Tuesday, May 19, 2026
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Coronavirus : कोरोना के रोकथाम के लिए दुनिया भर में 4 दवाओं का परीक्षण शुरू

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चीन। कोरोना की वजह से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है। जिससे सबके दिलों में खौफ बना हुआ है। सभी देश बचाओं लिए तरह-तरह के परिक्षण कर रहे है। इस बीच कोरोना को रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने दुनिया भर के देशों को कहा है कि वो मेगाट्रायल यानी की महा-परीक्षण करें। इस बीच खबरें आ रही है कि ये महा-परीक्षण शुरू भी हो चुका है।

इन चार दवाइयों के साथ दुनिया भर के डॉक्टर दो अन्य दवाइयों पर भी ध्यान दे रहे हैं। इन दोनों दवाइयों को सार्स और मर्स के दौरान बनाया गया था। लेकिन, इन दवाओं को वैश्विक स्तर पर अनुमति नहीं मिली थी। WHO द्वारा बताई गई इन चार दवाओं से होगा ये कि जो लोग बेहद गंभीर हैं, वे जल्द ठीक होंगे। साथ ही जो लोग हल्के या मध्यम स्तर की बीमारी से ग्रसित हैं वो पूरी तरह से ठीक हो जाएंगे।

पहली दवा रेमडेसिवीर – पहली दवा का नाम रेमडेसिवीर है। इसे जिलीड साइंसेज ने इबोला के इलाज के लिए बनाया था। रेमडेसिवीर किसी भी वायरस के RNA को तोड़ देता है। इससे वायरस इंसान के शरीर में घुसकर नए वायरस पैदा नहीं कर पाता। द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, अमेरिका के पहले कोविड-19 कोरोना वायरस के मरीज को सबसे पहले रेमडेसिवीर दवा दी गई थी। वह बेहद गंभीर था। लेकिन, अगले दिन ही उसकी तबियत ठीक हो गई।

दूसरी दवा क्लोरोक्विन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन – इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी वकालत की थी। उन्हें कहा था कि ये दवा गेम चेंजर हो सकती है। WHO की वैज्ञानिक समिति ने पहले इस दवा को खारिज कर दिया था। बाद में अब इसकी मंजूरी दे दी गयी है। क्लोरोक्विन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन दवा से इंसान के शरीर की उस कोशिका का अंदरूनी हिस्सा खत्म हो जाता है, जिसपर वायरस हमला करता है। इससे कोरोना वायरस के बाहरी सतह पर मौजूद प्रोटीन के कांटे बेकार हो जाते हैं। वायरस कमजोर हो जाता है।

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तीसरी दवाएं रिटोनावीर/लोपिनावीर – इन्हें कालेट्रा नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2000 में इसका उपयोग अमेरिका में सबसे ज्यादा HIV को रोकने के लिए किया गया था। ये दवा शरीर में बहुत तेजी से घुलती है। ये दवाएं शरीर में वायरस के हमले वाले स्थान पर जाकर वायरस और इंसानी कोशिका के संबंध को तोड़ देती हैं। एक खबर के मुताबिक, रिटोनावीर/लोपिनावीर का कोरोना वायरस पर पहला ट्रायल चीन के वुहान में ही किया गया था। 199 मरीजों को हर दिन दो बार दो-दो गोलियां दी गईं। इनमें से कई मरीज मारे गए। लेकिन दवा का असर कुछ मरीजों में दिखाई दिया था।

चौथी दवा रिटोनावीर/लोपिनावीर और इंटरफेरॉन-बीटा का मिश्रण – इस दवा का उपयोग सऊदी अरब में मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS) महामारी के दौरान संक्रमित मरीजों पर किया गया था। इससे शरीर के ऊतक यानी टिश्यू को नुकसान पहुंचता है लेकिन वायरस का प्रभाव खत्म होने लगता है।

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