह-उप विकास आयुक्त रोहतास की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। इस दौरान जिला सांख्यिकी पदाधिकारी ने कृषि सांख्यिकी के आंकड़ों के संग्रहण, संधारण और उपयोगिता की जानकारी देते हुए संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को समय पर सटीक प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि कृषि सांख्यिकी के आंकड़ों से जिले में फसलों के क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता का आकलन किया जाता है। इन आंकड़ों का उपयोग फसल बीमा के तहत क्षतिपूर्ति तथा बिहार राज्य फसल सहायता योजना के अंतर्गत किसानों को अनुदान एवं सहायता निर्धारित करने में भी किया जाता है। इसके अलावा सरकार कृषि क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और नीतियों के निर्माण में भी इन आंकड़ों का इस्तेमाल करती है।

फसल कटनी प्रयोग से लेकर डिजिटल पोर्टल तक की जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी, जिला सांख्यिकी कार्यालय, रोहतास के राजेश कुमार एवं अक्षय दूबे ने कृषि सांख्यिकी से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। इसमें फसल क्षेत्र सर्वेक्षण, खेसरा पंजी का संधारण, जिन्सवार एवं द्रुत जिन्सवार, भूमि उपयोग विवरणी, शुद्ध सिंचित विवरणी, प्रक्षेत्र मूल्य, नेत्रांकन विधि, फसल सांख्यिकी सुधार, फसल कटनी प्रयोग जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

कृषि सांख्यिकी से संबंधित कार्यों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए ई-सांख्यिकी पोर्टल (e-Statistics Portal), CCE AgriApp तथा DGCES App के उपयोग की प्रक्रिया भी समझाई गई। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आंकड़ों के संग्रहण और प्रतिवेदन तैयार करने की जानकारी देकर कार्यों में सटीकता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के पदाधिकारी सुमित कुमार, सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी, प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

 

 

 

 

 

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