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अधिवक्ता हितों के विपरीत आचरण करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में मनमाने तरीके से व्यवधान भी उत्पन्न किया जा रहा है। 8 जनवरी 2025 को मतदाता सूची का प्रकाशन भी हो चुका है तथा 16 जनवरी को वार्षिक आमसभा की बैठक में चुनाव कार्यक्रम जारी करते हुए मतदान की तिथि 12 फरवरी नियत की गई थी। कार्यकारिणी द्वारा सदन के बहुमत द्वारा पारित प्रस्ताव के विपरीत जाकर चुनाव कराने से इनकार कर दिया गया है। कार्यकारिणी द्वारा अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए सदन में पारित बहुमत के चुनाव के प्रस्ताव की विपरीत जाकर दिनांक 16 मई 2025 को गोपनीय तरीके से बिना सदन को विश्वास में लिए 2025 की कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई। मनमाने और अलोकतांत्रिक तौर तरीकों के आधार पर घोषित वर्ष 2025 की कार्यकारिणी में पिछली कार्यकारिणी के पदाधिकारी को भी सम्मिलित कर लिया गया है जो की मॉडर्न बायलॉज के सर्वथा विपरीत है। कार्यकारी द्वारा लगातार सदन में बहुमत द्वारा पारित प्रस्ताव की अनदेखी की जा रही है और मनमाने कार्य स्थगन के प्रस्ताव पास किया जा रहे हैं। अधिवक्तागण सामूहिक इस्तीफा के लिए बाध्य हो सकते हैं। कार्यकारी द्वारा सदस्य गणों से सदस्यता शुल्क के रूप में धनराशि जमा कराई गई थी उसका व्यय मनमाने तरीके से बिना सदन में प्रस्ताव के किया गया तथा अधिवक्ता कल्याण के रूप में कोई धनराशि व्यय नहीं की गई। अधिवक्ताओं ने अध्यक्ष बार काउंसिल से मांग किया की नियम के विपरीत मनोनीत कार्यकारिणी को निरस्त करते हुए मिश्रिख बार एसोसिएशन को चुनाव हेतु निर्देशित किया जाए। इस मौके पर सुधीर शुक्ल राना, सौरभ सक्सेना, सुनील त्रिपाठी, सुरेंद्र मोहन, गौरव वाजपई, अजय पाण्डेय, आनंद यादव, नरेंद्र प्रताप सिंह, राजेंद्र अवस्थी, रामजीवन, नितिन गिरि, दिलीप कुमार, आशीष मिश्रा, प्रेम प्रकाश राजवंशी, बृजलाल चौधरी, प्रमोद कुमार, नंदकिशोर आदि अधिवक्ताओं ने हस्ताक्षरित मांग पत्र प्रेषित किया।










