उक्त बातें स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी के शिष्य नारद महाराज ने मड़ियाहूं कस्बे की रानीपुर ग्राम में विनय यादव के आवास पर अखंड गीता के पाठ के समापन पर श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुये कही। साथ ही आगे कहा कि जिस प्रकार शरीर निर्वाह के लिए हर प्राणी भोजन करता है, उसी प्रकार आत्मा का भोजन भजन है। जितना अधिक भजन करेंगे, उतना अधिक आत्मा बलवती होती जाएगी। हर व्यक्ति को गीता के अनुरूप आचरण करना चाहिये। ‘बड़े भाग्य मानुष तन पावा’। गोस्वामी जी ने इसका रामचरितमानस में उल्लेख किया है। मानव जन्म अनमोल है। इसका सदुपयोग करना चाहिए। अधिक से अधिक भगवान का भजन करें। भगवान के लिए भी समय निकाले ईश्वर का भजन ही सत्य है। बाकी संसार की सारी वस्तुएं सत्य और मिथ्या एवं नश्वर हैं। गीता के भाष्य यथार्थ गीता की 3—4 आवृत्ति कर लें। गीता समझ में आ जायेगी। इस अवसर पर प्यारे लाल शर्मा, राजकुमार यादव, बैजनाथ प्रजापति, चन्द्रभान यादव, आचार्य विकास दुबे, राधाकृष्ण शर्मा, आचार्य विनय दुबे, जैनेन्द्र दुबे सहित तमाम लोग मौजूद रहे।





