Friday, August 12, 2022

गैंगस्टर में वांछित दो आरोपी चढ़े पुलिस के हत्थे

Must Read

- Advertisement -

चंदन अग्रहरि शाहगंज, जौनपुर। क्षेत्र के बडागांव निवासी किशोरी मंगलवार की दोपहर स्वजनों की डांट फटकार से छुब्ध होकर घर में रखा किटनाशक पदार्थ का सेवन कर लिया हालत गंभीर देखकर स्वजनों ने उपचार के लिए स्थानीय राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया। प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र के बडागांव निवासी नेहा (16) पुत्री त्रिभुवन ने घर के स्वजनों की डांट फटकार से छुब्ध होकर घर में रखा किटनाशक पदार्थ का सेवन कर लिया हालत गंभीर देखकर स्वजनों ने उपचार के लिए स्थानीय राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया जहां चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखकर जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया।

चंदन अग्रहरि
शाहगंज, जौनपुर। कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत गैंगस्टर एक्ट में वांछित दो अभियुक्तों को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर चालान भेज दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र के बकुची गांव निवासी शमसुद्दीन उर्फ शमशाद पुत्र अब्दुल अजीज को मंगलवार की शाम मुखबिर की सूचना पर उसरहटा आजाद रेलवे क्रासिंग के समीप से गिरफ्तार किया गया। वहीं बुधवार की सुबह सबरहद गांव निवासी कलीम पुत्र झिनक को सबरहद गांव के समीप से गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपितों के ऊपर गोवध निवारण अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में वांछित चल रहे थे। कोतवाली निरीक्षक भारत भूषण तिवारी ने मय हमराहियो समेत गिरफ्तार कर दोनों के विरुद्ध मामला दर्ज कर चालान भेज दिया।

जफराबाद, जौनपुर। खोजनपुर गांव के अनुसूचित बस्ती में सोमवार को देर रात करीब 3:00 बजे कच्चा मकान गिरने से वृद्ध पति पत्नी दब गए। पति की जान बच गई लेकिन पत्नी की दर्दनाक मौत हो गई। सूचना पुलिस को दे दी गई है। पोस्टमार्टम के लिए पुलिस ने शव को भेज दिया है। उक्त गांव निवासी इंद्रजीत 65 वर्ष पत्नी धनावती देवी 60 वर्ष के साथ अपने कच्चे घर में अलग-अलग चारपाई पर सोए हुए थे। देर रात करीब 3:00 बजे अचानक बारिश की वजह से कच्चे घर का दीवार ढह गया। दोनों दीवार के मिट्टी में दब गए। जोरदार आवाज सुनकर बगल के दूसरे घर में सो रहे परिवार के लोग दौड़कर पहुंचे। आनन-फानन में मिट्टी हटाकर इंद्रजीत को घायल अवस्था में बाहर निकाल लिए। धनावती देवी अधिक मलबे में दबी हुई थी। जब तक मलबा खोदकर बाहर निकाले, तब तक उनकी सांसे बंद हो चुकी थी। फिर भी आनन-फानन में लोग जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसी प्रकार अहमदपुर गांव में कच्चा मकान गिरने से मोहरा देवी पत्नी लालता की मलबे में दबने से मौत हो गई। बदलापुर, जौनपुर। आकाशीय बिजली की चपेट में आने से हुई किसान की मौत के बाद सोमवार को प्रशासन द्वारा उनके परिजन को मुआवजा स्वीकृति प्रमाण-पत्र दिया गया। स्थानीय क्षेत्र के ग्रामसभा पूरा सावल निवासी राजदेव यादव खेत में काम करने गए थे। तभी आकाशीय बिजली की चपेट में आ जाने से उनकी मौत हो गई थी। जिसका प्रशासन द्वारा सोमवार को चार लाख रूपये का मुआवजा स्वीकृति प्रमाण-पत्र उनकी पत्नी अनीता यादव को विधायक रमेश मिश्रा, एसडीएम अंजनी सिंह ने दिया। इस मौके पर प्रधान राजेश सिंह, मण्डल अध्यक्ष बलवीर गौड़, रामअवतार मौर्य, जवाहर लाल यादव, कृष्ण कुमार सिंह आदि मौजूद रहे। जौनपुर। भाजपा कार्यालय पर सामाजिक दूरी का ख्याल रखते हुये जिलाध्यक्ष श्री पुष्पराज सिंह के अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें आपातकाल पर चर्चा हुई। जिलाध्यक्ष ने कहा कि 25 जून का दिन एक विवादस्पद फैसले के लिए जाना जाता है यही वह दिन था जब देश में आपातकाल लगाने की घोषणा हुई तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जनता को बेवजह मुश्किलों के समुंदर में धकेल दिया। 25 जून, 1975 को आपातकाल की घोषणा की गई और 26 जून 1975 से 21-मार्च 1977 तक यानी 21 महीने की अवधि तक आपातकाल जारी रहा। आपातकाल के फैसले को लेकर इंदिरा गांधी द्वारा कई दलीलें दी गईं। देश को गंभीर खतरा बताया गया, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही थी उन्होंने कहा कि हमारे जिले जौनपुर से भी कई नेता जेल गए जिसमे मुख्य रूप से पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह अल्प आयु में ही जेल गए कैलाश विश्वकर्मा जी, हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव तमाम नेता जेल गये थे। जिलाध्यक्ष ने कहा कि आपातकाल की नींव 12 जून 1975 को ही रख दी गई थी जब इंदिरा गांधी के खिलाफ संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी राजनारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की राजनारायण ने अपनी याचिका में इंदिरा गांधी पर 6 आरोप लगाये थे 12 जून 1975 को राजनारायण की इस याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया इंदिरा गांधी को चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का दोषी पाया गया और इंदिरा गांधी के निर्वाचन को रद्द कर दिया और 6 साल तक उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ता इसलिए इस लटकती तलवार से बचने के लिए प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर आपात बैठक बुलाई गई। इस दौरान कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष डीके बरुआ ने इंदिरा गांधी को सुझाव दिया कि अंतिम फैसला आने तक वो कांग्रेस अध्यक्ष बन जाएं और प्रधानमंत्री की कुर्सी वह खुद संभाल लेंगे लेकिन बरुआ का यह सुझाव इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी को पसंद नहीं आया संजय की सलाह पर इंदिरा गांधी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 23 जून को सुप्रीम कोर्ट में अपील की सुप्रीम कोर्ट ने अगले दिन 24 जून 1975 को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वो इस फैसले पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें प्रधानमंत्री बने रहने की अनुमति दे दी, मगर साथ ही कहा कि वो अंतिम फैसला आने तक सांसद के रूप में मतदान नहीं कर सकतीं विपक्ष के नेता सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला आने तक नैतिक तौर पर इंदिरा गांधी के इस्तीफे पर अड़ गए। एक तरफ इंदिरा गांधी कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहीं थीं, दूसरी तरफ विपक्ष उन्हें घेरने में जुटा हुआ था। गुजरात और बिहार में छात्रों के आंदोलन के बाद विपक्ष कांग्रेस के खिलाफ एकजुट हो गया। लोकनायक कहे जाने वाले जयप्रकाश नारायण (जेपी) की अगुआई में विपक्ष लगातार कांग्रेस सरकार पर हमला कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अगले दिन 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में जेपी ने एक रैली का आयोजन किया जिसमे अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, आचार्य जेबी कृपलानी, मोरारजी देसाई और चंद्रशेखर जैसे तमाम दिग्गज नेता एक साथ एक मंच पर मौजूद थे। विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से इमरजेंसी के घोषणा पत्र पर दस्तखत करा लिए जिसके बाद सभी विपक्षी नेता गिरफ्तार कर लिए गए 26 जून 1975 को सुबह 6 बजे कैबिनेट की एक बैठक बुलाई गई इस बैठक के बाद इंदिरा गांधी ने ऑल इंडिया रेडियो के ऑफिस पहुंचकर देश को संबोधित किया उन्होंने कहा कि आपातकाल के पीछे आंतरिक अशांति को वजह बताई लेकिन इसके खिलाफ गहरी साजिश रची गई इसके बाद प्रेस की आजादी छीन ली गई, कई वरिष्ठ पत्रकारों को जेल भेज दिया गया अखबार तो बाद में फिर छपने लगे, लेकिन उनमें क्या छापा जा रहा है। ये पहले सरकार को बताना पड़ता था। इमरजेंसी का विरोध करने वालों को इंदिरा गांधी ने जेल भेज दिया था 21 महीने में 11 लाख लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. 21 मार्च 1977 को इमरजेंसी खत्म करने की घोषणा की गई। इंदिरा गांधी और कांग्रेस आपातकाल को संविधान के अनुसार लिए गया फैसला बताते रहे, लेकिन वास्तव में उन्होंने 1975 में संविधान द्वारा दिए गए इस अधिकार का दुरुपयोग किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल जिला उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंघानियां, अमित श्रीवास्तव, जिला महामंत्री शुशील मिश्रा, पीयूष गुप्ता, जिला मंत्री राजू दादा, अभय राय डीसीएफ चेयरमैन धन्यजय सिंह, भूपेंद्र पांडे, आमोद सिंह, विनीत शुक्ला, राजवीर दुर्गवंशी, रोहन सिंह, इन्द्रसेन सिंह प्रमोद, अनिल गुप्ता, प्रमोद प्रजापति, भाजयुमो जिला महामंत्री विकास ओझा, शुभम मौर्या आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे। जौनपुर। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रत्येक बूथ पर ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण कर रहे है, आज जिला महामंत्री श्री रामसूरत बिंद ने बूथ संख्या 58 सोधी ग्राम के मैदान में पौधरोपण करते हुये कहा कि वृक्षों में जीवधारियों के प्राण बसते हैं, यदि वृक्षों से होने वाले लाभों के बारे में सोचा जाए तो यह कथन पूरी तरह सच लगता है। वृक्ष जीव समुदाय को फल-फूल, पत्ती, लकड़ी और अनेक प्रकार के उपयोगी जड़ी बूटी प्रदान करते हैं धरती के हरियाली में शोभा बढ़ाते हैं यह प्राणवायु छोड़कर सारे संसार का भला करते हैं, यह वर्षा कारक है भूमि का क्षरण और बाढ़ रोकने में वृक्षों सा मददगार कोई नहीं, वृक्षों से रबड़, दातुन जड़ी-बूटी आदि उपयोगी पदार्थ प्राप्त होते इसलिए धरती पर जितने अधिक वृक्ष होंगे इसकी सुंदरता और गुणवत्ता में उतनी ही बृद्धि होगी। उनके साथ शैलेस यादव, किशन बिंद, सोनू बिंद और बूथ अध्यक्ष सहित तमाम कार्यकर्ता मौजूद रहे।

- Advertisement -

अब आप भी tejastoday.com Apps इंस्टॉल कर अपने क्षेत्र की खबरों को tejastoday.com पर कर सकते है पोस्ट

spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest News

रांची एयरपोर्ट को बम से उड़ाने व 20 लाख की रंगदारी मांगने के मामले में 3 गिरफ्तार

रांची एयरपोर्ट को बम से उड़ाने व 20 लाख की रंगदारी मांगने के मामले में 3 गिरफ्तार नीरज कुमार रांची (झारखण्ड)।...
- Advertisement -spot_img

More Articles Like This