विवि की गरिमा को ठेंस पहुंचाने की अनुमति किसी को नहीं: कुलपति
सतर्कता विभाग से पकड़े गये कर्मचारी को विवि प्रशासन ने किया बर्खास्त
तेजस टूडे ब्यूरो
देवी प्रसाद शर्मा
आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में स्थित कुलपति सभागार में हाई पावर कमेटी की आपात बैठक बुलाई गई जहां कल की घटना से क्षुब्ध कुलपति प्रो0 संजीव कुमार एवं कमेटी के सदस्यों ने कई कड़े निर्णय लेते हुए जिसमें संबंधित आरोपी आउट सोर्सिंग कर्मचारी संजय को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है एवं उचित माध्यम से एजेंसी को सूचित कर दिया गया।
विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के प्रबंधकगण, प्राध्यापकगण तथा छात्र-छात्राओं के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए विश्वविद्यालय से संबंधित सभी सेवाओं को ऑनलाइन करने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया की मुख्य द्वार पर शिकायत पेटिका एवं मेटल डिटेक्टर लगाए जाए। साथ ही विश्वविद्यालय से जुड़े सभी कर्मियों की समस्याओं हेतु हेल्प डेस्क के माध्यम से निस्तारित करने हेतु समिति का गठन किया जाए तथा प्रशासनिक भवन पर हेल्प डेस्क की सुविधा करण आगंतुक पंजिका के साथ प्रदान की जाय। सार्वजनिक रूप से विश्वविद्यालय एक ईमेल आईडी भी उपलब्ध कराएगा जिससे तकनीकी के माध्यम से छात्र-छात्राओं व अन्य कर्मियों की समस्याओं का समाधान स-समय हो सके।
कमेटी ने यह भी निर्णय लिया कि सभी शिक्षणेत्तर कर्मियों को प्रातः 10 बजे से सायं 6 बजे तक विश्वविद्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा। विशेष परिस्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों की अनुमति से परिसर में दायित्व निर्वहन करने की अनुमति प्रदान की जाएगी।इसके अतिरिक्त बिना अनुमति के परिसर में किसी भी कार्मिक का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। संकायाध्यक्षों के सुझावों को स्वीकार करते हुए कुलपति ने प्रशासनिक भवन के भूतल, प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय तल पर चैनल गेट लगवाकर सुरक्षा को और पुख्ता करने का निर्देश दिया। सुरक्षाकर्मी अकारण परिसर में चहल कदमी करने वालों से कारण पूछ सकते हैं जहां तक महाविद्यालय के प्राचार्यगण, संकायाध्यक्ष व प्रबंधक गण का प्रश्न है। प्रातः 10 बजे से 6 बजे तक ही विश्वविद्यालय के जिम्मेदार लोगों से मिल सकते हैं। इसके अतिरिक्त मेल मिलाप कदापि संभव नहीं है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी निर्णय लिया है कि केवल अधिकृत व्यक्ति ही मुख्य कैंपस में प्रवेश पा सकता है। प्रशासनिक भवन से लेकर एकेडमिक ब्लॉक तक सभी सेवारत कर्मचारी, शिक्षक सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से कुलपति एवं प्रशासनिक अधिकारियों की नजर में रहेंगे। महाविद्यालय के छात्रों व शिक्षकों को अतिरिक्त परेशानी ना हो इसलिए प्राचार्यगण को निर्देशित कर दिया गया है कि प्रत्येक दशा में अपने महाविद्यालय में हेल्प डेस्क की व्यवस्था करें तथा प्राचार्य, समिति बनाकर समस्या का वहीं निदान करें, विशेष परिस्थिति में बिना प्राचार्य द्वारा अग्रसारित कोई भी प्रार्थना पत्र विश्वविद्यालय ना भेजा जाए। इससे समस्याओं का त्वरित निदान होगा एवं विश्वविद्यालय पर अतिरिक्तबोझ भी कम पड़ेगा। एक महत्वपूर्ण निर्णय यह भी लिया गया कि केंद्राध्यक्ष व उड़ाका दल के गठन की पुनरावृत्ति नहीं की जाएगी जिससे परीक्षा की सुचिता बनाए रखने में सहयोग प्राप्त हो सके और अकारण विरोधाभासों से भी बचा जा सके।
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