Homeआजमगढ़आजमगढ़ में शिक्षा के शिखर तक पहुंचे बजरंग जी नहीं रहे

आजमगढ़ में शिक्षा के शिखर तक पहुंचे बजरंग जी नहीं रहे

आजमगढ़ में शिक्षा के शिखर तक पहुंचे बजरंग जी नहीं रहे

तेजस टूडे ब्यूरो
देवी प्रसाद शर्मा
आजमगढ़। पूर्वांचल के शिक्षा जगत को गहरा आघात पहुंचा है। ऑल इंडिया चिल्ड्रन केयर एजुकेशनल एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के संस्थापक, दो दर्जन से अधिक शिक्षण संस्थानों के जनक और पूर्वांचल के ‘मालवीय’ कहे जाने वाले प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. बजरंग त्रिपाठी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होंने गुरुवार को प्रातःकाल अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरा आजमगढ़ शोक में डूब गया है। समाज, शिक्षा जगत और उनके हजारों छात्रों के लिए यह अपूरणीय क्षति है। उनकी स्मृति में ऑल इंडिया चिल्ड्रन केयर एजुकेशनल एंड डेवलपमेंट सोसाइटी द्वारा संचालित सभी शिक्षण संस्थाएं 3 दिन के लिए बंद रहेंगी। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार की सुबह अंबडेकरनगर जनपद के रामबाग घाट पर किया जाएगा।प्रो. त्रिपाठी ने शिक्षा को केवल किताबों तक नहीं सीमित रखा, बल्कि व्यावसायिक शिक्षा और मेडिकल क्षेत्र में भी क्रांतिकारी पहल की। 1999 में 300 बेड वाला फार्मेसी कॉलेज शुरू किया। 2005 में डेंटल कॉलेज की स्थापना की। 2006 में नर्सिंग डिग्री कॉलेज को मान्यता मिली। गर्ल्स स्कूल, अंबेडकरनगर में संत कमला पब्लिक स्कूल जैसे दो दर्जन से अधिक संस्थानों की स्थापना उनके शिक्षा विस्तार का हिस्सा बनी। आज, उनके द्वारा खड़ा किया गया शिक्षा संस्थानों का यह साम्राज्य हजारों छात्रों के भविष्य का निर्माण कर रहा है। प्रेरणास्रोत और आदर्श प्रो. त्रिपाठी का मानना था कि उन्होंने जो कुछ भी हासिल किया, वह उनके गुरुओं की देन है। उन्होंने हमेशा अपने जीवन की सफलता का श्रेय कैप्टन अशफाक खान, मेजर एम.जे. हसन और डा. दीनानाथ लाल श्रीवास्तव को दिया। प्रो. बजरंग त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के पहले ऐसे प्राध्यापक थे जिन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर शिक्षा के क्षेत्र में स्वतंत्र प्रयास की मिसाल पेश की। जब वह शिब्ली कॉलेज में पढ़ा रहे थे, तब उन्होंने यह साहसिक निर्णय लिया और अपनी नई पारी शुरू की जिसका असर आज पूरे पूर्वांचल पर देखा जा सकता है।
वरिष्ठ पत्रकार धर्मेन्द्र श्रीवास्तव कहते हैं कि प्रो. त्रिपाठी केवल एक शिक्षक नहीं थे, बल्कि एक विचार, एक आंदोलन और शिक्षा में समर्पण की जीती-जागती मिसाल थे। उन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर अपने संघर्षों, दूरदर्शिता और अद्भुत संगठनात्मक क्षमता से तय किया। उनका जीवन आज के युवाओं और शिक्षकों के लिए एक आदर्श है। उनकी शिक्षा-यात्रा, उनकी दूरदर्शिता और समाज के लिए उनका समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। उनके जाने से जो रिक्तता बनी है, उसे भरना असंभव है।

आधुनिक तकनीक से करायें प्रचार, बिजनेस बढ़ाने पर करें विचार
हमारे न्यूज पोर्टल पर करायें सस्ते दर पर प्रचार प्रसार।

 JAUNPUR NEWS: Hindu Jagran Manch serious about love jihad

Job: Correspondents are needed at these places of Jaunpur

600 बीमारी का एक ही दवा RENATUS NOVA

Must Read