मेरी मां बनकर आप मिले

शत—शत नमन है अम्मा को,
जन्म दिया फिर पाला पोषा,
दुलरा दुलरा कर बड़ा किया,
सीखों से जीवन बदल दिया।
पिता श्री का अनुशासन,
माता का प्यार-दुलार,
दादी मां का आशीष व
पूर्वजों से मिले संस्कार।
भ्राता श्री का मार्गदर्शन,
बहनों से मिला संरक्षण,
दादी माँ, माँ की ममता,
जीवन के बने आवरण।
दुनिया में नहीं यद्यपि ये,
स्मृतियों का संबल तो है,
मेरी सीधी सरल माँ की,
बातों का अवलम्बन तो है।
अब भी तो स्वप्नों में माँ कभी
कभी सिर पर हाथ फेरती हो,
पिता श्री की झिड़कियों का
मुझे सहारा तुम बन जाती हो।
जन्म जन्म तक माँ ऐसे ही,
शुभ आशीष व प्यार मिले,
आदित्य जब जब जन्म मिले,
मेरी माँ बन कर आप मिलें।
कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
जनपद—लखनऊ
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