भारत भी खुशहाल हुआ बिटिया अपनी पाकर।।
एक कल्पना गई देश से अन्तरिक्ष में उड़कर।
आ न सकी जीते जी ख़ामोश हो गये थककर।।
पांच जून को गई सुनीता तेरह को आएगी।
किसे पता था जीवन सपना सच कर पाएगी।।
लगी वहां पर जांच परखने अन्तरिक्ष में घूमी।
नयी खोज संधान किया आसमान को चूमी।।
डेढ़ घंटे की रात थी उतने का ही होता दिन।
सोचो दुनिया वालों क्या होता जीवन के बिन।।
धैर्य साधना दृढ़ निश्चय जीवन के उसके मंत्र रहे।
विज्ञान प्रद्योगिकी अनुसंधान पर जो स्वतंत्र रहे।।
आइएसएस नाम कर दिया पूछ रही सारी दुनिया।
गुजरात की पली बढ़ी स्पेस से देखी थी दुनिया।।
अन्तरिक्ष में भारत का झंडा जब उसने फहराया।
लिखी पढ़ी अमरीका से पर भारत ने भी अपनाया।।
प्रधानमंत्री ने पत्र भेजकर चंद्रयान की नापी दूरी।
सुनीता का सम्मान बढ़ाया पूछी उसकी मजबूरी।।
चार लोग स्पेस में पहुंचे बंधकर वहां अड़े रहे।
कैसे आएंगे सब वापस इंतजार में खड़े रहे।।
उनकी जीवन शैली सुन दुखी हुए सब लोग यहां।
खुशहाली इस बात की पकड़ा न कोई रोग वहां।।
जो इतिहास बनाया अपना कैसे कोई दुहराए।
नासा के वैज्ञानिक सोचें कितना परिवर्तन लांए।।
बीत गया नौ माह मगर सबको बात खटकती है।
जिंदा होंगे कैसे सब जब राहें रोज भटकती हैं।।
देवी प्रसाद शर्मा ‘प्रभात’
तेजस टूडे ब्यूरो चीफ आजमगढ़
मो.नं. 7008310396
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