Sunday, August 14, 2022

सबसे पुनीत कार्य है असहायों और दिव्यांगजनो की सेवा: राकेश वर्मा

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प्रदीप दूबे सुइथाकला, जौनपुर। मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशन में स्थानीय विकास खण्ड कार्यालय परिसर में सोमवार को दिव्यांगजन शिविर का आयोजन हुआ। शिविर में पहले से हीं चिह्नित 57 दिव्यांगजनो को सहायक उपकरण के रूप में ट्राईसाइकिल प्रदान की गई। शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रमुख प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ भाजपा नेता राकेश वर्मा ने कहा कि दीन दुखी और जरूरतमंद की सेवा करना सबसे पुनीत कार्य है। दिव्यांगजनो का सम्मान एवं उनकी सहायता करना सबसे बड़ा मानव धर्म है। प्रदेश की भाजपा सरकार दिव्यांगों के कल्याण के लिए सत प्रयत्नशील है। शिविर में सुइथाकला के 27 सोंधी के 19 व खुटहन विकासखण्ड से 01 दिव्यांग को सहायक उपकरण के रूप में ट्राईसाइकिल प्रदान की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी सुरेश कुमार मौर्य ने किया। इस दौरान प्रभारी खण्ड विकास अधिकारी राधेश्याम कन्नौजिया, सहायक विकास अधिकारी (समाज कल्याण) परदेशी राम, एडीओ पंचायत रमा शंकर सिंह, लेखाकार अनिल सिंह, भाजपा जिला उपाध्यक्ष संतोष सिंह, सुरेश पाण्डेय, संजय सिंह, राजेश उपाध्याय, ह्रदय नारायण शुक्ल भीम सिंह आदि मौजूद रहे।

प्रदीप दूबे
सुइथाकला, जौनपुर। मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशन में स्थानीय विकास खण्ड कार्यालय परिसर में सोमवार को दिव्यांगजन शिविर का आयोजन हुआ। शिविर में पहले से हीं चिह्नित 57 दिव्यांगजनो को सहायक उपकरण के रूप में ट्राईसाइकिल प्रदान की गई। शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रमुख प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ भाजपा नेता राकेश वर्मा ने कहा कि दीन दुखी और जरूरतमंद की सेवा करना सबसे पुनीत कार्य है।
दिव्यांगजनो का सम्मान एवं उनकी सहायता करना सबसे बड़ा मानव धर्म है। प्रदेश की भाजपा सरकार दिव्यांगों के कल्याण के लिए सत प्रयत्नशील है। शिविर में सुइथाकला के 27 सोंधी के 19 व खुटहन विकासखण्ड से 01 दिव्यांग को सहायक उपकरण के रूप में ट्राईसाइकिल प्रदान की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी सुरेश कुमार मौर्य ने किया। इस दौरान प्रभारी खण्ड विकास अधिकारी राधेश्याम कन्नौजिया, सहायक विकास अधिकारी (समाज कल्याण) परदेशी राम, एडीओ पंचायत रमा शंकर सिंह, लेखाकार अनिल सिंह, भाजपा जिला उपाध्यक्ष संतोष सिंह, सुरेश पाण्डेय, संजय सिंह, राजेश उपाध्याय, ह्रदय नारायण शुक्ल भीम सिंह आदि मौजूद रहे।

चंदन अग्रहरि शाहगंज, जौनपुर। सोमवार की सुबह अपने खेत मे पानी लेने गयी एक वृद्धा को जहरीले जंतु ने काट लिया जिससे वह अचेत हो गयी। प्राप्त जानकारी के अनुसार सरपतहां थाना छेत्र के ग्राम डेहरी निवासी 65 वर्सिय स्याम देवी सोमवार की सुबह अपने खेत मे पानी देने गयी थी कि अचानक किसी जहरीले जंतु ने उसे काट लिया जिसे वह मौके पर ही अचेत ही गयी। जानकारी होने पर पहुचे परिजनों ने आनन फानन में उपचार हेतु राजकीय पुरुष चिकित्सालय लाये जहाँ चिकित्सको ने प्राथमिक उपचार के बाद हालात ग़मभीर देखते हुए बेहतर इलाज हेतु जिला अस्पताल रेफर कर दिया। शाहगंज, जौनपुर। नगर के दो चर्चित युवाओं को एक समाज विशेष के प्रतिष्ठित संगठन जायसवाल क्लब की युवा इकाई में जिले की कार्यकारिणी में सम्मिलित किया गया। इस क्रम में रविंद्र जायसवाल को जायसवाल युवा क्लब का जिला महासचिव और पवन जायसवाल को जिला उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया। इस पर युवा समाजसेवी ईशान "राम" ने उन लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दी तथा उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उनसे यह अपेक्षा की रखी है की वह अपने समाज को संगठित करें और सर्व समाज के हित की बात करे तथा उसके लिए कार्य भी करें। जौनपुर। राय स्टूडियो एण्ड स्क्रीन प्रिंटिंग प्रेस त्रिलोचन महादेव, जलालपुर जौनपुर, हमारे यहां शादी विवाह, बर्थडे, रामायण आदि शुभ अवसर पर कार्ड की छपाई एवं विडियो व फोटोग्राफी की जाती है। जिसमें LCD, क्रेन, ड्रोन, 4K की सुविधा भी उपलब्ध है, और साथ ही करिज्मा एलबम की डिजाइनिंग की जाती है। जौनपुर। भाजपा कार्यालय पर सामाजिक दूरी का ख्याल रखते हुये जिलाध्यक्ष श्री पुष्पराज सिंह के अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें आपातकाल पर चर्चा हुई। जिलाध्यक्ष ने कहा कि 25 जून का दिन एक विवादस्पद फैसले के लिए जाना जाता है यही वह दिन था जब देश में आपातकाल लगाने की घोषणा हुई तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जनता को बेवजह मुश्किलों के समुंदर में धकेल दिया। 25 जून, 1975 को आपातकाल की घोषणा की गई और 26 जून 1975 से 21-मार्च 1977 तक यानी 21 महीने की अवधि तक आपातकाल जारी रहा। आपातकाल के फैसले को लेकर इंदिरा गांधी द्वारा कई दलीलें दी गईं। देश को गंभीर खतरा बताया गया, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही थी उन्होंने कहा कि हमारे जिले जौनपुर से भी कई नेता जेल गए जिसमे मुख्य रूप से पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह अल्प आयु में ही जेल गए कैलाश विश्वकर्मा जी, हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव तमाम नेता जेल गये थे। जिलाध्यक्ष ने कहा कि आपातकाल की नींव 12 जून 1975 को ही रख दी गई थी जब इंदिरा गांधी के खिलाफ संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी राजनारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की राजनारायण ने अपनी याचिका में इंदिरा गांधी पर 6 आरोप लगाये थे 12 जून 1975 को राजनारायण की इस याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया इंदिरा गांधी को चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का दोषी पाया गया और इंदिरा गांधी के निर्वाचन को रद्द कर दिया और 6 साल तक उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ता इसलिए इस लटकती तलवार से बचने के लिए प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर आपात बैठक बुलाई गई। इस दौरान कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष डीके बरुआ ने इंदिरा गांधी को सुझाव दिया कि अंतिम फैसला आने तक वो कांग्रेस अध्यक्ष बन जाएं और प्रधानमंत्री की कुर्सी वह खुद संभाल लेंगे लेकिन बरुआ का यह सुझाव इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी को पसंद नहीं आया संजय की सलाह पर इंदिरा गांधी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 23 जून को सुप्रीम कोर्ट में अपील की सुप्रीम कोर्ट ने अगले दिन 24 जून 1975 को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वो इस फैसले पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें प्रधानमंत्री बने रहने की अनुमति दे दी, मगर साथ ही कहा कि वो अंतिम फैसला आने तक सांसद के रूप में मतदान नहीं कर सकतीं विपक्ष के नेता सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला आने तक नैतिक तौर पर इंदिरा गांधी के इस्तीफे पर अड़ गए। एक तरफ इंदिरा गांधी कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहीं थीं, दूसरी तरफ विपक्ष उन्हें घेरने में जुटा हुआ था। गुजरात और बिहार में छात्रों के आंदोलन के बाद विपक्ष कांग्रेस के खिलाफ एकजुट हो गया। लोकनायक कहे जाने वाले जयप्रकाश नारायण (जेपी) की अगुआई में विपक्ष लगातार कांग्रेस सरकार पर हमला कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अगले दिन 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में जेपी ने एक रैली का आयोजन किया जिसमे अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, आचार्य जेबी कृपलानी, मोरारजी देसाई और चंद्रशेखर जैसे तमाम दिग्गज नेता एक साथ एक मंच पर मौजूद थे। विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से इमरजेंसी के घोषणा पत्र पर दस्तखत करा लिए जिसके बाद सभी विपक्षी नेता गिरफ्तार कर लिए गए 26 जून 1975 को सुबह 6 बजे कैबिनेट की एक बैठक बुलाई गई इस बैठक के बाद इंदिरा गांधी ने ऑल इंडिया रेडियो के ऑफिस पहुंचकर देश को संबोधित किया उन्होंने कहा कि आपातकाल के पीछे आंतरिक अशांति को वजह बताई लेकिन इसके खिलाफ गहरी साजिश रची गई इसके बाद प्रेस की आजादी छीन ली गई, कई वरिष्ठ पत्रकारों को जेल भेज दिया गया अखबार तो बाद में फिर छपने लगे, लेकिन उनमें क्या छापा जा रहा है। ये पहले सरकार को बताना पड़ता था। इमरजेंसी का विरोध करने वालों को इंदिरा गांधी ने जेल भेज दिया था 21 महीने में 11 लाख लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. 21 मार्च 1977 को इमरजेंसी खत्म करने की घोषणा की गई। इंदिरा गांधी और कांग्रेस आपातकाल को संविधान के अनुसार लिए गया फैसला बताते रहे, लेकिन वास्तव में उन्होंने 1975 में संविधान द्वारा दिए गए इस अधिकार का दुरुपयोग किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल जिला उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंघानियां, अमित श्रीवास्तव, जिला महामंत्री शुशील मिश्रा, पीयूष गुप्ता, जिला मंत्री राजू दादा, अभय राय डीसीएफ चेयरमैन धन्यजय सिंह, भूपेंद्र पांडे, आमोद सिंह, विनीत शुक्ला, राजवीर दुर्गवंशी, रोहन सिंह, इन्द्रसेन सिंह प्रमोद, अनिल गुप्ता, प्रमोद प्रजापति, भाजयुमो जिला महामंत्री विकास ओझा, शुभम मौर्या आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।.

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