इलाहाबाद विश्वविद्यालय: सामाजिक मनोविज्ञान में परोपकार पर वैज्ञानिक प्रयोग
तेजस टूडे ब्यूरो
राजीव जायसवाल
प्रयागराज। विज्ञान दिवस की पूर्व संध्या पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के स्नातक द्वितीय वर्ष के छात्रों ने परोपकार (Altruism) पर एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग संपन्न किया। इस अध्ययन में यह प्रमाणित हुआ कि व्यक्ति तब अधिक सहायता करता है, जब वह देखता है कि उसके आस—पास के लोग भी परोपकार में संलग्न हैं। साथ ही व्यक्ति के जीवन की पूर्व पीड़ा भी उसे दूसरों की मदद करने के लिए प्रेरित करती है। यह सामाजिक प्रयोग कैंसर पीड़ितों की सहायता से संबंधित था। प्रतिभागियों के दो समूह बनाये गये। प्रथम समूह से पूछा गया कि क्या वे कैंसर पीड़ितों की सहायता करना चाहेंगे? यदि हाँ, तो वे स्वेच्छा से धनराशि दे सकते हैं।
द्वितीय समूह को अतिरिक्त सूचना दी गई कि “आप जैसे किसी अन्य व्यक्ति ने भी सहायता हेतु धनराशि प्रदान की है।” दोनों समूहों को बताया गया कि एकत्रित धनराशि का उपयोग कमला नेहरू अस्पताल में आने वाले मरीजों के हित में किया जाएगा। प्रयोग के परिणामों से स्पष्ट हुआ कि द्वितीय समूह के प्रतिभागियों ने प्रथम समूह की तुलना में अधिक धनराशि देकर सहयोग किया। इससे यह सिद्ध होता है कि सामाजिक प्रभाव (Social Influence) और अनुकरण प्रवृत्ति (Imitative Behavior) परोपकार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मनोविज्ञान विभाग के आचार्य प्रो. संदीप आनंद के मार्गदर्शन में यह अध्ययन संपन्न हुआ। प्रोफेसर आनंद के अनुसार ऐसे वैज्ञानिक प्रयोग छात्रों में न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करते हैं, बल्कि उनके भीतर सामाजिक उत्तरदायित्व एवं परोपकार की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं। पूर्व वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार परोपकार की भावना व्यक्ति को आंतरिक संतोष और खुशी प्रदान करती है तथा मानसिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ बनाती है। वर्तमान प्रयोग के निष्कर्ष भविष्य में परोपकार की संस्कृति को प्रोत्साहित करने वाले नवीन सामाजिक प्रयोगों के डिज़ाइन में सहायक सिद्ध होंगे। विज्ञान दिवस की पूर्व संध्या पर इस वैज्ञानिक प्रयोग के सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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