अवध संध्या में लोक संस्कृति की बही अविरल धारा
अवधी सुरों पर झूम उठा लखीमपुर दशहरा मेला
तेजस टूडे ब्यूरो
नन्द कुमार मिश्रा
लखीमपुर खीरी। भारतीय लोकसंस्कृति की मिठास, अवधी माटी की सोंधी महक और लोक संगीत की मधुर स्वर लहरियों से सराबोर ऐतिहासिक लखीमपुर दशहरा मेला का दसवां दिन यादगार बन गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में आयोजित ‘अवध संध्या’ ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि पूरा वातावरण लोक कला, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव के रंगों में रंग गया। अवधी गीत-संगीत की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्र—मुग्ध कर दिया और अवध की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अनुपम छटा बिखेर दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव, अधिशासी अधिकारी संजय कुमार तथा विशिष्ट अतिथियों दीपक पुरी और आलोक मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। दीपों की पावन आभा के बीच आरंभ हुई इस सांस्कृतिक संध्या ने लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया। उद्घाटन सत्र का कुशल संचालन समाजसेवी एवं साहित्यकार राममोहन गुप्त ‘अमर’ ने किया। इसके उपरांत अवधी लोक गायिका दीपिका मिश्रा एंड पार्टी तथा शतांशु ने अपनी शानदार सांगीतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। लोक गीतों की मधुरता और सुरों की मनमोहक संगत ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। प्रस्तुतियों के माध्यम से अवध की लोकपरंपरा, सांस्कृतिक विरासत और जनजीवन से जुड़े भावों की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिली। अवध संध्या का आकर्षण केवल लोक संगीत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के लिए समर्पित व्यक्तित्वों के सम्मान ने भी आयोजन को गरिमा प्रदान की।
उद्घाटन सत्र में नगर पालिका परिषद की ओर से समाजसेवा, साहित्य और व्यवसाय के क्षेत्र में योगदान देने वाले संजय गुप्ता, उमेश शुक्ला, हुकुम अग्रवाल, सीमा गुप्ता, रमेश गुप्ता, पवन शर्मा, डॉ. रघुनंदन झा, जितेंद्र वर्मा, पंकज वर्मा, रमेश मिश्रा, मधुर बाजपेई, पुत्तन मिश्रा, रोहित बरनवाल सहित विभिन्न विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह ने समाज के प्रति समर्पण, रचनात्मकता और सकारात्मक योगदान को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। ऐसे आयोजन उन व्यक्तित्वों के योगदान को सार्वजनिक पहचान देते हैं जो अपने कार्यों से समाज को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में संयोजक मंडल के कौशल तिवारी, श्वेता यादव, अजय अग्रवाल, चंद्र प्रकाश धुरिया, सुरेंद्र पाल और रेनू गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर मेला अध्यक्ष रवींद्र रावत, मेला अधिकारी समरा सईद, नीलम रस्तोगी, शमीम बानो, इं. दुर्गेश वर्मा, श्वेता शर्मा, राकेश कुमार, बजरंग शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
ऐतिहासिक लखीमपुर दशहरा मेला की यह अवध संध्या एक बार फिर इस बात की साक्षी बनी कि लोक संस्कृति केवल हमारी परंपरा नहीं, बल्कि हमारी पहचान, हमारी जड़ों और हमारी भावी पीढ़ियों के सांस्कृतिक संस्कारों की अमूल्य धरोहर है। लोक कलाओं को मंच देकर और समाज के कर्मयोगियों को सम्मानित करके मेला सांस्कृतिक उत्सव के साथ सामाजिक सहभागिता का भी सशक्त संदेश दे रहा है।











