HomeTrendingफरक्का जल सन्धि पर पुनर्विचार जरूरी नहीं, इसका हो नवीनीकरण: संजय झा

फरक्का जल सन्धि पर पुनर्विचार जरूरी नहीं, इसका हो नवीनीकरण: संजय झा

  • फरक्का जल सन्धि पर पुनर्विचार जरूरी नहीं, इसका हो नवीनीकरण: संजय झा

  • सन्धि का 73 प्रतिशत बोझ बिहार पर हमारा पानी जा रहा बांग्लादेश: उमेश

तेजस टूडे ब्यूरो
सिद्धार्थ सुमन
भागलपुर, बिहार। भागलपुर में जदयू के ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसके तहत राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा एवं प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा का गंगा किनारे बसे बिहार के उन 12 जिलों में संवाद कर रहे हैं जो इस संधि के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं। संवाद कार्यक्रम के पहले चरण में बक्सर, भोजपुर, बेगूसराय और खगड़िया जिले तो दूसरे चरण में सारण, वैशाली, समस्तीपुर और पटना जिले शामिल थे। वहीं तीसरे चरण में लखीसराय और मुंगेर के बाद भागलपुर में कार्यक्रम हुआ और कल यह कार्यक्रम कटिहार में निर्धारित है। बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है।
यही कारण है कि इस जन-जागरुकता अभियान का शुभारंभ 5 सितंबर को बक्सर से हुआ जबकि समापन 4 नवंबर को कटिहार में होगा। इस मौके पर भागलपुर टाउन हॉल में आयोजित भव्य कार्यक्रम में कार्यक्रम प्रभारी एवं ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल, सांसद अजय मंडल, विधान पार्षद संजय सिंह, विधान पार्षद विजय सिंह, विधायक ललित मंडल, विधायक शुभानंद मुकेश, बिहार राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष प्रह्लाद सरकार, भागलपुर जिलाध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता, भागलपुर नगर अध्यक्ष संजय साह, संगठन जिला नवगछिया अध्यक्ष बीरेन्द्र कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारीगण और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान इस विषय पर पार्टी द्वारा तैयार की गई डॉक्यूमेंट्री फिल्म खास तौर से दिखाई गई। साथ ही विस्तृत जानकारी वाला पम्फलेट भी बांटा गया।
राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई यह संधि भारत के खासकर बिहार के हित में नहीं है, इसलिए इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और कोई संधि होती भी है तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस जल संधि के कारण बिहार का जल-प्रबंधन बुरी तरह बिगड़ा है और गंभीर जल-संकट का सामना कर रहे हैं, इसलिए बिहार के हित में इस पर पुनर्विचार जरूरी है। संजय कुमार झा ने आगे कहा कि फरक्का (गंगा) जल संधि के मुताबिक शुष्क मौसम (1 जनवरी से 31 मई) में जब बक्सर के पास गंगा का प्रवाह महज 400 क्यूमेक (लगभग 14 हजार क्यूसेक) तक रह जाता है तब भी फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूमेक (लगभग 53 हजार क्यूसेक) पानी छोड़ना पड़ता है जिसका मतलब यह है कि सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जा रहा है। यह सीधे तौर पर बिहार की हकमारी है।
प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार शुरू से कहते रहे हैं कि फरक्का बराज और फरक्का जल संधि से बिहार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक ओर फरक्का बराज के कारण गंगा में भारी गाद जमा हो जाने से नदी का तल ऊँचा हो गया है जिसके कारण उत्तर बिहार को हर साल बाढ़ का सामना करना पड़ता है तो दूसरी ओर फरक्का जल संधि के कारण शुष्क मौसम में हमें बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश को देना पड़ता है और हमारे कई जिलों में सूखे तक की स्थिति हो जाती है। इस अंतर्राष्ट्रीय संधि का 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है और 30 वर्षों से एक साथ बाढ़ और सूखे का दंश झेल रहा है। उनका कहना है जिसके यह हमारे साथ ज्यादती है जिसे हम इस अभियान के माध्यम से बताना चाहते हैं।
वहीं ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल सहित अन्य नेताओं ने कहा कि कहा कि पार्टी का यह अभियान बिहार के हक और बिहारवासियों के हित के लिए है, इसलिये अपनी आवाज केन्द्र तक पहुँचाना चाह रहे हैं, ताकि गंगा से जुड़े सवाल देश के सामने आएं और इस संधि पर पुनर्विचार हो। बिहार के हितों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। नेताओं ने इस पहल के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को साधुवाद दिया और इस जन-जागरुकता अभियान को लेकर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त किया।

 

 

 

 

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